फरीदाबाद नगर निगम घोटाले में नहीं होगी चार आईएएस पर जांच

फरीदाबाद नगर निगम घोटाले में चार आईएएस अधिकारियों पर जांच नहीं होगी। हरियाणा सरकार ने एसीबी की मांग खारिज करते हुए कहा कि प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं हुई है।

फरीदाबाद नगर निगम घोटाले में नहीं होगी चार आईएएस पर जांच

➤ फरीदाबाद नगर निगम घोटाले में चार आईएएस पर जांच नहीं होगी, हरियाणा सरकार ने एसीबी को अनुमति देने से किया इंकार
➤ पांच एफआईआर में गड़बड़ी का आरोप, करोड़ों रुपये के टेंडर और पेवर ब्लॉक काम पर उठे सवाल
➤ मोहम्मद शाहिद, यश गर्ग, अनीता यादव और सोनल गोयल के खिलाफ जांच की मांग खारिज, सरकार के फैसले से एसीबी के हाथ बंधे

 हरियाणा सरकार ने फरीदाबाद नगर निगम से जुड़े निर्माण कार्यों के घोटालों में फंसे चार आईएएस अधिकारियों की भूमिका की जांच की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने पांच एफआईआर में इन अधिकारियों के खिलाफ जांच की मंजूरी मांगी थी, लेकिन सरकार ने इसे खारिज कर दिया। जिन अधिकारियों के नाम इस विवाद में सामने आए हैं उनमें मोहम्मद शाहिद, यश गर्ग, अनीता यादव और सोनल गोयल शामिल हैं।


एफआईआर के मुताबिक 2022 और 2023 में फरीदाबाद नगर निगम के कामों में भारी गड़बड़ी सामने आई। मार्च 2022 में दर्ज एफआईआर में आरोप था कि 14 नंबर पेवर ब्लॉक के काम के लिए 53.82 लाख रुपये के बजट में 1.97 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। जून 2022 की एफआईआर में कहा गया कि ठेकेदार सतबीर सिंह और अन्य को 1.76 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। जुलाई 2022 की एफआईआर में 14 नंबर इंटरलॉकिंग टाइल्स के काम में 5.51 लाख रुपये की स्वीकृति पर 98.69 लाख रुपये का भुगतान हुआ। 2023 की एफआईआर में भी करोड़ों रुपये के टेंडर भुगतान का मामला दर्ज हुआ। इन सभी मामलों में अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए एसीबी ने राज्य सरकार से अनुमति मांगी थी।

हरियाणा सरकार ने यह कहते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया कि मामलों में अधिकारियों की प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं हुई है। लिहाजा चारों आईएएस अधिकारियों पर जांच नहीं होगी। सरकार के इस कदम ने न केवल एसीबी की कार्रवाई को झटका दिया है बल्कि नगर निगम से जुड़े घोटालों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कारोबारी और स्थानीय लोग अब पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।