मनीषा मौत मामला: CBI क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ पिता ने कोर्ट में दर्ज की याचिका

भिवानी की शिक्षिका मनीषा मौत मामले में पिता ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर सवाल उठाए, फोरेंसिक और जांच संबंधी खामियां गिनाकर दोबारा जांच की मांग की।

मनीषा मौत मामला: CBI क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ पिता ने कोर्ट में दर्ज की याचिका

➤ पिता संजय ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए

➤ याचिका में फोरेंसिक रिपोर्ट, CCTV और सबूतों की कस्टडी पर उठे सवाल

➤ 14 अक्टूबर को CBI की विशेष अदालत में याचिका पर अगली सुनवाई


भिवानी के गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी शिक्षिका मनीषा की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद उनके पिता संजय कुमार ने कोर्ट में विरोध याचिका दायर की है। याचिका में CBI की जांच और क्लोजर रिपोर्ट पर कई सवाल उठाते हुए इसे खारिज करने तथा मामले की दोबारा गहन जांच कराने की मांग की गई है। CBI ने अपनी जांच में मनीषा की मौत को आत्महत्या माना था, जबकि उनके पिता संजय कुमार लगातार इसे हत्या बता रहे हैं। विरोध याचिका में जांच के दौरान कथित तौर पर हुई चूकों, फोरेंसिक नतीजों, CCTV फुटेज, सबूतों की कस्टडी और घटनाक्रम की टाइमलाइन से जुड़े कई बिंदुओं को उठाया गया है। अब इस याचिका पर 14 अक्टूबर को केंद्रीय जांच ब्यूरो की विशेष अदालत में अगली सुनवाई होगी।

संजय कुमार ने क्लोजर रिपोर्ट पर जताई आपत्ति

संजय कुमार ने CBI की ओर से दाखिल फाइनल रिपोर्ट यानी क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ विरोध याचिका प्रस्तुत की है। इसमें उन्होंने क्लोजर रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज करने और CBI को मामले की दोबारा गहन जांच के निर्देश देने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जांच के दौरान गंभीर और जानबूझकर चूकें की गईं तथा विरोधाभासी फोरेंसिक नतीजों, सबूतों की कस्टडी की कथित कमियों और एकतरफा जांच के कारण मामले को आत्महत्या के रूप में पेश किया गया।

याचिका के मुताबिक, CBI ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद भी कथित तौर पर पक्षपाती, सतही और दोषपूर्ण तरीके से जांच की। संजय कुमार का आरोप है कि जांच को इस तरह आगे बढ़ाया गया कि आइडियल इंटरनेशनल स्कूल एंड नर्सिंग कॉलेज से जुड़े संस्थागत हितों और कर्मचारियों तथा प्रबंधन को बचाया जा सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि खराब हो चुके जैविक नमूनों की टॉक्सिकोलॉजिकल रीडिंग पर भरोसा किया गया, जबकि फील्ड मैपिंग, घसीटने के निशान और देश के प्रमुख मेडिकल संस्थान के निष्कर्षों को कथित तौर पर नजरअंदाज किया गया।

संजय कुमार ने CBI के उस निष्कर्ष पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें कहा गया था कि मनीषा ने अपनी इच्छा से मोनोक्रोटोफॉस कीटनाशक खाकर आत्महत्या की। याचिका में इस निष्कर्ष को गलत और मेडिकल तथा कानूनी दृष्टि से टिकाऊ नहीं बताया गया है। साथ ही दावा किया गया है कि कुछ प्रत्यक्षदर्शी और कानूनी गवाहों के बयान भी क्लोजर रिपोर्ट में उचित तरीके से शामिल नहीं किए गए।

11 अगस्त को मनीषा के आइडियल परिसर की ओर जाने का दावा

याचिका में कहा गया है कि मनीषा को आखिरी बार 11 अगस्त 2025 को दोपहर करीब 2 बजे किड्स केयर प्ले स्कूल से निकलने के बाद आइडियल इंटरनेशनल स्कूल और नर्सिंग कॉलेज परिसर की ओर जाते हुए देखा गया था। इसके समर्थन में याचिका में कई लोगों के बयान का उल्लेख किया गया है।

