पानीपत–गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण तेज, 19 गांवों के किसानों को मिलेगा समय पर मुआवजा
गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे के लिए 197 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण शुरू, 19 गांवों के किसानों से 21 दिन में आपत्तियां मांगी गईं, मुआवजे का भरोसा।
बड़े स्तर पर 197 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू
19 गांवों के किसानों से 21 दिन में मांगी गई आपत्तियां
प्रभावित जमीनों पर रजिस्ट्री रोक, बाकी जमीनों को राहत
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से हरियाणा के पानीपत को जोड़ने वाले महत्वाकांक्षी गोरखपुर–पानीपत एक्सप्रेसवे को लेकर अब प्रशासनिक प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। सदर तहसील के 19 गांवों से होकर गुजरने वाले इस एक्सप्रेसवे के लिए कुल 197 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी है, जिससे क्षेत्र के विकास और कनेक्टिविटी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। प्रशासन ने इस परियोजना के तहत आने वाली 1642 गाटा संख्या वाली जमीनों की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है, ताकि अधिग्रहण प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा अधिग्रहित की जाने वाली जमीनों की विस्तृत सूची भी अब सार्वजनिक कर दी गई है। पहले केवल गाटा नंबर जारी किए गए थे, लेकिन अब अराजी नंबरों की विस्तृत जानकारी भी सामने आ चुकी है। प्रशासन ने प्रभावित किसानों और जमीन मालिकों से 21 दिनों के भीतर आपत्तियां दर्ज कराने को कहा है, जिसके बाद उनकी सुनवाई कर मुआवजे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे यह संकेत मिल रहा है कि सरकार इस प्रोजेक्ट को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से पूरा करना चाहती है।
इस बीच प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक रहेगी, जो अधिग्रहण के दायरे में आती हैं। बाकी जमीनों की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटा ली गई है, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है। पहले सदर तहसील और कैंपियरगंज क्षेत्र के 46 गांवों में रजिस्ट्री प्रतिबंध लागू था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।
प्रभावित गांवों में बढ़नी, सियारामपुर, महराजगंज, मंगलपुर, ठाकुरपुर, जंगल डुमरी, खुटहन खास, फुलवरिया, मेहदिया, रामपुर बुजुर्ग, इस्लामपुर, जमुनिया, बिस्वा, खिरिया, कोटवा, समस्तपुर, सोनराइच और पोखरभिंडा जैसे गांव शामिल हैं। इन गांवों के किसानों को अब उम्मीद है कि उन्हें समय पर और उचित मुआवजा मिलेगा।
प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और परियोजना समय पर पूरी हो सके। यह एक्सप्रेसवे बनने के बाद उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच यातायात, व्यापार और औद्योगिक विकास को नई गति देगा।
Akhil Mahajan