दिल्ली ब्लास्ट आरोपी उमर नबी के लिंक हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े, अब तक तीन डाक्टर समेत 13 हिरासत में
फरीदाबाद पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर छापा मारकर 13 लोगों को हिरासत में लिया। विस्फोटक केस में तीन डॉक्टर गिरफ्तार, गल्फ फंडिंग से जुड़ी जांच जारी।
-
फरीदाबाद पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर मारा छापा, 13 लोग हिरासत में
-
डॉ. मुजम्मिल शकील और दो डॉक्टर गिरफ्तार, विस्फोटक केस से जुड़ा नेटवर्क बेनकाब
-
‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ की साजिश, गल्फ फंडिंग से जुड़ी यूनिवर्सिटी पर जांच तेज
फरीदाबाद में 2900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद होने के बाद मंगलवार को पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी में बड़ा छापा मारा। इस कार्रवाई में पुलिस ने 13 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें 7 डॉक्टर, 5 छात्र और एक युवती शामिल है। बताया जा रहा है कि यह युवती डॉ. मुजम्मिल शकील की कार का इस्तेमाल करती थी।
9 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. मुजम्मिल के फतेहपुर तगा और धौज गांव स्थित किराए के मकानों से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जब्त की थी। इसके बाद फरीदाबाद पुलिस ने दोनों इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया। पुलिस को जांच के दौरान फतेहपुर तगा की मस्जिदों से 4 जमातियों को हिरासत में लेना पड़ा, जिनके फोन से वॉट्सऐप चैट डिलीट मिली है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, डॉ. मुजम्मिल और यूनिवर्सिटी के कुछ अन्य डॉक्टरों के तार सीधे इस साजिश से जुड़े हो सकते हैं। यूनिवर्सिटी से जुड़ा डॉ. मोहम्मद उमर नबी — जो दिल्ली ब्लास्ट का आरोपी है — भी इसी संस्थान में अध्यापन कर चुका है। वह 7 मई 2024 को यहां जुड़ा था, लेकिन 30 अक्टूबर के बाद से गायब है। जांच में सामने आया है कि 10 नवंबर को ब्लास्ट वाले दिन, उमर ने यूनिवर्सिटी से ही i20 कार लेकर दिल्ली की ओर गया था, और बाद में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास उसी कार में विस्फोट हुआ।
CID की टीम ने धौज गांव के घर की जांच के दौरान उर्दू में लिखे कुछ शब्द बरामद किए हैं, जिनका वीडियो रिकॉर्ड कर जांच के लिए भेजा गया है। वहीं, फतेहपुर तगा के ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कभी मुजम्मिल को इलाके में नहीं देखा। यह भी पता चला है कि मुजम्मिल ने जो घर किराए पर लिया था, वह गांव के सबसे अलग-थलग हिस्से में स्थित था।
पुलिस ने चार जमातियों (जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु, ओडिशा और हथीन निवासी) को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। उनके फोन से डिलीट चैट मिलने के बाद साइबर एक्सपर्ट टीम को भी जांच में शामिल किया गया है।
इस पूरे मामले में अब तक तीन डॉक्टर गिरफ्तार किए जा चुके हैं — डॉ. आदिल अहमद राठर, डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई उर्फ मुजम्मिल शकील, और लेडी डॉक्टर शाहीन शाहिद। पुलिस को शक है कि यह पूरा नेटवर्क ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का हिस्सा है, जिसमें ऐसे पढ़े-लिखे लोगों को शामिल किया जाता है जिन पर आम तौर पर कोई शक नहीं करता।
पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब यूनिवर्सिटी की फंडिंग और नेटवर्किंग की जांच में जुटी हैं। बताया जा रहा है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी को गल्फ देशों से फंडिंग मिलती रही है। फिलहाल, यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
Author1