किड्स केयर प्ले स्कूल की टीचर मोनिका देवी के बयान के मुताबिक, स्कूल से निकलने से पहले मनीषा और कविता स्कूल से निकल चुकी थीं। जब कविता ने मनीषा से पूछा कि क्या वह ढाणी लक्ष्मण जाएगी, तो मनीषा ने कहा था कि उसे आइडियल नर्सिंग स्कूल में कुछ काम है और वह कुछ देर बाद जाएगी।

टीचर कविता ने बताया कि उन्होंने मनीषा को करीब 2 बजे स्कूल से निकलते हुए देखा था। कविता के अनुसार, उन्होंने मनीषा से कहा था कि वह भी ढाणी लक्ष्मण जाएंगी और रोडवेज बस से जाएंगी। इसके जवाब में मनीषा ने कहा था कि उसे IDEAL कॉलेज में कुछ जरूरी काम है और वह वहां से चली गई।

किड्स केयर प्ले स्कूल के मालिक लाल कपूर उर्फ रोहित दहिया ने बताया कि पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक दुकान पर लगे कैमरे की फुटेज देखी थी। उनके मुताबिक, फुटेज में मनीषा को दोपहर करीब 2:05 बजे आइडियल इंटरनेशनल स्कूल की ओर जाते हुए देखा गया।

बस ड्राइवर विजय कुमार ने अपने बयान में कहा कि 11 अगस्त 2025 को दोपहर करीब 1:30 बजे उन्हें मनीषा का फोन आया था। मनीषा ने उन्हें बताया था कि वह उस दिन बस से घर नहीं जा रही थी।

मनीषा के पिता संजय कुमार के अनुसार, उन्होंने 11 अगस्त 2025 को सुबह सवा 11 बजे मनीषा से बात की थी और उसे आइडियल मेडिकल कॉलेज, सिंघानी में प्रतिभावान सीटों के बारे में पता लगाने के लिए कहा था।

कैंपस की तलाशी को लेकर भी सवाल

संजय कुमार ने याचिका में आरोप लगाया है कि मनीषा के गायब होने की तारीख 11 अगस्त 2025 से लेकर शव मिलने की तारीख 13 अगस्त 2025 तक आइडियल कैंपस की पर्याप्त तलाशी नहीं ली गई। उनका कहना है कि इससे संदिग्धों को सबूतों से छेड़छाड़ करने का अवसर मिल सकता था।

संजय कुमार के मुताबिक, उन्होंने ASI शकुंतला से आइडियल इंटरनेशनल स्कूल और आइडियल स्कूल एवं कॉलेज कैंपस की सभी इमारतों की तलाशी लेने का अनुरोध किया था, लेकिन उनके अनुसार पुलिस कर्मियों ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस और प्रशासन ने उन्हें आइडियल स्कूल तथा कॉलेज कैंपस में प्रवेश नहीं करने दिया।

ASI शकुंतला के बयान का भी याचिका में उल्लेख किया गया है। उनके अनुसार, आइडियल इंटरनेशनल स्कूल पहुंचने पर स्कूल में तीन कर्मचारी मिले। उनसे पूछा गया कि क्या मनीषा नाम की लड़की आइडियल कॉलेज या स्कूल आई थी, जिस पर उन्होंने इनकार किया। इसके बाद CCTV फुटेज दिखाने के लिए कहा गया, लेकिन कर्मचारियों ने बताया कि उस समय CCTV फुटेज खोलकर दिखाने वाला कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। इसके बजाय राकेश ने उन्हें अगले दिन आने के लिए कहा था।

साइबर सेल इंचार्ज ASI संजीत के बयान के अनुसार, उस समय भीड़ प्रशासन के खिलाफ विरोध कर रही थी और आइडियल नर्सिंग कॉलेज परिसर के निरीक्षण की मांग कर रही थी। वह संस्थान में गए और आइडियल ITI से DVR लिया। याचिका में कहा गया है कि यह DVR आइडियल ITI के निदेशक और मालिक अशोक कुमार सांगवान से बिना किसी मेमोरेंडम के लिया गया था।

