एशियन गेम्स में हिमांशु ने जीते दो रजत पदक, कुश्ती छोड़ शूटिंग में चमकाया देश का नाम
जींद के हिमांशु ने एशियन गेम्स में 10 मीटर में दो रजत पदक जीते। कुश्ती से शुरुआत के बाद कोविड में खेतों में काम कर शूटिंग में पहचान बनाई।
➤ जींद के हिमांशु ने एशियन गेम्स में 10 मीटर में दो रजत पदक जीते
➤ कुश्ती से शुरुआत के बाद कोविड में 6 माह खेत में किया काम, फिर शूटिंग को बनाया करियर
➤ दोहा में होने वाले अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए हिमांशु ने पक्का किया अपना टिकट
जींद के हिमांशु ने जापान में चल रहे एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 मीटर में दो रजत पदक अपने नाम किए हैं। हिमांशु की इस उपलब्धि की खास बात यह है कि उन्होंने अपने खेल करियर की शुरुआत कुश्ती से की थी, लेकिन कोविड के दौरान उन्हें करीब 6 माह तक खेत में काम करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने दोबारा खेलों में लौटने का फैसला किया और कोच की सलाह पर कुश्ती छोड़कर एयर राइफल शूटिंग को अपना लिया।
लगातार मेहनत और बेहतर प्रदर्शन के दम पर हिमांशु अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। एशियन गेम्स में दो रजत पदक जीतने के साथ ही उन्होंने दोहा में होने वाले अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए अपना टिकट भी पक्का कर लिया है। उनकी इस उपलब्धि पर पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह और सांसद नवीन जिंदल ने X पर बधाई दी।
एशियन गेम्स की प्रतियोगिता 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चलेगी।
2018 में कुश्ती से शुरू किया था खेल का सफर, कोच की सलाह से बदली राह
गांव डाहौला निवासी हिमांशु ने वर्ष 2018 में खेलों की शुरुआत कुश्ती से की थी। उनके खेल सफर की शुरुआत कराने में उनके चाचा और कॉमनवेल्थ कुश्ती खिलाड़ी हरजीत ढिल्लो की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने ही हिमांशु की एंट्री खेलों में करवाई थी।
शुरुआत में हिमांशु की खेलों में ज्यादा रुचि नहीं थी। इसी दौरान कोच कुलदीप नेहरा ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें कुश्ती के बजाय शूटिंग में आने की सलाह दी। इसके बाद हिमांशु ने एयर राइफल शूटिंग की ओर कदम बढ़ाया और धीरे-धीरे इसी खेल में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।
कोविड में खेल से दूर होकर छह महीने खेत में किया काम
हिमांशु के पिता शमशेर सिंह ढिल्लों एक एग्रीकल्चर कंपनी में मैनेजर हैं। उन्होंने बताया कि कोविड के दौरान जब खेल गतिविधियां प्रभावित हुईं तो उन्होंने हिमांशु को खेती के काम में लगा दिया था।
हिमांशु ने करीब 6 माह तक खेत में पसीना बहाया। इस दौरान उन्होंने खेती का काम किया, लेकिन इसके बाद उनके मन में दोबारा खेलों में लौटने की इच्छा जगी। हिमांशु ने फिर से खेल को अपनाने का फैसला किया और शूटिंग में अपनी मेहनत जारी रखी।
पिता शमशेर सिंह ढिल्लों के मुताबिक, इसी मेहनत और लगन ने हिमांशु को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि हिमांशु की उपलब्धि में कोच के साथ सांसद नवीन जिंदल और ओलिंपिक गोल्ड पोस्ट का विशेष योगदान रहा है।
इसी साल प्रैक्टिस के लिए दिल्ली हुए शिफ्ट
हिमांशु के पिता ने बताया कि हिमांशु का चयन नंबर में होने वाले अंतरराष्ट्रीय गेम्स में हो चुका है। बेहतर तैयारी और प्रैक्टिस के लिए हिमांशु इसी साल दिल्ली शिफ्ट हुए हैं।
दिल्ली में प्रशिक्षण के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए अपनी तैयारी जारी रखी। इसका परिणाम एशियन गेम्स में देखने को मिला, जहां उन्होंने 10 मीटर में दो रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
एशियन गेम्स में दो रजत पदक जीतने पर मिली बधाई
हिमांशु के दो रजत पदक जीतने के बाद उनके गांव और परिवार में खुशी का माहौल है। उनकी उपलब्धि पर पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह और सांसद नवीन जिंदल ने X पर उन्हें बधाई दी।
एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन के साथ हिमांशु ने आगामी दोहा में होने वाले अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए भी अपना टिकट पक्का कर लिया है। इससे उनके अंतरराष्ट्रीय खेल करियर को आगे बढ़ाने का रास्ता और मजबूत हुआ है।
2025 में जीते थे 10 मीटर एयर आईएसएसएफ जूनियर प्रतियोगिता में गोल्ड
हिमांशु का शूटिंग में प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया है। उन्होंने वर्ष 2025 में दिल्ली में आयोजित 10 मीटर एयर आईएसएसएफ जूनियर प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था।
इसके बाद वर्ष 2025 में आईएसएसएफ जूनियर वर्ल्ड कप में भी उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया। लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद हिमांशु की पहचान एक प्रतिभाशाली शूटिंग खिलाड़ी के रूप में बनी।
2026 में एशियन चैंपियनशिप में भी जीते दो गोल्ड
हिमांशु ने वर्ष 2026 में एशियन चैंपियनशिप में भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने जूनियर वर्ग में गोल्ड और मिक्सड में भी गोल्ड मेडल जीता।
इससे पहले भी हिमांशु स्टेट और जिला स्तर पर कई पदक जीत चुके हैं। अब एशियन गेम्स में दो रजत पदक जीतकर उन्होंने अपने पदकों की सूची में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ दी है।
कुश्ती से शुरू हुआ हिमांशु का सफर, कोविड के दौरान खेतों में छह महीने की मेहनत और इसके बाद शूटिंग में लगातार अभ्यास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। एशियन गेम्स में दो रजत पदक जीतने के बाद अब उनकी नजर दोहा में होने वाले अंतरराष्ट्रीय खेलों पर है।
Akhil Mahajan