हरियाणा में गेस्ट टीचर्स का बड़ा प्रदर्शन,शिक्षा मंत्री के घर के बाहर धरना, पक्का करने की मांग
हरियाणा गेस्ट टीचर्स ने पानीपत में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के आवास पर धरना दिया। शिक्षक 28 मई 2014 से नियमितीकरण और कोर्ट के फैसले लागू करने की मांग कर रहे हैं।
हरियाणा के गेस्ट टीचर्स ने पानीपत में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के आवास के बाहर धरना शुरू किया
➤ टीचर्स ने 58 साल की रिटायरमेंट और 730 दिन की CCL समेत नए सेवा नियमों को ठुकराया
➤ 12 हजार गेस्ट टीचर्स की मांग- कोर्ट के फैसले के अनुसार 28 मई 2014 से पक्का किया जाए
हरियाणा के प्रदेशभर के गेस्ट टीचर्स बुधवार को अपनी सेवाएं पक्की करने की मांग को लेकर पानीपत पहुंच गए। टीचर्स ने शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान मंत्री का स्टाफ प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों से बातचीत कर रहा है। गेस्ट टीचर्स ने सरकार की ओर से मंगलवार को जारी किए गए हरियाणा अतिथि सेवा नियम-2026 को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
सरकार ने 22 सितंबर 2026 को गेस्ट टीचर्स के लिए नए सेवा नियम अधिसूचित किए हैं। आधिकारिक शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर भी Haryana Guest Teachers Service Rules, 2026 को 22 सितंबर 2026 की तारीख के साथ प्रकाशित किया गया है।
इन नियमों में 58 साल की उम्र में रिटायरमेंट, 730 दिन की चाइल्ड केयर लीव (CCL), पितृत्व अवकाश और दंड से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। लेकिन गेस्ट टीचर्स का कहना है कि उन्हें इन सेवा शर्तों की जरूरत नहीं, बल्कि उनकी मुख्य मांग नियमितीकरण यानी पक्का किया जाना है।
हरियाणा गेस्ट टीचर्स के मीडिया प्रभारी डॉ. अजय लोहान ने कहा कि प्रदेश सरकार को कोर्ट के फैसले लागू करने चाहिए। उनके मुताबिक सरकार ने जो सेवा नियम बनाए हैं, वह गेस्ट टीचर्स की मांग नहीं है। उनका कहना है कि करीब 12 हजार गेस्ट टीचर्स की एक ही मांग है कि कोर्ट का फैसला लागू करके उन्हें पक्का किया जाए और इससे कम कुछ भी मंजूर नहीं है।
नए सेवा नियमों में क्या-क्या प्रावधान हैं?
सरकार की ओर से जारी हरियाणा अतिथि शिक्षक सेवा नियम, 2026 में गेस्ट टीचर्स की सेवा से जुड़े अलग-अलग प्रावधान तय किए गए हैं।
58 साल में रिटायरमेंट का प्रावधान है। जिस महीने गेस्ट टीचर की उम्र 58 साल पूरी होगी, उसी महीने के आखिरी दिन उनकी सेवानिवृत्ति होगी। यानी 58 साल की उम्र पूरी होने से पहले इस आधार पर उनकी सेवा खत्म नहीं की जाएगी।
इसके अलावा महिला और एकल पुरुष गेस्ट टीचर्स को पूरी सेवा अवधि में 730 दिन की चाइल्ड केयर लीव (CCL) देने का प्रावधान किया गया है। यह छुट्टी बिना वेतन होगी, लेकिन इसे सर्विस ब्रेक नहीं माना जाएगा।
नियमों में 15 दिन के पितृत्व अवकाश का भी प्रावधान है। दो जीवित बच्चों तक वाले पुरुष गेस्ट टीचर को पत्नी के प्रसव या एक साल से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलेगा। यह अवकाश प्रसव की तारीख से 15 दिन पहले से लेकर प्रसव के 6 महीने बाद तक लिया जा सकेगा।
इसके साथ ही गेस्ट टीचर्स पर रेगुलर टीचर्स की तरह नियुक्ति एवं दंड प्राधिकारी के नियम लागू होंगे। मामूली दंड में सर्विस रिकॉर्ड में चेतावनी या निंदा दर्ज करना तथा लापरवाही या आदेश के उल्लंघन से हुए नुकसान की वेतन से वसूली जैसे प्रावधान शामिल हैं।
नए नियमों में पुरुष गेस्ट टीचर्स के लिए 10 दिन और महिला गेस्ट टीचर्स के लिए 22 दिन आकस्मिक अवकाश का भी प्रावधान बताया गया है।
गेस्ट टीचर्स की असली मांग क्या है?