CCTV टाइमिंग और कैमरों को लेकर याचिका में सवाल

याचिका में खरकड़ी फीड और पैरामिलिट्री कैंटीन की CCTV टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संजय कुमार का दावा है कि खरकड़ी फीड का समय 14 मिनट आगे और पैरामिलिट्री कैंटीन का समय ढाई घंटे पीछे था। याचिका में आरोप है कि CBI ने इन कैमरों की टाइमिंग को कैलिब्रेट किए बिना उसका इस्तेमाल किया और ऐसी टाइमलाइन तैयार की, जिसे तकनीकी रूप से भरोसेमंद नहीं माना जा सकता।

याचिका के मुताबिक, शिक्षकों के बयानों में मनीषा के आइडियल नर्सिंग कॉलेज जाने की बात सामने आई, लेकिन कॉलेज के मुख्य गेट पर उनकी एंट्री दिखाई नहीं दी। संजय कुमार ने सवाल उठाया है कि परिसर में 20 CCTV कैमरे लगे होने के बावजूद उनकी फुटेज क्यों नहीं ली गई और उनकी जांच क्यों नहीं की गई।

याचिका में यह भी कहा गया है कि जब संजय कुमार आइडियल स्कूल पहुंचे तो CCTV कैमरा खोलने या जांचने के लिए कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। उनके मुताबिक, उन्होंने आइडियल नर्सिंग कॉलेज के सामने एक काली स्कॉर्पियो खड़ी देखी थी। चपरासी से गाड़ी में बैठे लोगों के बारे में पूछने पर बताया गया कि वे दोनों नर्सिंग कॉलेज के स्टाफ थे। इसके बाद गाड़ी सिंघानी की ओर चली गई। संजय कुमार का आरोप है कि पुलिस और CBI ने इन लोगों की पहचान करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए।

फोरेंसिक जांच के निष्कर्षों पर भी आपत्ति

विरोध याचिका में सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL), नई दिल्ली की क्राइम सीन जांच रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। याचिका के अनुसार, एक्सपर्ट टीम ने मृतका के पैरों के समानांतर घसीटने के निशान दर्ज किए थे और इससे यह संकेत मिलने का दावा किया गया कि शव को उस स्थान तक ले जाया गया, जहां से उसे बरामद किया गया।

याचिका में शव की स्थिति को लेकर भी कई दावे किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि सिर धड़ से लगभग पूरी तरह अलग हो गया था और चेहरे के नरम ऊतक पूरी तरह हट गए थे। संजय कुमार की ओर से इसे शव की पहचान को प्रभावित करने की कोशिश बताया गया है और इसे आत्महत्या की थ्योरी के विपरीत बताया गया है।

17 फरवरी के CBI प्रोडक्शन-कम-रिसीट मेमो में दर्ज जानकारी का भी याचिका में उल्लेख किया गया है। इसके मुताबिक, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 की धारा 63(4)(c) के तहत डॉ. गोपाल शर्मा के कानूनी डिवाइस लॉग से तीन हाई-रिजॉल्यूशन रंगीन तस्वीरें औपचारिक रूप से निकाली गई थीं। याचिका में इन तस्वीरों के आधार पर गर्दन के हिस्से में ऊतकों में गहरे, साफ-किनारे वाले क्षैतिज घाव का उल्लेख किया गया है। संजय कुमार की ओर से इसे तेज धार वाले हथियार से हमले के अनुरूप बताया गया है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि तस्वीरों में कपड़े पहने हुए धड़ से सटे पूरी तरह नंगे और रासायनिक रूप से प्रभावित खोपड़ी परिसर को देखा गया। संजय कुमार ने इसे चेहरे की पहचान प्रभावित करने की कोशिश बताया है। ये सभी दावे याचिका में CBI की आत्महत्या संबंधी थ्योरी के खिलाफ उठाए गए हैं।

