राष्ट्रपति को ज्ञानेश कुमार ने भेजा इस्तीफा? जानें चुनाव आयोग ने क्या बताया
ज्ञानेश कुमार के नाम से राष्ट्रपति को भेजे गए कथित इस्तीफा पत्र के वायरल होने पर चुनाव आयोग ने इसे फर्जी और AI से तैयार किया दस्तावेज बताया।
➤ राष्ट्रपति को भेजे इस्तीफे का दावा करता पत्र वायरल
➤ चुनाव आयोग ने पत्र को फर्जी और मनगढ़ंत बताया
➤ SIR को लेकर विवाद के बीच वायरल हुआ कथित इस्तीफा पत्र
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नाम से एक कथित इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। वायरल पत्र में दावा किया गया था कि ज्ञानेश कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफा देने की पेशकश करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र भेजा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस दावे को खारिज करते हुए पत्र को फर्जी बताया है। आयोग के प्रवक्ता के मुताबिक, यह पत्र AI से तैयार किया गया और मनगढ़ंत है। चुनाव आयोग ने लोगों से ऐसे फर्जी पत्र पर भरोसा नहीं करने की अपील की है।
वायरल पत्र पर ज्ञानेश कुमार के कथित हस्ताक्षर भी दिखाई दे रहे थे और इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम संबोधित किया गया था। पत्र में इस्तीफे का दावा करते हुए आत्मचिंतन और विचार के बाद फैसला लेने तथा भारत सरकार और देश के नागरिकों का भरोसा जताने जैसी बातें लिखी गई थीं। हालांकि, चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट किया गया कि ऐसा कोई इस्तीफा पत्र वास्तविक नहीं है।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक बहस चल रही है। हालिया मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों के बीच SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों को लेकर कथित मतभेदों का जिक्र किया गया था। इसके बाद विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।
चुनाव आयोग ने क्या कहा.
चुनाव आयोग के मुताबिक, वायरल किया जा रहा कथित त्यागपत्र फर्जी है। आयोग के प्रवक्ता ने पत्र को मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि यह AI-generated है। आयोग ने लोगों से अपील की कि वे ऐसे फर्जी दस्तावेजों पर विश्वास न करें और उन्हें तथ्य मानकर आगे साझा करने से बचें।
चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी में भी ज्ञानेश कुमार को वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है। आयोग की अधिकारियों की निर्देशिका में ज्ञानेश कुमार का नाम Chief Election Commissioner के रूप में दर्ज है।
SIR को लेकर पहले भी उठे थे सवाल.
ज्ञानेश कुमार को लेकर यह फर्जी इस्तीफा पत्र उस समय सामने आया, जब SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के कामकाज पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े कुछ फैसलों और आदेशों पर कई बार आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा मतदाता सूची के डेटाबेस से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया था।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद किसी नीतिगत मतभेद से इनकार किया था। आयोग ने कहा था कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति या IT व्यवस्था से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था।
विपक्ष की ओर से इस्तीफे की मांग.
SIR को लेकर सामने आई रिपोर्टों के बाद कांग्रेस समेत विपक्ष के कई दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। कुछ विपक्षी नेताओं ने SIR को रोकने की मांग भी उठाई। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच ज्ञानेश कुमार के नाम से कथित इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
इसी विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR से जुड़ी अन्य मांगें उठाई हैं। CJP ने 2 अक्टूबर को मुंबई से विरोध प्रदर्शन शुरू करने की बात कही थी। 27 सितंबर को अभिजीत दीपके ने बताया कि मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और इसके बाद उन्होंने जेल भरो आंदोलन की बात कही।
फिलहाल वायरल पत्र को लेकर चुनाव आयोग की स्थिति स्पष्ट है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का दावा करने वाला पत्र फर्जी है। इसलिए वायरल दस्तावेज को वास्तविक इस्तीफा पत्र मानने का आधार नहीं है।
Akhil Mahajan