गोपनीयता विवाद के बीच यू-टर्न, स्मार्टफोन में अब नहीं होगा संचार साथी ऐप अनिवार्य
संचार साथी ऐप को लेकर विवाद के बीच सरकार ने प्री-इंस्टॉलेशन अनिवार्य करने का आदेश वापस लिया। 1.4 करोड़ डाउनलोड, रोज 2,000 साइबर फ्रॉड रिपोर्ट और 6 लाख नए रजिस्ट्रेशन।
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संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल अब अनिवार्य नहीं, सरकार ने लिया बड़ा फैसला
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गोपनीयता पर सियासी विवाद के बीच निर्णय, संसद में हुई बहस का असर
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1.4 करोड़ डाउनलोड, रोज 2,000 साइबर फ्रॉड रिपोर्ट, 6 लाख नए रजिस्ट्रेशन 24 घंटे में
नई दिल्ली में संचार साथी ऐप को लेकर मचे सियासी घमासान और गोपनीयता संबंधी चिंताओं के बीच सरकार ने मोबाइल फोन निर्माताओं के लिए इस ऐप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य करने का आदेश वापस ले लिया है। अब किसी भी स्मार्टफोन में इस ऐप को पहले से इंस्टॉल रखना जरूरी नहीं होगा।
पिछले सप्ताह जारी आदेश के मुताबिक सभी कंपनियों को नए स्मार्टफोन में संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य कर दिया गया था। इसके बाद यह मामला संसद तक पहुंच गया और ऐप की प्राइवेसी को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। इसी विवाद के चलते सरकार ने बुधवार को अपना निर्णय बदल दिया।
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह ऐप साइबर फ्रॉड और दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों से सुरक्षा के लिए बनाया गया है, न कि किसी पर निगरानी रखने के लिए। प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि अब तक 1.4 करोड़ यूजर्स इस ऐप को डाउनलोड कर चुके हैं और रोजाना लगभग 2,000 साइबर फ्रॉड रिपोर्ट की जाती हैं। पिछले 24 घंटों में 6 लाख नए यूजर्स ने रजिस्ट्रेशन किया, जिससे इसकी बढ़ती स्वीकार्यता का पता चलता है।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद में कहा कि संचार साथी ऐप से न तो स्नूपिंग संभव है और न भविष्य में होगी। उन्होंने बताया कि देश में दूरसंचार उपभोक्ताओं की संख्या 1 अरब तक पहुंच चुकी है और इतने बड़े डिजिटल इकोसिस्टम को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है। इस उद्देश्य से 2023 में संचार साथी पोर्टल और 2025 में ऐप को लॉन्च किया गया।
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