पानीपत निगम के ट्रांसपोर्ट ऑफिस तोड़ने के फैसले पर रोक, जानें वजह
पानीपत के सुखदेव नगर में ट्रांसपोर्ट कंपनियों और नगर निगम के बीच अवैध निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। अदालत ने निगम की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है।
➤ पानीपत में ट्रांसपोर्ट कंपनियों और नगर निगम के बीच कानूनी टकराव
➤ अवैध निर्माण तोड़ने के निगम आदेश पर अदालत की रोक
➤ 12 से ज्यादा ट्रांसपोर्टरों को कोर्ट से राहत
हरियाणा के पानीपत में स्थित सुखदेव नगर इलाके को लेकर नगर निगम और ट्रांसपोर्ट कंपनियों के बीच कानूनी जंग तेज हो गई है। न्यू इंडिया ट्रांसपोर्ट कंपनी सहित कई ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ नगर निगम द्वारा जारी अवैध निर्माण और रिहायशी क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट संचालन के आदेश अब अदालत की चौखट तक पहुंच चुके हैं। एक ओर नगर निगम ने बिल्डिंग गिराने तक का सख्त फरमान सुना दिया, वहीं दूसरी ओर अदालत ने ट्रांसपोर्टरों को बड़ी राहत देते हुए निगम की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है।
इस मामले में सीनियर एडवोकेट नीरज नरवाल ने बताया कि सिर्फ एक नहीं, बल्कि 12 से ज्यादा ट्रांसपोर्ट कंपनियों के मालिकों ने नगर निगम के आदेशों को चुनौती दी है। इनमें से तीन मामलों की सुनवाई 30 जनवरी को हो चुकी है, जबकि तीन अन्य मामलों की सुनवाई 1 फरवरी को निर्धारित है। कुछ याचिकाओं की सुनवाई 16 फरवरी को प्रस्तावित है, जिनकी जल्द सुनवाई के लिए अदालत में अपील की जाएगी। जिन मामलों में सुनवाई हो चुकी है, वहां अदालत ने नगर निगम के आदेशों पर स्टे दे दिया है।
एडवोकेट नीरज नरवाल का कहना है कि नगर निगम द्वारा ट्रांसपोर्ट मालिकों पर बेबुनियादी और जल्दबाजी में आदेश जारी किए गए हैं, जिन पर न्यायालय लगातार रोक लगा रहा है। अदालत ने अगली संयुक्त सुनवाई की तारीख 20 फरवरी 2026 तय की है।
नगर निगम पानीपत ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाया है। निगम के सहायक टाउन प्लानर ने 20 जनवरी 2026 को न्यू इंडिया ट्रांसपोर्ट के संचालक देवेंद्र सिंह को नोटिस जारी कर आरोप लगाया कि कंपनी ने बिना स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के रिहायशी इलाके सुखदेव नगर में अवैध निर्माण किया है और वहीं से अवैध रूप से ट्रांसपोर्ट संचालन कर रही है। हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 की धारा 261 के तहत निगम ने आदेश दिया कि 7 दिनों के भीतर निर्माण को मूल स्वरूप में लाया जाए या अवैध निर्माण हटाया जाए। चेतावनी दी गई कि समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर निगम स्वयं निर्माण गिराएगा और उसका खर्च भी मालिक से वसूलेगा।
नगर निगम के इस आदेश के खिलाफ ट्रांसपोर्ट कंपनी ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान ट्रांसपोर्टर की ओर से दलील दी गई कि कंपनी लंबे समय से कानूनी तरीके से व्यवसाय कर रही है और नगर निगम द्वारा जारी नोटिस नियमों के खिलाफ हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला किसी खतरनाक भवन या तत्काल जन-जोखिम से जुड़ा नहीं है। नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं, इसका फैसला सबूतों के आधार पर किया जाएगा। यदि नगर निगम को फिलहाल कार्रवाई से नहीं रोका गया, तो ट्रांसपोर्टर को अपूरणीय क्षति हो सकती है। इसी आधार पर अदालत ने नगर निगम को 20 फरवरी 2026 तक किसी भी तरह की दंडात्मक या दबावपूर्ण कार्रवाई करने से रोक दिया है।
इस साल जिन ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने नगर निगम के आदेशों को अदालत में चुनौती दी है, उनमें दिल्ली पानीपत गोल्डन ट्रांसपोर्ट, चिनार रोडलाइंस, डायमंड रोडलाइंस, हिमाचल कश्मीर, श्री महाबीर ट्रांसपोर्ट, दिल्ली मालवा ट्रांसपोर्ट, न्यू इंडिया ट्रांसपोर्ट और ओम शिव ट्रांसपोर्ट प्रमुख हैं। यह मामला अब शहर में रिहायशी इलाकों में ट्रांसपोर्ट संचालन और नगर नियोजन को लेकर बड़ी बहस का रूप लेता जा रहा है।
Akhil Mahajan