ओलिंपियन पहलवान दीपक पूनिया आज शादी के बंधन में बंधेंगे, बहादुरगढ़ में होगी सात फेरों की रस्म
ओलिंपियन पहलवान दीपक पूनिया आज झज्जर की शिवानी से शादी करेंगे। बहादुरगढ़ में होने वाले विवाह समारोह, उनके करियर और निजी जीवन से जुड़ी पूरी जानकारी पढ़ें।
➤ झज्जर के छारा गांव से निकलेगी बारात, बहादुरगढ़ के हिल्टन रिजॉर्ट में होगा विवाह समारोह
➤ UPSC की तैयारी कर रहीं शिवानी बनेंगी जीवनसाथी, 8 सितंबर 2025 को हुई थी सगाई
➤ प्रो रेसलिंग लीग छोड़ शादी को दी प्राथमिकता, लग्न टीके में लिया सिर्फ चांदी का सिक्का
हरियाणा के झज्जर जिले के रहने वाले देश के जाने-माने ओलिंपियन पहलवान दीपक पूनिया आज अपने जीवन की नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। दीपक आज, 3 फरवरी को, बहादुरगढ़ स्थित हिल्टन रिजॉर्ट में सात फेरे लेकर विवाह के बंधन में बंधेंगे। उनकी बारात शाम साढ़े चार बजे झज्जर जिले के छारा गांव से निकलेगी और करीब पांच बजे विवाह स्थल पर पहुंचेगी।
दीपक की होने वाली पत्नी शिवानी भी झज्जर जिले की निवासी हैं। वह वर्तमान में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी कर रही हैं और उनका सपना IAS अधिकारी बनने का है। दीपक और शिवानी की सगाई 8 सितंबर 2025 को हुई थी, जबकि एक दिन पहले 2 फरवरी को झज्जर के धनखड़ फार्म हाउस में पारंपरिक लग्न टीका की रस्म निभाई गई।
लग्न टीके के दौरान दीपक पूनिया ने सामाजिक सादगी की मिसाल पेश करते हुए केवल एक रुपये का चांदी का सिक्का स्वीकार किया। इस आयोजन में रिश्तेदारों और नजदीकी लोगों की मौजूदगी रही।
दीपक के पिता सुभाष पूनिया ने बताया कि खराब मौसम और कोहरे के बावजूद शादी की सभी तैयारियां समय पर पूरी की गईं और कार्यक्रम पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न किए जा रहे हैं।
‘केतली पहलवान’ से ओलिंपियन तक का सफर
19 मई 1999 को झज्जर जिले के छारा गांव में जन्मे दीपक पूनिया को बचपन से ही कुश्ती विरासत में मिली। उनके पिता स्वयं स्थानीय स्तर के पहलवान रहे हैं। महज पांच साल की उम्र में अखाड़े में उतरने वाले दीपक को गांव में “केतली पहलवान” कहा जाने लगा, जब उन्होंने बचपन में दूध पीते-पीते पूरी केतली खाली कर दी थी।
गांव के अखाड़ों से लेकर दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम तक का उनका सफर संघर्ष, अनुशासन और मेहनत की कहानी है।
टोक्यो ओलिंपिक में पदक से चूके, लेकिन हौसले नहीं टूटे
टोक्यो ओलिंपिक 2021 में दीपक पूनिया ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में मामूली अंतर से हारकर पांचवें स्थान पर रहे। यह हार उनके लिए बेहद भावनात्मक रही, क्योंकि कुछ समय पहले ही उन्होंने अपनी मां को खोया था। हालांकि, इस निराशा के बाद दीपक ने खुद को और मजबूत किया और 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया।
भारतीय सेना में सूबेदार, अंतरराष्ट्रीय पहचान
दीपक पूनिया भारतीय सेना में सूबेदार पद पर कार्यरत हैं और 86 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हैं।
उन्होंने
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2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर
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2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड
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2022 एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल
अपने नाम किया है।
शादी के लिए छोड़ी प्रो रेसलिंग लीग
पिता सुभाष पूनिया के अनुसार, दीपक को प्रो रेसलिंग लीग (PWL) में महाराष्ट्र टीम से ग्रेड-A पहलवान के रूप में चुना गया था, जहां उनकी बेस प्राइस 12 लाख रुपये तय थी। हालांकि, शादी की व्यस्तताओं के चलते दीपक ने इस सीजन में PWL न खेलने का फैसला लिया।
अखाड़े से रिश्तेदारी तक
शिवानी के पिता अनूप सिंह प्रॉपर्टी डीलर हैं। अखाड़े में प्रैक्टिस के दौरान दीपक के पिता की उनसे पहचान हुई, जो 2020 में दोस्ती में बदली और बाद में रिश्तेदारी में। दोनों परिवारों की सहमति से यह विवाह तय हुआ।
पढ़ाई में आगे बढ़ना चाहती हैं शिवानी
शिवानी ने रोहतक के जाट कॉलेज से इंग्लिश ऑनर्स में MA, साथ ही B.Ed किया है। वह आगे M.Ed और UPSC की तैयारी जारी रखेंगी। दीपक के पिता का कहना है कि “वह हमारी बहू नहीं, बेटी जैसी है और जितना चाहे पढ़े, हमें गर्व होगा।”
Akhil Mahajan