SC/ST Act पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अग्रिम जमानत पर लगाई शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST Act मामलों में अग्रिम जमानत पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि यह सिर्फ तभी दी जा सकती है, जब प्रथम दृष्टया अपराध घटित न हुआ हो। कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया और कहा कि इस कानून का उद्देश्य पीड़ितों की गरिमा की रक्षा करना है।
➤ SC/ST Act मामलों में अग्रिम जमानत सिर्फ तभी जब अपराध प्रथम दृष्टया साबित न हो
➤ सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश किया रद्द
➤ आरोपी पर सार्वजनिक स्थान पर जातिसूचक शब्दों से अपमान का आरोप
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों में अग्रिम जमानत को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि इस अधिनियम के तहत अग्रिम जमानत तभी दी जा सकती है, जब प्रथम दृष्टया यह साबित हो जाए कि अपराध नहीं हुआ है।
चीफ जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली बेंच ने यह टिप्पणी करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक आरोपी को अग्रिम जमानत दी गई थी। आरोपी पर आरोप था कि उसने सार्वजनिक तौर पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर शिकायतकर्ता का अपमान किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में अग्रिम जमानत देना तभी उचित है, जब अदालत के सामने मौजूद तथ्यों और सबूतों से साफ हो कि कथित अपराध घटित ही नहीं हुआ। कोर्ट ने साफ कहा कि SC/ST Act का उद्देश्य पीड़ितों की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना है, इसलिए इसमें ढिलाई नहीं बरती जा सकती।
इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अग्रिम जमानत SC/ST Act में अपवाद होगी, नियम नहीं। अदालत ने चेतावनी दी कि इस कानून की मूल भावना से छेड़छाड़ करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।