गेस्ट टीचर्स का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल सेवा शर्तों को लेकर नहीं है। उनकी मुख्य मांग नियमितीकरण की है। एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ. अजय लोहान के मुताबिक गेस्ट टीचर्स को कोर्ट के फैसलों के अनुसार 28 मई 2014 से पक्का माना जाना चाहिए।
गेस्ट टीचर्स की मांग है कि पक्के होने की तारीख से ही 6 प्रतिशत ब्याज समेत बकाया राशि, ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य देय लाभ दिए जाएं।
नए सेवा नियमों में EPF, वेतन बढ़ोतरी, मेडिकल लीव या पक्का करने का स्पष्ट जिक्र नहीं होने से भी गेस्ट टीचर्स नाराज हैं। उनका कहना है कि सरकार को अदालत के आदेशों के अनुरूप नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए।
23 जून से लघु सचिवालय में भी चल रहा धरना
गेस्ट टीचर्स की नियमितीकरण की मांग को लेकर 23 जून से लघु सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना भी जारी है। राज्य कार्यकारिणी सदस्य मेवा सिंह पिलानिया, बलजीत सिंह ढिल्लों और कुलदीप कुमार ने बताया कि सरकार से लगातार मांग की जा रही है कि पक्का करने से जुड़े अदालती आदेशों को लागू किया जाए।
अब बुधवार को गेस्ट टीचर्स शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के पानीपत स्थित आवास के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। मंत्री का स्टाफ उनसे बातचीत कर रहा है।
2005-06 में निकली थी भर्ती
गेस्ट टीचर्स से जुड़े विवाद की शुरुआत करीब दो दशक पहले हुई थी। याचिकाकर्ता सुखविंदर सिंह के अनुसार, साल 2005-06 में सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों के लिए वैकेंसी निकाली गई थी। इसके लिए विज्ञापन जारी किया गया, चयन समिति का गठन हुआ, आवेदकों की जांच की गई और मेरिट लिस्ट जारी करने के बाद नियुक्तियां की गईं।
इसके बाद इन शिक्षकों ने गेस्ट फैकल्टी के रूप में जॉइन किया। बताया गया कि इस प्रक्रिया के तहत 12 हजार 700 टीचर्स को नियुक्ति दी गई थी। जॉइनिंग के बाद से ही टीचर्स और याचिकाकर्ता सुखविंदर सिंह नियमित नियुक्ति की मांग करते रहे। इसको लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन हुए और मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा।
सरकार ने कोर्ट में क्या दलील दी थी?
मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से यह दलील दी गई थी कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी। सरकार का कहना था कि वे नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे, इसलिए उन्हें परमानेंट करने का अधिकार नहीं है।
गेस्ट टीचर्स की ओर से इस दलील का विरोध किया गया। इसी मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद नियमितीकरण को लेकर गेस्ट टीचर्स की मांग को नया आधार मिला।
2026 में भी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सामने गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों के नियमितीकरण से जुड़े मामले पहुंचे हैं। सितंबर 2026 के एक मामले में याचिकाकर्ताओं ने 2014 की नियमितीकरण नीतियों और पहले के न्यायिक फैसलों के आधार पर नियमितीकरण की मांग रखी।
हाईकोर्ट ने 20 साल की सेवा को लेकर क्या कहा?
