ASI संदीप की मौत का मामला: परिजनों ने पुलिस प्रशासन को शव देने से किया मना, जांच के बाद अपने साथ ले गए परिजन शव

रोहतक साइबर सेल में तैनात ASI संदीप ने समाज और पुलिस सेवा में योगदान दिया। परिवार ने शव लेने से मना कर न्यायिक जांच की मांग की है।

ASI संदीप की मौत का मामला:  परिजनों ने पुलिस प्रशासन को शव देने से किया मना, जांच के बाद अपने साथ ले गए परिजन शव

परिजन शव लेने से मना, न्यायिक जांच की मांग
एएसआई संदीप ने समाज और पुलिस सेवा में योगदान किया
भ्रष्टाचार और सिस्टम की खामियों को उजागर किया


रोहतक साइबर सेल में कार्यरत एएसआई संदीप की आत्महत्या के मामले में नया मोड़ आया है। परिजनों ने पुलिस प्रशासन को शव देने से मना कर दिया और उन्होंने फैसला किया कि जांच पूरी होने के बाद ही शव को अंतिम संस्कार किया जाएगा। परिवार की यह मांग पूरे मामले में न्यायिक जांच कराने की है, ताकि संदीप की मौत के पीछे के कारणों का स्पष्ट पता चल सके।वहीं संदीप की आत्महत्या के बाद उनके भाई शीशपाल ने कहा कि अंतिम संस्कार तभी होगा जब एडीजीपी वाई पूरन और अन्य आरोपियों पर कार्रवाई होगी। परिवार ने न्यायिक जांच की मांग की है।

संदीप मूल रूप से जींद जिले के रहने वाले थे। उनका परिवार सेवा और त्याग की परंपरा से जुड़ा रहा है। पिता दयानंद पुलिस इंस्पेक्टर थे, जबकि दादा भरत सिंह भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके थे। परिवार और सहयोगियों के अनुसार, संदीप ने पुलिस की नौकरी अपने दादा से प्रेरित होकर चुनी थी और हमेशा समाज के लिए काम करने में विश्वास रखते थे।

संदीप न केवल पुलिस विभाग में बल्कि सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय थे। वे जुलाना युवा क्लब के प्रधान रह चुके थे और रक्तदान शिविर, पौधारोपण अभियान सहित अनेक सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। उनके सहयोगी और स्थानीय लोग उन्हें मिलनसार, मददगार और समाजसेवी व्यक्ति के रूप में याद कर रहे हैं।

संदीप ने आत्महत्या करने से पहले वीडियो और सुसाइड नोट में एडीजीपी वाई पूरन कुमार और उनके गनमैन सुशील कुमार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। परिवार ने स्पष्ट किया है कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

इस घटना ने समाज में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक दबाव और सिस्टम की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग न्याय की मांग कर रहे हैं और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी पर ध्यान देने की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं।