उत्तर भारत का पहला इलेक्ट्रिक ट्रक स्टेशन सोनीपत में : बैटरी से दौड़ेंगे हैवी ट्रक, 40 टन लोड उठा सकेगा
देश में स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक परिवहन क्रांति की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, उत्तर भारत का पहला कॉमर्शियल इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग एवं चार्जिंग स्टेशन सोनीपत के गन्नौर में स्थापित किया गया है।
➤ उत्तर भारत का पहला इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग और चार्जिंग स्टेशन सोनीपत गन्नौर में शुरू
➤ पहले चरण में 25 इलेक्ट्रिक ट्रक पहुंचे, कुल 75 ट्रकों की योजना
➤ स्टेशन से 40 टन तक का लोड उठाने वाले ट्रक 180 किमी तक चल सकेंगे, पूरी प्रक्रिया सौर और पवन ऊर्जा से संचालित
देश में स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक परिवहन क्रांति की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, उत्तर भारत का पहला कॉमर्शियल इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग एवं चार्जिंग स्टेशन सोनीपत के गन्नौर में स्थापित किया गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को गन्नौर के गांव पांची गुजरान स्थित दिल्ली इंटरनेशनल कार्गो टर्मिनल (DICT) में इस अत्याधुनिक सुविधा का उद्घाटन किया। यह पहल भारी-भरकम ट्रकों को डीजल के बजाय बैटरी से चलाने की नई शुरुआत है।
सूत्रों के अनुसार, DICT गन्नौर में करीब 350 कॉमर्शियल वाहन कार्यरत हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में सामान पहुंचाते हैं। अब धीरे-धीरे इन्हें बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक ट्रकों में बदलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पहले चरण में 25 इलेक्ट्रिक ट्रक टर्मिनल पहुंचे हैं, जबकि कुल 75 ट्रकों को इस सुविधा से जोड़ा जाएगा। यह परियोजना एनर्जी इन मोशन कंपनी और रविंद्रा एनर्जी लिमिटेड के संयुक्त प्रयास से संचालित है।
इस प्रोजेक्ट में Beiqi FOTON Motor, चीन की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी भी शामिल है। FOTON हर साल लाखों ट्रक और बसें बनाती है। वर्ष 2024 में FOTON ने 6 लाख से अधिक व्यवसायिक वाहन बेचे थे। अब यह तकनीक भारत में भी लागू होगी, जिससे देश में ट्रक आधुनिक और पर्यावरण हितैषी बनेंगे।
प्रमुख तथ्य:
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पर्यावरणीय लाभ: देश में ट्रक कुल वाहनों का केवल 4% हैं, लेकिन ये 30% कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। इलेक्ट्रिक ट्रक इस्तेमाल करने से प्रदूषण में भारी कमी आएगी।
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तकनीक और लागत: बैटरी और तकनीक की कीमतें अब इतनी कम हो गई हैं कि इलेक्ट्रिक ट्रक बिना किसी सरकारी सब्सिडी के भी डीजल ट्रकों से सस्ते होंगे।
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बैटरी स्वैपिंग सुविधा: ड्राइवर केवल 5 मिनट में बैटरी बदल सकते हैं, जिससे लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता।
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ऊर्जा स्रोत: चार्जिंग स्टेशन में उपयोग होने वाली बिजली सौर और पवन ऊर्जा से प्राप्त होगी, जो पूरी प्रक्रिया को पर्यावरण के अनुकूल बनाती है।
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भारी लोड और दूरी: ट्रक 40 टन तक का लोड उठा सकते हैं और एक बार चार्ज पर 180 किलोमीटर तक चल सकते हैं।
भविष्य की योजना:
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2030 तक उत्तर भारत में 7,000 इलेक्ट्रिक ट्रक चलाने का लक्ष्य
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लगभग 250 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें 2027 तक 45 और स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, खासकर सीमेंट, स्टील और माइनिंग क्षेत्रों में
विशेषताएं:
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इलेक्ट्रिक ट्रक डीजल वाहनों के समान लोड उठा सकते हैं
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बिजली की लागत कम और एनजीटी टैक्स से मुक्त
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प्रदूषण रहित होने के कारण दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति
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यह पहल भारत में स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में मील का पत्थर साबित होगी
Akhil Mahajan