गेस्ट टीचर्स के मामले में हाईकोर्ट ने कहा था कि सरकार खुद मान चुकी है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण इन शिक्षकों की सेवाएं ली गई थीं। करीब 20 साल तक सेवाएं लेने के बाद उन्हें केवल अस्थायी या ‘स्टॉप गैप अरेंजमेंट’ बताना उचित नहीं है।
अदालत ने शिक्षकों की भूमिका को लेकर भी टिप्पणी की थी। फैसले में शिक्षकों को समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा गया कि उन्हें मनमाने ढंग से ‘स्पेयर’ की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। लंबे समय तक संविदा पर सेवाएं लेने के बाद उन्हें केवल अस्थायी कर्मचारी बताने के तर्क पर भी सवाल उठाया गया।
2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष आए मामलों में भी याचिकाकर्ताओं ने 2005 में पारदर्शी चयन प्रक्रिया के जरिए नियुक्ति और करीब दो दशक की लगातार सेवा का हवाला देते हुए नियमितीकरण की मांग की है।
2014 की नियमितीकरण नीतियों का भी दिया गया हवाला
गेस्ट टीचर्स के नियमितीकरण की मांग में 16 जून 2014 और 18 जून 2014 की हरियाणा सरकार की नियमितीकरण नीतियों का भी हवाला दिया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य मामले के 16 अप्रैल 2026 के फैसले में 16 जून 2014 की नीति के तहत 28 मई 2014 को सेवा में मौजूद और निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। 18 जून 2014 को ग्रुप C और D कर्मचारियों के संबंध में इसी तरह की नीति जारी हुई थी।
वहीं, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 25 मई 2026 के सुखविंदर सिंह मामले का भी गेस्ट टीचर्स की ओर से हवाला दिया जा रहा है। बाद के मामलों में याचिकाकर्ताओं ने इसी फैसले के आधार पर नियमितीकरण और उससे जुड़े लाभों की मांग की है।
पक्का होने पर किन शिक्षकों को लाभ मिलने की मांग?
गेस्ट टीचर्स के अनुसार 2005-06 की भर्ती प्रक्रिया में नियुक्त गेस्ट ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर यानी TGT, गेस्ट पोस्ट ग्रेजुएट टीचर यानी PGT, लैंग्वेज टीचर, ड्राइंग टीचर और कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर को इसका लाभ मिल सकता है, जहां संबंधित नीति लागू होगी। इसके अलावा वे शिक्षक भी लाभ के दायरे में आने की मांग कर रहे हैं, जिन्होंने 2014 की नियमितीकरण नीति की शर्तें पूरी की हैं।
गेस्ट टीचर्स का कहना है कि यदि उन्हें नियमित किया जाता है तो उन्हें सरकारी टीचर्स की तरह कई सेवा सुविधाएं मिलेंगी। इनमें पे स्केल, महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), मेडिकल सुविधाएं, अर्न लीव (EL), मातृत्व व पितृत्व अवकाश, सालाना वेतन वृद्धि, पेंशन संबंधी लाभ और सर्विस रूल के अनुसार प्रमोशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
हालांकि इन लाभों का वास्तविक स्वरूप नियमितीकरण के निर्णय और लागू सरकारी नियमों पर निर्भर करेगा।
सरकार ने बनाए सेवा नियम, गेस्ट टीचर्स की मांग अब भी नियमितीकरण
एक तरफ हरियाणा सरकार ने 22 सितंबर 2026 को गेस्ट टीचर्स के लिए सेवा नियम-2026 अधिसूचित कर दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ गेस्ट टीचर्स संगठन इन नियमों को अपनी मूल मांग का समाधान नहीं मान रहा है।
गेस्ट टीचर्स का कहना है कि उन्हें 58 साल तक सेवा जारी रखने या छुट्टियों की व्यवस्था से ज्यादा जरूरत नियमितीकरण की है। इसी मांग को लेकर प्रदेशभर के शिक्षक अब शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर धरने पर बैठे हैं। आने वाले समय में सरकार और गेस्ट टीचर्स के बीच बातचीत से इस विवाद की अगली दिशा तय होगी।
Akhil Mahajan