खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि दिल्ली की कलम बेईमान है: टिकैत
भिवानी में राकेश टिकैत ने पेस्टिसाइड खेती पर सवाल उठाए और ऑर्गेनिक खेती के लिए सब्सिडी की मांग की। किसानों को सही दाम न मिलने पर हड़ताल का संकेत दिया।
➤ पेस्टिसाइड खेती से बढ़ा खर्च, ऑर्गेनिक पर सब्सिडी की मांग
➤ किसानों को सही दाम नहीं, हड़ताल का विकल्प भी बताया
➤ विदेशी डेयरी उत्पादों और नकली दूध पर सख्त रुख
भिवानी पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने किसानों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने पूर्व सांसद जंगबीर सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया और उनके योगदान को याद किया।
टिकैत ने कहा कि पेस्टिसाइड और रासायनिक खाद के कारण खेती का खर्च लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने इसे इंडस्ट्री की देन बताते हुए कहा कि इससे किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी दी जाए, ताकि किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ सकें।
उन्होंने अधिक उत्पादन के बावजूद किसानों को सही कीमत नहीं मिलने पर भी सवाल उठाए। टिकैत ने कहा कि ज्यादा पैदावार का फायदा किसान को नहीं मिल रहा, बल्कि बाजार में दाम गिर जाते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में किसान एग्रीकल्चर हड़ताल जैसे कदम भी उठा सकते हैं, तभी उन्हें उचित मूल्य मिल पाएगा।
टिकैत ने तीखा बयान देते हुए कहा कि “खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि दिल्ली की कलम बेईमान है।” उन्होंने सरकारी नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए बदलाव की जरूरत जताई।
गैस की कमी को लेकर उन्होंने कहा कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, बल्कि कालाबाजारी के कारण दाम बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर घर में चूल्हा जलना चाहिए और सरकार को इस पर सख्त निगरानी करनी चाहिए।
बे-मौसमी बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान पर टिकैत ने कहा कि सरकार को खेत को इकाई मानकर मुआवजा देना चाहिए, न कि बड़े क्षेत्र को आधार बनाना चाहिए। इससे किसानों को सही मुआवजा मिल सकेगा।
दूध के बढ़ते दाम और बाजार व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि सरकार को नकली दूध पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए। यदि ऐसा होता है तो किसानों को दूध का उचित मूल्य मिलेगा और बाजार में संतुलन बनेगा।
अमेरिका के साथ डेयरी प्रोडक्ट और एनिमल फूड समझौते पर टिकैत ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि विदेश से आने वाला दूध और सोया मिल्क जेनेटिकली मॉडिफाइड होगा, जिससे देश के पशुपालकों को भारी नुकसान होगा।
मंडी व्यवस्था पर भी उन्होंने सवाल उठाए। टिकैत ने कहा कि ट्रैक्टर की फोटो और बायोमैट्रिक की शर्तें किसानों के लिए परेशानी बन रही हैं। कई किसानों के पास ट्रैक्टर नहीं है या जमीन और ट्रैक्टर अलग-अलग नाम पर हैं, ऐसे में बुजुर्ग किसान मंडी में बायोमैट्रिक कैसे करेंगे।
Akhil Mahajan