हिमाचल के अभयारण्यों में घूमना हुआ महंगा, सरकार ने लागू किए नए शुल्क

हिमाचल प्रदेश सरकार ने वन्यजीव अभयारण्यों में प्रवेश, फोटोग्राफी, ड्रोन और शोध गतिविधियों के लिए नई शुल्क दरें लागू कर दी हैं। कई शुल्कों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है।

हिमाचल के अभयारण्यों में घूमना हुआ महंगा, सरकार ने लागू किए नए शुल्क

हिमाचल सरकार ने अभयारण्यों में प्रवेश और गतिविधियों के लिए नई शुल्क दरें लागू कीं

भारतीय पर्यटकों को अब 300 रुपये प्रतिदिन और विदेशियों को 600 रुपये प्रतिदिन शुल्क देना होगा

ड्रोन, फोटोग्राफी, शोध और व्यावसायिक गतिविधियों के शुल्क में भी बड़ी बढ़ोतरी

हिमाचल प्रदेश सरकार ने वन्यजीव संरक्षण और अभयारण्यों के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से नियमों में बड़ा बदलाव किया है। राज्य सरकार ने वन्य जीव संरक्षण हिमाचल प्रदेश संशोधन नियम-2026 अधिसूचित कर दिए हैं, जो राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही प्रभावी हो गए हैं। नए नियमों के तहत अभयारण्य क्षेत्रों में प्रवेश, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, शोध और अन्य गतिविधियों के लिए नई शुल्क दरें लागू की गई हैं।

इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) केके पंत की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। संशोधित नियमों के अनुसार अब किसी भी वन्यजीव अभयारण्य में प्रवेश करने वाले भारतीय नागरिकों को पहले तीन दिनों तक 300 रुपये प्रतिदिन शुल्क देना होगा। यदि कोई पर्यटक तीन दिन से अधिक समय तक अभयारण्य में रहता है तो प्रत्येक अतिरिक्त दिन के लिए 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

विदेशी नागरिकों के लिए शुल्क और अधिक रखा गया है। उन्हें पहले तीन दिनों तक 600 रुपये प्रतिदिन तथा इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त दिन के लिए 1000 रुपये का भुगतान करना होगा। पर्यटन के साथ-साथ अभयारण्य क्षेत्रों में संचालित वैध व्यावसायिक गतिविधियों पर भी यही शुल्क लागू रहेगा।

सरकार ने बच्चों और विद्यार्थियों को राहत भी दी है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों से कोई प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाएगा। वहीं स्कूली विद्यार्थियों को निर्धारित शुल्क का केवल आधा भुगतान करना होगा, जिससे शैक्षणिक भ्रमण और प्रकृति अध्ययन कार्यक्रमों को बढ़ावा मिल सके।

वाहनों के प्रवेश शुल्क में भी बदलाव किया गया है। अब अभयारण्य क्षेत्र में प्रवेश करने वाले हल्के वाहनों पर 1000 रुपये प्रतिदिन तथा भारी वाहनों पर 2000 रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में अनावश्यक वाहन आवाजाही को नियंत्रित किया जा सकेगा।

फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए भी नई शुल्क संरचना लागू की गई है। सामान्य मोबाइल कैमरे से फोटो लेने के लिए कोई अलग शुल्क नहीं होगा और यह प्रवेश शुल्क में ही शामिल रहेगा। हालांकि पेशेवर स्टिल कैमरा इस्तेमाल करने वाले भारतीय नागरिकों को पहले तीन दिनों के लिए 625 रुपये तथा प्रत्येक अतिरिक्त दिन के लिए 125 रुपये शुल्क देना होगा।

विदेशी नागरिकों के लिए पेशेवर कैमरे का शुल्क दोगुना निर्धारित किया गया है। उन्हें पहले तीन दिनों के लिए 1250 रुपये और प्रत्येक अतिरिक्त दिन के लिए 250 रुपये का भुगतान करना होगा।

सिने कैमरा के जरिए शूटिंग करने वालों के लिए शुल्क में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। भारतीय नागरिकों और संस्थाओं को पहले तीन दिनों के लिए 12,500 रुपये तथा अतिरिक्त दिन के लिए 18,500 रुपये शुल्क देना होगा। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था वन्यजीव क्षेत्रों में व्यावसायिक शूटिंग और फिल्म निर्माण गतिविधियों को विनियमित करने के लिए लागू की गई है।

अभयारण्य क्षेत्रों में ड्रोन कैमरा संचालन के लिए मुख्य वन्यजीव वार्डन की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। निजी एजेंसियों, मीडिया संस्थानों और अन्य संगठनों को पहले तीन दिनों के लिए 50,000 रुपये तथा अतिरिक्त दिन के लिए 75,000 रुपये शुल्क देना होगा।

वैज्ञानिक अनुसंधान और वन्यजीव अध्ययन के लिए भी नई दरें तय की गई हैं। भारतीय शोधकर्ताओं को 100 रुपये प्रतिदिन और विदेशी शोधकर्ताओं को 500 रुपये प्रतिदिन शुल्क देना होगा। वार्षिक लाइसेंस शुल्क भी विभिन्न श्रेणियों के अनुसार तय किया गया है, जो भारतीय छात्रों के लिए 500 रुपये से शुरू होकर फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए 75,000 रुपये तक रहेगा।

इसके अलावा शोध या अन्य कार्यों के लिए वन विभाग से उपकरण किराये पर लेने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। इसके लिए 200 रुपये से लेकर 1250 रुपये प्रतिदिन तक शुल्क निर्धारित किया गया है।

सरकार का मानना है कि नई शुल्क व्यवस्था से वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों को आर्थिक मजबूती मिलेगी। इससे अभयारण्यों के प्रबंधन, संरक्षण कार्यों और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। हालांकि पर्यटन और फोटोग्राफी से जुड़े लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि बढ़ी हुई शुल्क दरों का पर्यटकों की संख्या पर क्या असर पड़ता है।