पहलगाम हमले को एक साल, शहीद विनय नरवाल को याद कर भावुक हुआ करनाल

पहलगाम आतंकी हमले को एक साल पूरा हुआ, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। करनाल के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की शहादत को याद करते हुए परिवार ने श्रद्धांजलि और रक्तदान शिविर का आयोजन किया।

पहलगाम हमले को एक साल, शहीद विनय नरवाल को याद कर भावुक हुआ करनाल

पहलगाम आतंकी हमले को एक साल, 26 लोगों की गई थी जान
करनाल के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की शहादत को किया जा रहा याद
परिवार आज भी दर्द में, लेकिन बेटे की शहादत पर गर्व कायम


22 अप्रैल 2025 को हुए Pahalgam terror attack 2025 को आज एक साल पूरा हो गया है। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। इनमें हरियाणा के करनाल सेक्टर-6 निवासी लेफ्टिनेंट Vinay Narwal भी शामिल थे, जिनकी शहादत आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।

शादी के महज 5-6 दिन बाद विनय नरवाल अपनी पत्नी के साथ घूमने के लिए जम्मू-कश्मीर गए थे। पहले उनका प्लान विदेश जाने का था, लेकिन वीजा न मिलने के कारण उन्होंने पहलगाम जाने का फैसला किया। यह उनकी जिंदगी की पहली ट्रिप थी, जो उनकी आखिरी यात्रा बन गई।

22 अप्रैल 2025 को दोपहर के समय बैसरन घाटी में आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला कर दिया। हमलावरों ने सुनियोजित तरीके से लोगों को घेरकर गोलीबारी की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई लोगों से पहचान पूछकर उन्हें निशाना बनाया गया। इस हमले में कई लोग घायल भी हुए।

हमले के वक्त विनय अपनी पत्नी के साथ मौजूद थे। उन्हें बेहद करीब से गोली मारी गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया।

लेफ्टिनेंट विनय नरवाल को श्रद्धांजलि देते हुए।

एक साल बाद भी परिवार इस दर्द से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। विनय के पिता राजेश नरवाल कहते हैं कि 22 अप्रैल का दिन उनके जीवन का सबसे दुखद दिन है। वह आज भी उस घटना को भूल नहीं पाए हैं, लेकिन परिवार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

विनय की याद में उनके स्कूल संत कबीर स्कूल, करनाल में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई है। वहीं परिवार ने 1 मई, जो विनय का जन्मदिन है, उस दिन रक्तदान शिविर लगाने का निर्णय लिया है, ताकि उनकी याद को समाज सेवा से जोड़ा जा सके।

परिवार को इस कठिन समय में धार्मिक आस्था से भी सहारा मिला है। पिता का कहना है कि श्रीमद्भागवत गीता के पाठ से उन्हें मानसिक मजबूती मिलती है। दुख कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन इसे सहने की शक्ति जरूर मिली है।

विनय को मुखाग्नि देते पिता व विनय की बहन।

राजेश नरवाल ने सरकार द्वारा आतंकियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर गर्व जताया और कहा कि ऐसे कायराना हमलों का जवाब सख्ती से दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि उनके बेटे के नाम पर किसी मेडिकल कॉलेज या यूनिवर्सिटी का नाम रखा जाए, ताकि उसकी सेवा भावना हमेशा जीवित रहे।

उन्होंने देशवासियों से अपील की कि अगर कहीं भी कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दें। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।

करनाल में शहीदों की याद में एक स्मारक पट भी बनाया गया है, जिसमें विनय नरवाल समेत जिले के अन्य वीर सपूतों के नाम दर्ज हैं। यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को उनके बलिदान की याद दिलाता रहेगा।

एक साल बीत जाने के बाद भी यह घटना सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे देश का दर्द बनी हुई है। विनय नरवाल की शहादत आज भी लोगों को देशभक्ति और एकता का संदेश देती है।