फरीदाबाद की ₹5.84 करोड़ की अटल लाइब्रेरी पर उद्घाटन के बाद भी ताला, ढाई घंटे में दो बार कटा रिबन
फरीदाबाद की ₹5.84 करोड़ की अटल लाइब्रेरी उद्घाटन के बाद भी बंद है। एक दिन दो बार रिबन कटा, लेकिन स्टाफ और किताबों की व्यवस्था अधूरी है।
फरीदाबाद की ₹5.84 करोड़ की हाईटेक अटल लाइब्रेरी उद्घाटन के बाद भी बंद
➤ एक ही दिन करीब ढाई घंटे के अंतराल में दो अलग-अलग कार्यक्रमों में दो बार कटा रिबन
➤ कंप्यूटर और आधुनिक सुविधाएं तैयार, लेकिन स्टाफ और किताबों की व्यवस्था अब तक अधूरी
फरीदाबाद के सेक्टर-12 टाउन पार्क में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में करीब ₹5.84 करोड़ की लागत से तैयार की गई हाईटेक लाइब्रेरी उद्घाटन के बाद भी विद्यार्थियों के लिए नहीं खुल पाई है। करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई इस लाइब्रेरी के दरवाजे पर अभी भी ताला लगा हुआ है। यहां पढ़ाई के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं, लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए जरूरी स्टाफ और किताबों की व्यवस्था अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
लाइब्रेरी की सबसे ज्यादा चर्चा इसके उद्घाटन को लेकर हुई थी। 28 दिसंबर 2025 को एक ही दिन करीब ढाई घंटे के अंतराल में दो अलग-अलग कार्यक्रम हुए और दोनों में लाइब्रेरी का रिबन काटा गया। पहले राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर ने मंत्री विपुल गोयल और राज्य मंत्री राजेश नागर के साथ इसका उद्घाटन किया। करीब दो घंटे बाद केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर अपने समर्थकों के साथ पहुंचे और दोबारा रिबन काटकर लाइब्रेरी का उद्घाटन किया।
उद्घाटन के कई महीने बाद भी लाइब्रेरी शुरू नहीं हो पाई है। मामले को लेकर जब डीसी आयुष सिन्हा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह पूरे मामले की जानकारी ले रहे हैं। पूरी जानकारी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी और लाइब्रेरी शुरू नहीं होने के कारणों का भी पता लगाया जाएगा।
लाइब्रेरी को लेकर कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल और केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर से फोन पर संपर्क कर जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों से संपर्क नहीं हो सका।
कंप्यूटर लगे, लेकिन ऑपरेटर नहीं; रैक तैयार, किताबें गायब
करीब 200 विद्यार्थियों के एक साथ बैठकर पढ़ने की क्षमता वाली इस लाइब्रेरी को आधुनिक स्टडी सेंटर के रूप में तैयार किया गया है। भवन में कंप्यूटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए फिलहाल ऑपरेटर या अन्य स्टाफ उपलब्ध नहीं है।
इसी तरह किताबें रखने के लिए रैक तैयार हैं, लेकिन इन रैक में अभी किताबें नजर नहीं आतीं। यानी विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई का आधुनिक माहौल तैयार करने के उद्देश्य से भवन और कई सुविधाएं तो विकसित कर दी गई हैं, लेकिन लाइब्रेरी को वास्तविक रूप से संचालित करने की व्यवस्थाएं अभी अधूरी हैं।
लाइब्रेरी में ई-लाइब्रेरी, हाई-स्पीड इंटरनेट, रीडिंग हॉल, ग्रुप डिस्कशन चैंबर, ऑडियो-विजुअल और मल्टीमीडिया रूम जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसके अलावा डिजिटल कंटेंट और ई-बुक्स की व्यवस्था के साथ फायर फाइटिंग सिस्टम भी लगाया गया है।
भवन में ऑडिटोरियम, मेजेनाइन फ्लोर और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं भी तैयार की गई हैं। इस तरह पढ़ाई और विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भवन में काफी इंतजाम किए गए हैं, लेकिन इन्हें विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए जरूरी संचालन व्यवस्था अभी पूरी नहीं हो पाई है।
भवन की जिम्मेदारी HSVP की, लाइब्रेरियन और किताबों की जिम्मेदारी प्रशासन की
लाइब्रेरी भवन की देखरेख की जिम्मेदारी एचएसवीपी को दी गई है। एचएसवीपी के एसई संदीप दहिया के अनुसार फिलहाल उनके पास भवन की देखभाल की जिम्मेदारी है।
उनका कहना है कि लाइब्रेरियन, किताबों और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को करनी है। अभी लाइब्रेरी में काम करने के लिए स्टाफ नहीं मिला है। इसके लिए प्रशासन की ओर से कई विश्वविद्यालयों से संपर्क किया जा रहा है।
फिलहाल भवन और उसमें रखे सामान की सुरक्षा के लिए एक सिक्योरिटी गार्ड तैनात किया गया है।
25 दिसंबर 2018 को रखा गया था नींव का पत्थर
