अंबाला बिल्डिंग हादसा: कमजोर दीवार पर खड़ी थी बिल्डिंग, 6 की चली गई जान, 15 घंटे चला रेस्‍कयू बंद

अंबाला के धूलकोट में निर्माणाधीन तीन मंजिला बिल्डिंग गिरने से 6 लोगों की मौत हुई। मजदूरों ने गलत शटरिंग और जल्दबाजी में निर्माण के आरोप लगाए।

अंबाला बिल्डिंग हादसा: कमजोर दीवार पर खड़ी थी बिल्डिंग, 6 की चली गई जान,   15 घंटे चला रेस्‍कयू बंद

➤ निर्माणाधीन तीन मंजिला बिल्डिंग का पिछला हिस्सा भरभराकर गिरा, 6 लोगों की मौत
➤ मजदूरों का आरोप-लेंटर सूखने से पहले दूसरा डाला, शटरिंग भी ठीक नहीं थी
➤ NDRF समेत टीमों ने 15 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन, 4 घायल अस्पताल में भर्ती


अंबाला। हरियाणा के अंबाला में निर्माणाधीन तीन मंजिला बिल्डिंग का पिछला हिस्सा भरभराकर गिरने से अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4 लोगों का अंबाला सिटी अस्पताल में इलाज चल रहा है। हादसा रविवार दोपहर करीब 3 बजे धूलकोट गांव में हुआ, जब तीसरी मंजिल पर लेंटर डालने का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक लेंटर नीचे बैठ गया और बिल्डिंग का पिछला हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। NDRF और अन्य बचाव दल रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे रहे। करीब 15 घंटे बाद ऑपरेशन बंद किया गया। आसपास के लोगों और वहां काम करने वाले मजदूरों ने निर्माण में जल्दबाजी, कमजोर दीवार और गलत शटरिंग को हादसे की वजह बताया है। हालांकि, पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक का पता लगाने और निर्माण अधिकृत था या नहीं, इसकी जांच की बात कही है।

आसपास के लोगों के मुताबिक, यह बिल्डिंग जग्गी प्रॉपर्टीज की बताई जा रही है। कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर आरोप लगाया कि महज 15 से 20 दिनों में बिल्डिंग खड़ी कर दी गई और वह करीब 4 इंच की दीवार पर बनाई जा रही थी। लोगों का कहना है कि एक लेंटर को पर्याप्त समय तक सूखने नहीं दिया गया और उसके ऊपर लगातार दूसरा लेंटर डालने का काम चलता रहा। हालांकि, SP अजीत शेखावत ने कहा कि बिल्डिंग के मालिक का भी पता लगाया जा रहा है। अगर यहां अनऑथराइज्ड कंस्ट्रक्शन हो रहा था तो कार्रवाई की जाएगी।

मरने वालों में ये शामिल

तीनों मंजिलों पर मजदूर कर रहे थे काम

धूलकोट गांव में जिस तीन मंजिला बिल्डिंग का निर्माण चल रहा था, उसके बारे में आसपास के लोगों का कहना है कि इसे गोदाम के लिए बनाया जा रहा था। हादसे के समय बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर लेंटर डालने का काम चल रहा था। पहली मंजिल पर प्लास्टर और दूसरी मंजिल पर फर्श डालने का काम किया जा रहा था।

बिल्डिंग में काम कर रहे कर्मजीत के मुताबिक, पहली मंजिल पर 6 से 7 लोग, दूसरी मंजिल पर 3 लोग और तीसरी मंजिल पर 10 से 12 लोग काम कर रहे थे। दोपहर करीब 3 से 3:30 बजे के बीच अचानक लेंटर नीचे बैठ गया। दूसरी मंजिल पर काम कर रहे मजदूर भी मलबे में दब गए। कुछ मजदूरों ने जान बचाने के लिए ऊपर से छलांग लगा दी। हादसे में बिल्डिंग के पीछे का हिस्सा नीचे तक पूरी तरह गिर गया, जबकि आगे का हिस्सा अभी भी खड़ा है।

मजदूर ने गलत शटरिंग को बताया वजह

बिहार के पूर्णिया निवासी मजदूर रामचंद्र ने आरोप लगाया कि वह भी इसी बिल्डिंग में काम करता था। उसके मुताबिक, हादसे से 2 दिन पहले लेंटर डालने के लिए शटरिंग की गई थी, लेकिन मिस्त्री ने शटरिंग ठीक तरीके से नहीं की। रामचंद्र का कहना है कि शटरिंग की स्थिति देखकर उसने काम छोड़ दिया था। उसने आरोप लगाया कि गलत शटरिंग के कारण ही बिल्डिंग का हिस्सा गिरा।

