दिव्यांग कर्मचारियों को बड़ा झटका, 60 साल सेवा विस्तार नहीं - हाईकोर्ट ने याचिकाएं की खारिज
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➤ हरियाणा में दिव्यांग कर्मचारियों को 60 साल तक सेवा विस्तार नहीं
➤ हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराया, याचिकाएं खारिज
➤ कहा—60 साल तक नौकरी कोई मौलिक अधिकार नहीं
हरियाणा में दिव्यांग कर्मचारियों को 60 वर्ष तक सेवा विस्तार देने की मांग को बड़ा झटका लगा है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस संबंध में दाखिल याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि 60 साल तक सेवा जारी रखना कोई अधिकार नहीं है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि राज्य सरकार द्वारा पहले दी गई सेवा विस्तार की सुविधा को वापस लेने का निर्णय कानूनी रूप से सही है। कोर्ट ने यह भी माना कि किसी कर्मचारी को 60 वर्ष तक सेवा देने का कोई “वेस्टेड राइट” यानी सुनिश्चित अधिकार कानून में नहीं दिया गया है।
इस मामले में कई दिव्यांग कर्मचारियों ने याचिका दाखिल कर मांग की थी कि उन्हें पहले की तरह 58 की बजाय 60 वर्ष तक सेवा करने की अनुमति दी जाए। उनका तर्क था कि यह उनके अधिकारों और समानता के सिद्धांत से जुड़ा मामला है।
हालांकि, अदालत ने यह दलील स्वीकार नहीं की और कहा कि सरकार अपनी नीतियों में बदलाव करने के लिए स्वतंत्र है, जब तक कि वह संविधान या कानून के खिलाफ न हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सेवा विस्तार को “उचित सुविधा” (reasonable accommodation) के रूप में अनिवार्य नहीं माना जा सकता।
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने 2026 में नियमों में बदलाव करते हुए दिव्यांग कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से घटाकर 58 वर्ष कर दी थी।
इस फैसले के बाद कई कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध किया और अदालत का रुख किया था। लेकिन अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल राज्य में दिव्यांग कर्मचारियों को 58 वर्ष की उम्र में ही सेवानिवृत्त होना होगा।
यह निर्णय न केवल कर्मचारियों के लिए अहम है, बल्कि राज्य की सेवा नीतियों और भविष्य की कानूनी लड़ाइयों की दिशा भी तय करेगा।
Akhil Mahajan