अटल लाइब्रेरी की कहानी करीब आठ साल पुरानी है। 25 दिसंबर 2018 को तत्कालीन उद्योग मंत्री विपुल गोयल ने इसका शिलान्यास किया था। उस समय निर्माण की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 1.58 करोड़ रुपए रखी गई थी।
इसके बाद सितंबर 2019 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। समय के साथ भवन की लागत बढ़कर करीब 3.85 करोड़ रुपए हो गई।
इसके बाद लाइब्रेरी में ई-लाइब्रेरी और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने के लिए CSR के तहत करीब 1.99 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इस तरह भवन और ई-लाइब्रेरी पर कुल खर्च करीब 5.84 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
कई वर्षों के निर्माण और इंतजार के बाद आखिरकार दिसंबर 2025 में लाइब्रेरी का उद्घाटन हुआ, लेकिन उद्घाटन के बाद भी यह विद्यार्थियों के लिए शुरू नहीं हो सकी।
28 दिसंबर 2025 को दो बार हुआ उद्घाटन
28 दिसंबर 2025 को अटल लाइब्रेरी का उद्घाटन हुआ, लेकिन एक ही दिन में दो बार रिबन काटे जाने की वजह से यह कार्यक्रम फरीदाबाद की राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
उस दिन राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर फरीदाबाद पहुंचे थे। उन्होंने सेक्टर-16 स्थित मंत्री विपुल गोयल के कार्यालय पर उनके और राज्य मंत्री राजेश नागर के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम का आखिरी एपिसोड सुना।
इसके बाद करीब साढ़े 12 बजे सुरेंद्र नागर, विपुल गोयल और राजेश नागर सेक्टर-12 टाउन पार्क पहुंचे। यहां उन्होंने अटल लाइब्रेरी का उद्घाटन किया।
पहले कार्यक्रम में रिबन काटे जाने के बाद मामला यहीं खत्म नहीं हुआ।
करीब दो घंटे बाद फिर पहुंचे कृष्णपाल गुर्जर
पहले उद्घाटन के करीब 2 घंटे बाद केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर अपने समर्थकों के साथ टाउन पार्क पहुंचे। उनके साथ बड़खल विधायक धनेश अदलखा, एनआईटी विधायक सतीश फागना, मेयर प्रवीण बत्रा और भाजपा जिला अध्यक्ष पंकज पूजन रामपाल समेत कई नेता मौजूद थे।
कृष्णपाल गुर्जर के पहुंचने से पहले लाइब्रेरी के सामने दोबारा रिबन लगाया गया। इसके बाद उन्होंने भी लाइब्रेरी का उद्घाटन किया।
इस तरह एक ही लाइब्रेरी, एक ही दिन और करीब ढाई घंटे के अंतराल में दो उद्घाटन हुए। दूसरे उद्घाटन के बाद कृष्णपाल गुर्जर ने अपने गुट के नेताओं के साथ बोर्ड के सामने फोटो सेशन भी कराया।
लाइब्रेरी के उद्घाटन बोर्ड पर ऊपर कृष्णपाल गुर्जर का नाम और नीचे विपुल गोयल तथा सुरेंद्र नागर का नाम लिखा गया था।
फरीदाबाद भाजपा की पुरानी राजनीतिक खींचतान फिर चर्चा में
लाइब्रेरी के दो बार उद्घाटन को फरीदाबाद भाजपा की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर भी देखा गया। कृष्णपाल गुर्जर और विपुल गोयल के बीच राजनीतिक खींचतान नई नहीं है।
मनोहर लाल खट्टर सरकार के समय 20 अक्टूबर 2018 को एनआईटी मैदान में दशहरा उत्सव के दौरान दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक विवाद भी सामने आया था। इसके बाद दोनों के बीच राजनीतिक दूरियां बढ़ने की चर्चा होती रही।
2019 में विपुल गोयल का विधानसभा टिकट कटने के बाद दोनों खेमों के बीच राजनीतिक दूरी और बढ़ने की चर्चा होती रही।
बाद के वर्षों में तिगांव विधानसभा सीट को लेकर भी कृष्णपाल गुर्जर और राजेश नागर खेमे के बीच राजनीतिक खींचतान चर्चा में रही। कृष्णपाल गुर्जर अपने बेटे देवेंद्र को तिगांव से चुनाव लड़ाना चाहते थे, लेकिन 2014, 2019 और 2024 में भाजपा ने राजेश नागर को ही टिकट दिया।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते दिसंबर 2025 में अटल लाइब्रेरी के दो बार उद्घाटन को भी फरीदाबाद की अंदरूनी भाजपा राजनीति से जोड़कर देखा गया।
करोड़ों खर्च होने के बाद भी विद्यार्थियों को इंतजार
करीब ₹5.84 करोड़ की लागत से तैयार अटल लाइब्रेरी में आधुनिक सुविधाओं का बड़ा ढांचा तैयार है। कंप्यूटर, ई-लाइब्रेरी, इंटरनेट, रीडिंग हॉल, ग्रुप डिस्कशन चैंबर, ऑडियो-विजुअल और मल्टीमीडिया रूम से लेकर ऑडिटोरियम और कैफेटेरिया तक की सुविधाएं मौजूद हैं।
इसके बावजूद विद्यार्थी अभी यहां बैठकर पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। कंप्यूटर हैं, लेकिन ऑपरेटर नहीं; किताबों के लिए रैक हैं, लेकिन किताबें नहीं; भवन तैयार है, लेकिन संचालन के लिए स्टाफ नहीं।
अब जिला प्रशासन पूरे मामले की जानकारी जुटा रहा है। लाइब्रेरी कब शुरू होगी और विद्यार्थियों को इसका लाभ कब मिलेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
Akhil Mahajan