तलाक के बाद बेटी को ढोल-नगाड़ों के साथ घर लाए रिटायर्ड जज, बोले- उसका सम्मान सबसे पहले

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तलाक के बाद बेटी को ढोल-नगाड़ों के साथ घर लाए रिटायर्ड जज
समाज की सोच को दी चुनौती, कहा- बेटी का सम्मान सबसे पहले
नई मिसाल बनी पहल, शहरभर में हो रही चर्चा


मेरठ के शास्त्रीनगर निवासी सेवानिवृत्त जिला जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने अपनी बेटी के तलाक के बाद जो किया, वह न केवल अनोखा है बल्कि समाज के लिए एक मजबूत संदेश भी बन गया है। उन्होंने अपनी बेटी प्रणिता वशिष्ठ को कोर्ट से ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ घर लेकर आकर उस सोच को चुनौती दी, जिसमें तलाक को अक्सर शर्म और बोझ की तरह देखा जाता है।

तलाक की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद डॉ. शर्मा ने बेटी की घर वापसी को एक उत्सव का रूप दे दिया। कोर्ट से घर तक ढोल बजे, नाच-गाना हुआ और बेटी को फूल-मालाओं से सम्मानित किया गया। यह दृश्य देखने वालों के लिए हैरान करने वाला भी था और प्रेरणादायक भी।

डॉ. शर्मा ने साफ कहा कि उनकी बेटी का सम्मान किसी भी सामाजिक परंपरा से बड़ा है। उन्होंने कहा कि “बेटी का सम्मान ससुराल में प्रताड़ना सहने में नहीं, बल्कि सिर उठाकर अपने घर लौटने में है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी तरह की एलिमनी या धन-दौलत की मांग नहीं की, बल्कि सिर्फ अपनी बेटी को सम्मान के साथ वापस लाए हैं। उनका कहना था कि बेटी कोई वस्तु नहीं है, जिसे कहीं भी छोड़ दिया जाए।

प्रणिता वशिष्ठ एक शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला हैं। उन्होंने मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और वर्तमान में तेजगढ़ी चौराहे स्थित प्रणव वशिष्ठ ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। वर्ष 2022 में उनके भाई, जो सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता थे, का एक हादसे में निधन हो गया था। उनकी स्मृति में ही इस अकादमी की स्थापना की गई।

डॉ. शर्मा की इस पहल को शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सराहा है। लोगों का कहना है कि नारी सशक्तिकरण केवल भाषणों से नहीं, बल्कि ऐसे साहसिक फैसलों से आता है। यह कदम उन अभिभावकों के लिए भी एक प्रेरणा है, जो समाज के डर से अपनी बेटियों को प्रताड़ना झेलने के लिए मजबूर कर देते हैं।

इस घटना ने यह साबित कर दिया कि बदलते समाज में अब सम्मान और आत्मसम्मान को प्राथमिकता दी जा रही है, और बेटियों के अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।