सोनीपत में सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा बढ़ा, हाई कोर्ट ने तय की ₹1.29 करोड़ प्रति एकड़ की दर

सोनीपत के राठधना गांव में सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित 23.77 एकड़ जमीन का मुआवजा हाई कोर्ट ने बढ़ाकर 1.29 करोड़ रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया

सोनीपत में सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा बढ़ा, हाई कोर्ट ने तय की ₹1.29 करोड़ प्रति एकड़ की दर

➤ राठधना गांव की 23.77 एकड़ जमीन के मुआवजे में बड़ा इजाफा
➤ हाई कोर्ट ने ₹1.29 करोड़ प्रति एकड़ बाजार मूल्य किया निर्धारित
➤ जमीन मालिकों की अपील मंजूर, हरियाणा सरकार की अपीलें खारिज


सोनीपत के राठधना गांव में सेक्टर-32 और 33 के बीच सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई 23.77 एकड़ जमीन के मुआवजे को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने जमीन का बाजार मूल्य बढ़ाकर एक करोड़ 29 लाख 47 हजार 200 रुपये प्रति एकड़ निर्धारित कर दिया है। जस्टिस जगमोहन बंसल ने जमीन मालिकों की अपील स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार की संबंधित अपीलों को खारिज कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद अधिग्रहित जमीन के मालिकों को पहले निर्धारित मुआवजे की तुलना में अधिक राशि मिलेगी।

मामला राठधना गांव में सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। राज्य सरकार ने 13 अप्रैल 2010 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा चार के तहत जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद 11 अप्रैल 2011 को धारा छह के तहत अधिसूचना जारी की गई। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 15 मार्च 2013 को अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य 80 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया था।

निर्धारित मुआवजे से असंतुष्ट जमीन मालिकों ने धारा 18 के तहत रेफरेंस कोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई के बाद रेफरेंस कोर्ट ने 17 अगस्त 2019 को जमीन का मुआवजा बढ़ाते हुए बाजार मूल्य 86 लाख 60 हजार रुपये प्रति एकड़ कर दिया था। हालांकि, जमीन मालिक इस दर से भी संतुष्ट नहीं थे और इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा।

इसके बाद जमीन मालिकों और राज्य सरकार दोनों ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। जमीन मालिकों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि इसी गांव और आसपास की जमीन से संबंधित लगभग इसी अवधि में जारी एक अन्य अधिग्रहण अधिसूचना के मामले में हाई कोर्ट पहले ही जमीन का बाजार मूल्य एक करोड़ 29 लाख 47 हजार 200 रुपये प्रति एकड़ निर्धारित कर चुका है।

जमीन मालिकों की ओर से जिस मामले का हवाला दिया गया, उसमें 30 अप्रैल 2008 की बिक्री विलेख को भी जमीन के बाजार मूल्य के निर्धारण का आधार बनाया गया था। हाई कोर्ट ने पाया कि उस बिक्री विलेख में शामिल जमीन वर्तमान में अधिग्रहित की गई जमीन से करीब छह एकड़ की दूरी पर थी।

वहीं, राज्य सरकार जिस बिक्री विलेख पर भरोसा कर रही थी, उसे लेकर भी अदालत ने परिस्थितियों पर विचार किया। कोर्ट के समक्ष यह तथ्य आया कि इसी क्षेत्र और समान उद्देश्य वाले भूमि अधिग्रहण के एक अन्य मामले में हाई कोर्ट पहले ही जमीन का बाजार मूल्य निर्धारित कर चुका था।

अदालत ने माना कि दोनों अधिग्रहण लगभग एक ही समय में हुए थे और दोनों का उद्देश्य सेक्टर सड़क का निर्माण था। ऐसे में समान परिस्थितियों वाली जमीन के लिए अलग-अलग बाजार मूल्य निर्धारित करने का कोई उचित आधार नहीं है। कोर्ट ने पहले से निर्धारित बाजार मूल्य और संबंधित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा मामले में भी उसी दर को लागू करना उचित माना।

हाई कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि पहले निर्धारित किए गए एक करोड़ 29 लाख 47 हजार 200 रुपये प्रति एकड़ के बाजार मूल्य को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई 2024 को खारिज कर दिया था। इसके आधार पर हाई कोर्ट ने मौजूदा मामले में भी उसी बाजार मूल्य को लागू करने का निर्णय लिया।

फैसले के अनुसार, राठधना गांव की अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य एक करोड़ 29 लाख 47 हजार 200 रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया गया है। अदालत ने जमीन मालिकों की अपीलें मंजूर कर लीं, जबकि हरियाणा सरकार की अपीलें खारिज कर दीं।

इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि जमीन मालिकों को निर्धारित बाजार मूल्य के अलावा भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलने वाले वैधानिक लाभ भी प्राप्त होंगे। इस तरह हाई कोर्ट के फैसले से राठधना गांव में सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित 23.77 एकड़ जमीन के मुआवजे का मामला नए निर्धारित बाजार मूल्य के आधार पर तय हो गया है।