लोहारू के DSP संजीव के बयान का भी याचिका में उल्लेख है। उनके मुताबिक, लाश की गर्दन गायब थी और खोपड़ी तथा चेहरे का ढांचा दिखाई दे रहा था। जिस स्थान पर शव मिला था, वहां टायर के कुछ निशान होने की बात भी कही गई है। संजय कुमार का आरोप है कि पुलिस और CBI ने इन तथ्यों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

शव मिलने की जगह और 48 घंटे की अवधि पर सवाल

याचिका में कहा गया है कि जिस स्थान पर शव मिला, वहां से होकर जाने वाला नहर किनारे का रास्ता हिसार-भिवानी रोड को जोड़ता है और यह एक मुख्य रास्ता है। संजय कुमार ने सवाल उठाया है कि यदि उसी स्थान पर आत्महत्या या मौत हुई होती, तो किसी व्यक्ति की नजर शव पर पड़ने की संभावना थी।

याचिका में यह भी कहा गया है कि रिकॉर्ड के अनुसार मौत शव मिलने से करीब 48 घंटे पहले हुई बताई गई थी। संजय कुमार का कहना है कि वह भी 12 अगस्त को एक रिश्तेदार के साथ मनीषा की तलाश करते हुए उस रास्ते से गुजरे थे।

जैविक नमूनों और कस्टडी की चेन पर आपत्ति

याचिका में CFSL बायोलॉजिकल जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रदर्श 8.2 से 1 से 6 तक के नमूनों, जिनमें डीग्लोव्ड हाथ की त्वचा, पेरिअनल, गुदा, पेरिवाजाइनल और योनि स्वैब शामिल थे, में विश्लेषण के लिए प्रवर्धित DNA नहीं मिला।

संजय कुमार की ओर से याचिका में इसका संबंध कथित रासायनिक धुलाई और फोरेंसिक निशानों के नष्ट होने से जोड़ा गया है। यह भी आरोप लगाया गया है कि फोरेंसिक साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास किया गया हो सकता है।

13 अगस्त 2025 को भिवानी नागरिक अस्पताल में मुख्य पोस्टमार्टम किए जाने की बात याचिका में दर्ज है। इसके मुताबिक, उसी दिन इकट्ठा किए गए जरूरी विसरल सैंपल और वेजाइनल स्वैब स्थानीय पुलिस की कस्टडी में रहे और उन्हें आधिकारिक रूप से 16 अगस्त 2025 को सुनारिया लैब में दर्ज किया गया। संजय कुमार ने इस 48 घंटे के अंतराल को सबूतों की कस्टडी की चेन में बड़ी कमी बताया है।

फोरेंसिक जांच में मनीषा के निचले कपड़े यानी सलवार को सामने से फटा हुआ बताए जाने का भी याचिका में उल्लेख है। संजय कुमार का कहना है कि यह तथ्य आत्महत्या की कहानी से मेल नहीं खाता।

शव को जल्द निपटाने के अनुरोध पर सवाल

याचिका में डॉ. गोपाल शर्मा के उस अनुरोध का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने पुलिस अधीक्षक से शव को तुरंत निपटाने का अनुरोध किया था। डॉ. शर्मा के हवाले से कहा गया कि शव कंकाल में बदलने की स्थिति में आ रहा था और इसलिए जांच अधिकारी से शव को पूरी तरह सड़ने से पहले निपटाने का अनुरोध किया गया।

संजय कुमार का आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण बाद में हाई कोर्ट के आदेश से बनी समितियों के लिए मैपिंग के उद्देश्य से ताजा और बिना खराब हुए टिश्यू जुटाने का अवसर समाप्त हो गया।

मोनोक्रोटोफॉस की खरीद के रिकॉर्ड पर भी सवाल

CBI की जांच में जिस रिकॉर्ड का मुख्य आधार होने की बात याचिका में कही गई है, वह दुकानदार देवेंद्र के ग्राहक रजिस्टर से संबंधित जब्ती मेमो है। याचिका के अनुसार, इस रजिस्टर में दावा किया गया कि 11 अगस्त 2025 को पीड़िता को 600 रुपये में 1 लीटर ‘मोनो’ कीटनाशक बेचा गया था।

