हरियाणा में पेट्रोल-डीजल संकट की आहट: नायरा ने पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर किया महंगा , पंपों पर लगी कतारें; सप्लाई ठप होने से बढ़ी चिंता
हरियाणा के हिसार और फतेहाबाद में पेट्रोल-डीजल संकट गहराया, नायरा एनर्जी के दाम बढ़ाने के बाद पंपों पर भीड़ और सप्लाई बाधित।
■ नायरा एनर्जी ने पेट्रोल 5 और डीजल 3 रुपये महंगा किया
■ हिसार-फतेहाबाद में सप्लाई बाधित, पंपों पर लंबी कतारें
■ पश्चिम एशिया संकट से कच्चे तेल में उछाल, हालात और बिगड़ने के संकेत
देश में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ अब हरियाणा में संकट के हालात बनते नजर आ रहे हैं। निजी कंपनी नायरा एनर्जी द्वारा पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा किए जाने के बाद इसका सीधा असर जमीन पर दिखने लगा है। हिसार और फतेहाबाद जैसे जिलों में पेट्रोल-डीजल को लेकर अफरा-तफरी का माहौल बन गया है, जहां पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं और लोग जल्द से जल्द टैंक फुल कराने में जुटे हैं।
फतेहाबाद में दोपहर के समय कई पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कुछ पंपों पर तो हालात ऐसे बने कि ईंधन खत्म होने की स्थिति तक पहुंच गई। पंप संचालकों ने साफ कहा कि डिपो से नियमित सप्लाई नहीं मिल रही है और फिलहाल उनके पास केवल इमरजेंसी कोटा ही बचा है। यदि रात तक सप्लाई नहीं पहुंचती, तो कई पंप पूरी तरह सूख सकते हैं। इससे आम लोगों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और खेती-किसानी से जुड़े कार्य भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
संचालकों ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी के अधिकारी फोन तक रिसीव नहीं कर रहे हैं, जिससे उन्हें सप्लाई की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही। इस अनिश्चितता ने पंप संचालकों और उपभोक्ताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
कीमतों की बात करें तो नायरा पेट्रोलियम के पंपों पर अब पेट्रोल 100.06 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.64 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इससे पहले पेट्रोल 95.06 और डीजल 87.64 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था। यानी एक झटके में आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ बढ़ गया है। कई जगहों पर टैक्स के कारण यह बढ़ोतरी 5.30 रुपये प्रति लीटर तक भी देखी जा रही है।
इस पूरे संकट की जड़ में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात माने जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। बताया जा रहा है कि 28 फरवरी के बाद से तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। एक समय तो कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, हालांकि बाद में थोड़ी गिरावट आई और यह करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गईं।
भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, उस पर इसका सीधा असर पड़ना स्वाभाविक है। खासकर जब तेल का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है और वहां हालात तनावपूर्ण हों, तो सप्लाई पर अनिश्चितता और बढ़ जाती है।
वहीं दूसरी ओर, निजी कंपनियों पर लागत का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था क्योंकि भारत में लंबे समय से पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई थीं। इसी दबाव के चलते नायरा एनर्जी को दाम बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा। हालांकि जियो-बीपी जैसी अन्य निजी कंपनियों ने अभी तक कीमतों में बदलाव नहीं किया है, जबकि उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकारी कंपनियां—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—अभी भी कीमतों को नियंत्रित रखे हुए हैं, जो बाजार के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से पर काबिज हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार भी सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया के हालात और उनके भारत पर प्रभाव को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करेंगे। इस बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस चर्चा के बाद सप्लाई और कीमतों को लेकर कुछ ठोस फैसले सामने आ सकते हैं।
फिलहाल हालात यह संकेत दे रहे हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बना रहा, तो आने वाले दिनों में महंगाई और ईंधन संकट दोनों गहराने की संभावना है। आम लोगों में डर और असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि कहीं यह संकट और न बढ़ जाए।
Akhil Mahajan