वीजा मिला, तैयारी पूरी हुई, फिर भी पाकिस्तान नहीं जा सके हरियाणा के 94 श्रद्धालु

हरियाणा के 94 सिख श्रद्धालु वीजा मिलने के बावजूद पाकिस्तान नहीं जा सके। गृह मंत्रालय की अंतिम मंजूरी न मिलने से जत्था वाघा बॉर्डर से वापस लौट आया।

वीजा मिला, तैयारी पूरी हुई, फिर भी पाकिस्तान नहीं जा सके हरियाणा के 94 श्रद्धालु

वीजा मिलने के बावजूद पाकिस्तान नहीं जा सके हरियाणा के 94 सिख श्रद्धालु

गृह मंत्रालय की अंतिम मंजूरी न मिलने से वाघा बॉर्डर से लौटना पड़ा

श्रद्धालुओं ने HSGMC की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, जताई नाराजगी

गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी गुरुपर्व पर पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करने निकले हरियाणा के सिख श्रद्धालुओं की धार्मिक यात्रा अधूरी रह गई। वीजा और अन्य सभी जरूरी दस्तावेज होने के बावजूद भारत सरकार से अंतिम अनुमति नहीं मिलने के कारण 94 श्रद्धालुओं का जत्था वाघा बॉर्डर से ही वापस लौट आया।

मंत्रालय से इजाजत नहीं मिलने पर निराश श्रद्धालु।

जानकारी के अनुसार, हरियाणा के विभिन्न जिलों से 94 सिख श्रद्धालुओं का जत्था 9 जून को कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक गुरुद्वारा छठी पातशाही से पाकिस्तान यात्रा के लिए रवाना हुआ था। श्रद्धालुओं को गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी समागम में शामिल होने के साथ-साथ करतारपुर साहिब, डेरा साहिब और पंजा साहिब सहित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करने थे।

श्रद्धालु बुधवार को अमृतसर स्थित डेरा संत गुरुदेव सिंह कुल्ली वाले में रुके और सीमा पार करने की अनुमति का इंतजार करते रहे। सुबह से शाम तक गृह मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार किया गया, लेकिन अनुमति नहीं मिल सकी। इसके बाद श्रद्धालुओं को निराश होकर वापस लौटना पड़ा।

इस दौरान दिल्ली और पंजाब से पहुंचे अन्य श्रद्धालुओं को पाकिस्तान जाने की अनुमति मिल गई, जबकि हरियाणा का जत्था सीमा पार नहीं कर सका। इससे श्रद्धालुओं में गहरी निराशा देखने को मिली।

सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान यात्रा संबंधी नोटिफिकेशन 1 जून को हरियाणा के सभी उपायुक्तों (DC) को भेजा गया था। इसके बाद श्रद्धालुओं ने अपने पासपोर्ट, आवश्यक दस्तावेज और निर्धारित शुल्क हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के कार्यालय में जमा करवाए थे।

गुरुद्वारा साहिब में दर्शनों के लिए नहीं जा सकने पर निराश श्रद्धालु।

यात्रा एवं आईटी इंचार्ज हरकीरत सिंह ने 2 जून को सभी यात्रियों का विवरण संबंधित जिलों के DC को ईमेल के माध्यम से भेजा था। साथ ही पासपोर्ट नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान एम्बेसी में जमा करवाए गए थे।

बताया जा रहा है कि 6 जून तक पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी हरकीरत सिंह के पास थी, लेकिन उसी दिन उनका तबादला सिरसा स्थित गुरुद्वारा 10वीं पातशाही में कर दिया गया। इसके बाद यात्रा से संबंधित जिम्मेदारी अन्य अधिकारियों को सौंप दी गई।

सूत्रों का दावा है कि कुछ जिलों के DC कार्यालयों की ओर से यात्रियों के संबंध में जरूरी सिफारिशें हरियाणा गृह विभाग तक नहीं पहुंच पाईं। इसके कारण गृह विभाग से अंतिम स्वीकृति जारी नहीं हो सकी। इसके बावजूद 94 श्रद्धालुओं का जत्था पाकिस्तान यात्रा के लिए रवाना कर दिया गया।

जब दस्तावेजी प्रक्रिया में कमी की जानकारी मिली, तब तक श्रद्धालु वाघा बॉर्डर पहुंच चुके थे। इसके बाद कमेटी के पदाधिकारी और अधिकारी पूरे दिन चंडीगढ़ में गृह विभाग से अनुमति लेने के प्रयास करते रहे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

इस घटनाक्रम के बाद श्रद्धालुओं ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि समय रहते सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जातीं तो उन्हें इतनी बड़ी निराशा का सामना नहीं करना पड़ता। कई श्रद्धालु महीनों से इस धार्मिक यात्रा की तैयारी कर रहे थे।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर कमेटी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं श्रद्धालुओं में इस घटना को लेकर नाराजगी और मायूसी बनी हुई है।