BKU नेता राकेश-टिकैत ने सरकार पर साधा निशाना:बोले- फसल खरीद के नए नियमों से परिवार बटेंगे
भिवानी में राकेश टिकैत ने सरकार की नई कृषि नीतियों पर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं बदले तो फिर से किसान आंदोलन हो सकता है।
■ भिवानी पहुंचे BKU नेता राकेश टिकैत, सरकार की नीतियों पर हमला
■ बोले- नए नियमों से परिवार टूटेंगे, ट्रैक्टर बंद हो जाएंगे
■ चेतावनी- जरूरत पड़ी तो फिर होगा बड़ा किसान आंदोलन
भिवानी में भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार की नई कृषि और खरीद नीतियों पर तीखा हमला बोला। वह पूर्व सांसद जंगबीर सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करने पहुंचे थे, जहां उन्होंने किसानों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी और चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं बदले तो फिर से बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।राकेश टिकैत ने अनाज मंडियों में बायोमैट्रिक सिस्टम लागू करने और ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट व दस्तावेजों की सख्ती को किसानों के लिए परेशानी बढ़ाने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि किराए पर चलने वाले ट्रैक्टरों को नियमों के चलते बार-बार कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा और तीसरी बार पकड़े जाने पर जेल तक जाना पड़ सकता है। ऐसे में किसान और मजदूर दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी।
उन्होंने एनजीटी के नियमों का जिक्र करते हुए कहा कि NCR में 10 साल और अन्य जगहों पर 15 साल पुराने ट्रैक्टरों का न तो रजिस्ट्रेशन मिलेगा और न ही बीमा। इससे बड़ी संख्या में ट्रैक्टर सड़कों से बाहर हो जाएंगे, जो सीधे तौर पर खेती को प्रभावित करेगा।टिकैत ने कहा कि खेती को जरूरत से ज्यादा जटिल और कागजी प्रक्रिया में बांधने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर जमीन दादा के नाम है और पोता ट्रैक्टर चलाता है, तो बायोमैट्रिक जैसे नियमों से दिक्कतें आएंगी। अगर जमीन किसी महिला के नाम है, तो भुगतान सीधे उसके खाते में जाएगा, जिससे परिवारों में बंटवारा बढ़ सकता है।
आईएमटी (इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप) प्रोजेक्ट को लेकर भी टिकैत ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट किसानों की जमीन हड़पने का जरिया बन सकता है।
उनके मुताबिक, पहले जमीन सस्ती दरों पर खरीदी जाएगी और बाद में महंगे दामों पर बेची जाएगी, जबकि असल में उद्योग नहीं लगाए जाएंगे।मौसम से हुए नुकसान पर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि ओलावृष्टि और बारिश से गिरी फसल की लेबर लागत बढ़ जाती है, लेकिन मुआवजा तय करने में इसे नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने मांग की कि मुआवजा पूरे क्षेत्र के बजाय प्रत्येक खेत को इकाई मानकर दिया जाए।टिकैत ने जहरीली खेती पर भी सवाल उठाए और कहा कि किसान खुद भी पेस्टीसाइड से परेशान हैं, लेकिन विकल्प क्या है, यह सरकार बताए। उन्होंने ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने और उस पर सब्सिडी देने की मांग की।
आंदोलन को लेकर उन्होंने साफ कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो पहले की तरह देशभर में फिर से आंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी जमीन न बेचें, क्योंकि जमीन कभी घाटे का सौदा नहीं होती।
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