मिस्त्री के बेटे ने भी जग्गी प्रॉपर्टीज की बिल्डिंग होने की बात कही

अंबाला के सदोपुर गांव निवासी संदीप ने बताया कि उसके पिता रामजी दास (63) जग्गी प्रॉपर्टीज के यहां मिस्त्री का काम करते थे। संदीप के अनुसार, हादसे में उनके पिता की भी मौत हो गई। हादसे के समय रामजी दास ग्राउंड फ्लोर पर प्लास्टर का काम कर रहे थे। संदीप ने बताया कि यहां काम पूर्व फौजी राणा की देखरेख में हो रहा था।

अस्पताल पहुंचाए गए घायलों में कई को मिली छुट्टी

अंबाला सिटी हॉस्पिटल की RMO डॉक्टर अदिति ने बताया कि शुरुआत में 12 घायल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे। इनमें से 9 लोगों का इलाज करने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई, जबकि 3 की हालत गंभीर बताई गई। हादसे के बाद घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

करीब 15 दिन के अंतराल पर डाले जा रहे थे लेंटर

मजदूर कर्ण ने बताया कि बिल्डिंग का काम 4 जुलाई को शुरू हुआ था और वह 8 जुलाई को काम पर आया था। उसके मुताबिक, काम शुरू होने के करीब 20 दिन बाद 3 लोगों ने आकर काम रुकवा दिया था। फोरमैन के कहने पर काम बंद होने के दौरान वह करीब 15 दिन तक किसी दूसरी जगह पर काम करता रहा। इसके बाद बिल्डिंग का काम दोबारा शुरू हुआ।

कर्ण के अनुसार, इसके बाद करीब हर 15 दिन के बाद लेंटर डालने का काम चल रहा था। हादसे वाले दिन भी ऊपर लेंटर डालने का काम चल रहा था, जबकि ग्राउंड फ्लोर पर प्लास्टर किया जा रहा था।

धूल के गुब्बार के बीच मजदूरों को छत से कूदते देखा

बिल्डिंग के सामने किरायेदार दुकान संचालक सुमंत ने बताया कि यहां करीब 3 महीने से निर्माण कार्य चल रहा था। रविवार दोपहर अचानक धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और सामने वाली बिल्डिंग भरभराकर नीचे आ गई। कुछ ही सेकंड में पूरे इलाके में धूल का गुब्बार छा गया।

सुमंत के मुताबिक, धूल छंटने के बाद कुछ मजदूर पहली मंजिल से छलांग लगाते दिखाई दिए। किसी के पैर में चोट लगी तो किसी की टांग में चोट आई। उसने बताया कि रामगोपाल यादव, भूपेश कुमार और संतोष सिंह समेत कुछ मजदूरों ने जान बचाने के लिए छलांग लगाई।

मलबे से खुद बाहर निकला मजदूर

वेद गरनाला निवासी वेद प्रकाश ने बताया कि वह मिस्त्री और मजदूरों के साथ ग्राउंड फ्लोर पर प्लास्टर का काम कर रहा था। अचानक लेंटर गिर पड़ा और वह मलबे में दब गया। उसके हाथ में चोट आई और ऊपर ईंटें व सरिये पड़े थे। कड़ी मशक्कत के बाद वह खुद को मलबे से बाहर निकालने में कामयाब हुआ।

वेद प्रकाश के मुताबिक, करीब 10 मिनट बाद लोग उसके पास पहुंचे और उसे अस्पताल पहुंचाया। बाद में उसे पता चला कि उसके साथ काम कर रहे 4 मिस्त्री और मजदूरों की जान जा चुकी है।

13 जून को दिया गया था बिल्डिंग बनाने का ठेका

राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इस जमीन को 2019 में पंचकूला निवासी अजय ने गांव गोली की एक महिला को बेचा था। जमीन की चौड़ाई 25 फीट और लंबाई 123.6 फीट थी। बिल्डिंग बनाने का ठेका 13 जून 2026 को महिला ने ठेकेदार मलकीत सिंह को दिया था।

रिकॉर्ड के मुताबिक, यह ठेका 200 रुपए प्रति वर्ग गज के हिसाब से हुआ था। ठेकेदार को इसके लिए बाकायदा एडवांस पैसे भी दिए जा चुके थे।

हादसे के बाद अब निर्माण की गुणवत्ता, शटरिंग, निर्माण की अनुमति और बिल्डिंग के मालिक समेत कई पहलुओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की ओर से बिल्डिंग के मालिक का पता लगाने और अगर निर्माण अनधिकृत पाया गया तो कार्रवाई करने की बात कही गई है।