मयूर विहार से AIIMS तक सफर होगा आसान, 15-20 मिनट में पहुंचेगी गाड़ी; बारापुला फेज-3 से बदल जाएगी दिल्ली की राह
बारापुला फेज-3 से मयूर विहार, नोएडा और गाजियाबाद से साउथ दिल्ली की कनेक्टिविटी आसान होगी। AIIMS तक सफर घटकर 15 मिनट होने की उम्मीद है।
➤ मयूर विहार से सराय काले खां तक सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी, जाम वाले रास्तों से मिलेगी राहत
➤ AIIMS और सफदरजंग तक 45-60 मिनट का सफर घटकर करीब 15-20 मिनट होने की उम्मीद
➤ नोएडा और गाजियाबाद से साउथ दिल्ली जाने वालों को मिलेगा वैकल्पिक तेज रास्ता
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में रोजाना सफर करने वाले हजारों लोगों के लिए बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर सिर्फ एक नया फ्लाईओवर नहीं, बल्कि सफर के तरीके में बड़ा बदलाव लाने वाला संपर्क मार्ग बन सकता है। मयूर विहार फेज-1 से सराय काले खां के बीच करीब 3.5 किलोमीटर लंबा चार लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर शुरू होने के बाद पूर्वी दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद की तरफ से साउथ दिल्ली जाने वाले यात्रियों को कई व्यस्त चौराहों और सिग्नलों से बचते हुए सीधा रास्ता मिलेगा। मौजूदा बारापुला नेटवर्क से जुड़ने के बाद मयूर विहार फेज-1 से AIIMS और दक्षिण दिल्ली की ओर करीब 9 किलोमीटर का सिग्नल-फ्री कॉरिडोर उपलब्ध होगा। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक इससे AIIMS की तरफ जाने वाले कुछ यात्रियों का सफर करीब 35-40 मिनट से घटकर लगभग 15 मिनट तक हो सकता है, जबकि मयूर विहार से साउथ दिल्ली के कुछ मार्गों पर 45-60 मिनट का समय भी करीब 15-20 मिनट तक आने की उम्मीद जताई गई है।
इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा उन यात्रियों को होगा, जिन्हें ईस्ट दिल्ली से साउथ दिल्ली की तरफ रोजाना आना-जाना पड़ता है। अभी ऐसे यात्रियों को कई जगहों पर भारी ट्रैफिक और सिग्नल का सामना करना पड़ता है। बारापुला फेज-3 मौजूदा बारापुला फेज-1 और फेज-2 नेटवर्क से जुड़कर इस दूरी को अधिक सीधा बनाने का काम करेगा। इससे मयूर विहार से सराय काले खां और आगे AIIMS की तरफ जाने वाले यात्रियों के लिए सड़क का एक लगातार और अपेक्षाकृत निर्बाध विकल्प तैयार होगा।
नोएडा से साउथ दिल्ली जाने वालों को सबसे बड़ा फायदा
बारापुला फेज-3 का असर नोएडा-दिल्ली कनेक्टिविटी पर भी दिखाई देगा। नोएडा के सेक्टर 14-15, सेक्टर 18 और चिल्ला बॉर्डर की तरफ से आने वाले यात्रियों को साउथ दिल्ली की ओर जाते समय आश्रम या सराय काले खां जैसे व्यस्त हिस्सों पर निर्भरता कम करने वाला रास्ता मिलेगा। मयूर विहार फेज-1 से कॉरिडोर पर चढ़कर यात्री AIIMS और साउथ दिल्ली की तरफ आगे बढ़ सकेंगे। रिपोर्टों के अनुसार AIIMS तक यात्रा का समय करीब 15 मिनट तक आने की उम्मीद है।
इसका मतलब यह है कि नोएडा से साउथ दिल्ली जाने वाले वाहन चालकों के लिए सफर में लगने वाला समय ही नहीं, बल्कि रास्ते में बार-बार रुकने और ट्रैफिक में फंसने की समस्या भी कम हो सकती है। ट्रैफिक का दबाव कम होने पर ईंधन की खपत और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी आने की संभावना भी जताई जा रही है।
गाजियाबाद और एनसीआर के यात्रियों के लिए भी नया विकल्प
इंदिरापुरम, वैशाली और वसुंधरा की तरफ से दिल्ली आने वाले वाहन चालकों के लिए भी यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण होगा। ये वाहन चालक NH-9 यानी दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे या गाजीपुर बॉर्डर के रास्ते दिल्ली में प्रवेश करते हैं। मयूर विहार के पास बारापुला फेज-3 से जुड़ने के बाद उन्हें रिंग रोड के भारी ट्रैफिक से बचते हुए साउथ दिल्ली की तरफ जाने का वैकल्पिक मार्ग मिलेगा।
इससे गाजियाबाद और आसपास के इलाकों से आने वाले यात्रियों के लिए साउथ दिल्ली की कनेक्टिविटी अधिक सीधी हो सकती है। खासतौर पर रोजाना ऑफिस, अस्पताल और अन्य जरूरी कामों के लिए दिल्ली आने-जाने वाले लोगों के लिए यात्रा समय में कमी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
रिंग रोड, ITO और आश्रम चौक पर भी घट सकता है दबाव
बारापुला फेज-3 का एक अहम उद्देश्य दिल्ली के उन हिस्सों पर ट्रैफिक का दबाव कम करना है, जहां पीक आवर्स में वाहनों की लंबी कतारें लगती हैं। रिंग रोड, ITO, आश्रम चौक और भैरों मार्ग जैसे हिस्सों पर ट्रैफिक का कुछ भार वैकल्पिक मार्ग पर जाने से कम हो सकता है।
सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी के कारण वाहन चालकों को बार-बार लाल बत्ती पर रुकने की जरूरत कम होगी। इससे यात्रा के दौरान लगने वाला समय घटने के साथ ईंधन की खपत में भी कमी आ सकती है। ट्रैफिक की गति बेहतर होने से सड़क पर वाहनों के लंबे समय तक खड़े रहने की स्थिति भी कम होने की उम्मीद है।
साइकिल और पैदल यात्रियों के लिए भी सुविधा
यह कॉरिडोर केवल मोटर वाहनों की कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है। इसमें साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए ट्रैक भी रखा गया है। इससे परियोजना को सड़क परिवहन के साथ पैदल और साइकिल से आने-जाने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी बनाने की कोशिश की गई है।
यमुना के ऊपर बनेगा दिल्ली का 10वां पुल
बारापुला फेज-3 की एक खास विशेषता इसका यमुना नदी के ऊपर से गुजरना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह यमुना पर दिल्ली का 10वां पुल होगा। बाढ़ क्षेत्र में निर्माण के दौरान बड़े स्पैन का इस्तेमाल किया गया है। करीब 125 मीटर लंबे पिलर स्पैन के इस्तेमाल से नदी के बाढ़ क्षेत्र में निर्माण के प्रभाव को कम रखने की कोशिश की गई है।
सराय काले खां बनेगा बड़ा ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी हब
बारापुला फेज-3 की लोकेशन इसे सिर्फ सड़क परियोजना नहीं रहने देती। यह सराय काले खां ISBT, हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन और सराय काले खां रैपिड रेल स्टेशन के पास से गुजरता है। ऐसे में यहां सड़क, बस, रेलवे और रैपिड रेल कनेक्टिविटी के बीच संपर्क और मजबूत होने की संभावना है।
सराय काले खां पहले से ही दिल्ली के प्रमुख परिवहन केंद्रों में शामिल है। नए कॉरिडोर के जुड़ने के बाद इस क्षेत्र की मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
DND, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और रिंग रोड से जुड़ाव
बारापुला फेज-3 कई महत्वपूर्ण सड़कों और कॉरिडोर से कनेक्ट होगा। सराय काले खां के पास यह DND फ्लाईवे से जुड़ता है, जिससे नोएडा से आने वाले यातायात को साउथ दिल्ली और आगे एयरपोर्ट की दिशा में जाने का वैकल्पिक मार्ग मिलता है।
मयूर विहार फेज-1 के पास इसका लिंक दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से होता है। इससे गाजियाबाद और हापुड़ की ओर से आने वाले वाहनों को भी इस नेटवर्क तक पहुंच मिलती है।
सराय काले खां छोर पर यह महात्मा गांधी रिंग रोड से जुड़ता है। इससे आश्रम, लाजपत नगर और धौला कुआं की दिशा में जाने वाले यात्रियों को भी कनेक्टिविटी का फायदा मिल सकता है। इसके अलावा मथुरा रोड (NH-44) की तरफ से आने-जाने वाले वाहनों को भी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा।
सिर्फ बारापुला नहीं, दो फ्लाईओवर और एक अंडरपास पर भी काम
दिल्ली में ट्रैफिक सुधार के लिए बारापुला फेज-3 के साथ दूसरे सड़क प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ाए जा रहे हैं। मुकरबा चौक अंडरपास का उद्घाटन भी इसी कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके अलावा मोदी मिल से कालकाजी फ्लाईओवर और सावित्री सिनेमा हाफ फ्लाईओवर की आधारशिला रखे जाने की जानकारी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य दक्षिण और उत्तरी दिल्ली के प्रमुख ट्रैफिक हिस्सों में दबाव कम करना है।
2014 में मंजूर हुआ था प्रोजेक्ट, लंबे इंतजार के बाद तैयार
बारापुला फेज-3 परियोजना को 2014 में मंजूरी मिली थी और निर्माण कार्य 2015 में शुरू हुआ था। इसे मूल रूप से 2017 तक पूरा किया जाना था, लेकिन परियोजना को कई स्तरों पर देरी का सामना करना पड़ा। अलग-अलग रिपोर्टों में इसके लिए पर्यावरण मंजूरी, जमीन से जुड़े मुद्दों, यमुना क्षेत्र में निर्माण और कोविड-19 महामारी समेत कई कारणों का उल्लेख किया गया है। परियोजना में कई समय-सीमाएं भी आगे बढ़ीं।
देरी के कारण परियोजना की लागत बढ़कर करीब 1,635 करोड़ रुपये हो गई। करीब एक दशक के इंतजार के बाद अब यह कॉरिडोर आम यात्रियों के लिए खुलने की स्थिति में पहुंचा है।
और अब आज हुआ शुभारंभ
लंबे इंतजार और कई बार समय-सीमा आगे बढ़ने के बाद आज 29 सितंबर 2026 को बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर का शुभारंभ किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसका उद्घाटन करेंगे। परियोजना के सार्वजनिक उपयोग के लिए खुलने के साथ मयूर विहार फेज-1 से सराय काले खां और आगे साउथ दिल्ली की तरफ जाने वाले यात्रियों को नया सिग्नल-फ्री मार्ग मिलेगा।
Akhil Mahajan