संजय कुमार ने रजिस्टर की संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इसमें कुल 320 पेज हैं। उनके अनुसार, वास्तविक ग्राहकों की एंट्री पेज 129 पर अचानक समाप्त हो जाती है और पेज 130 से पेज 314 तक रजिस्टर खाली है। बाद में कुछ बिखरी हुई रफ एंट्री दिखाई देती हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि करीब 200 लगातार खाली पेजों वाले रजिस्टर में पेज 128 पर लाइन आइटम 3 के तहत एक अकेली लाइन की एंट्री बाद में डाली गई प्रतीत होती है। संजय कुमार ने इसे प्रशासनिक हेरफेर और खरीद का रिकॉर्ड तैयार करने से जोड़ा है।

सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग रिपोर्ट पर भी सवाल

याचिका में RFSL रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि शव के पास मिला सुसाइड नोट मनीषा की लिखावट से मेल खाता है। हालांकि, संजय कुमार ने रिपोर्ट तैयार होने की टाइमलाइन पर सवाल उठाया है।

याचिका के अनुसार, सबूत 17 अगस्त 2025 को भेजे गए थे और उसी दिन संबंधित डिवीजन में प्राप्त हुए। फाइनल मैचिंग रिपोर्ट पर 18 अगस्त 2025 को हस्ताक्षर किए गए। संजय कुमार ने इस प्रक्रिया को बेहद तेजी से पूरा किया जाना बताया है और हैंडराइटिंग की माइक्रोस्कोपिक लाइन-क्वालिटी की जांच इतने कम समय में पूरी होने पर सवाल उठाया है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि CBI ने RFSL की रिपोर्ट तैयार करने की गति और रिपोर्ट जमा करने की प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से जांच नहीं की। संजय कुमार का दावा है कि रिपोर्ट के आधार पर आत्महत्या के पक्ष में निष्कर्ष को जल्दी स्थापित किया गया।

टूटे मोबाइल फोन और कॉल लोकेशन का मुद्दा

याचिका में मनीषा के काले मोबाइल फोन का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस ने फोन का टूटा हुआ पिछला हिस्सा सिंघानी नहर की तली से बरामद किया था, जहां 5-6 इंच पानी था।

संजय कुमार ने याचिका में सवाल उठाया है कि मनीषा अपने फोन को आधा तोड़कर नहर में क्यों फेंकतीं। उन्होंने इसे इलेक्ट्रॉनिक डेटा को जानबूझकर नष्ट किए जाने की आशंका से जोड़ा है।

याचिका के अनुसार, 12 अगस्त 2025 को रात 12:05 बजे की गई कॉल पर मनीषा का फोन बज रहा था, लेकिन उसके समय फोन की लोकेशन की जांच नहीं की गई। संजय कुमार ने इस बिंदु को भी जांच की कमियों में शामिल किया है।

पिता ने दोबारा गहन जांच की मांग की

संजय कुमार ने विरोध याचिका में आरोप लगाया है कि पहले पुलिस और बाद में CBI ने मामले की सतही जांच की। उन्होंने कहा है कि जांच एजेंसियों ने AIIMS नई दिल्ली की पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड के निष्कर्षों, फील्ड मैपिंग, फोटोग्राफिक साक्ष्यों और विशेषज्ञ रिकॉर्ड को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

याचिका में दावा किया गया है कि इन तथ्यों की अनदेखी से जांच प्रभावित हुई और प्रभावशाली स्थानीय अपराधियों को बचाने का रास्ता बना। हालांकि, ये सभी आरोप संजय कुमार की ओर से दायर विरोध याचिका में किए गए हैं और इन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।

संजय कुमार ने अदालत से मांग की है कि CBI की क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार किया जाए और CBI की विशेष टीम को मामले की दोबारा गहन जांच के निर्देश दिए जाएं। अब इस विरोध याचिका पर 14 अक्टूबर को CBI की विशेष अदालत में सुनवाई होगी।