बड़ी खबर: 5 लाख से कम कीमत की गाड़ी खरीदने-बेचने पर PAN की जरूरत खत्म: इनकम टैक्स के ड्राफ्ट नियमों में बड़ा बदलाव

इनकम टैक्स के ड्राफ्ट नियमों के तहत 5 लाख से कम कीमत की गाड़ी की खरीद-बिक्री पर PAN की अनिवार्यता खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया है।

बड़ी खबर: 5 लाख से कम कीमत की गाड़ी खरीदने-बेचने पर PAN की जरूरत खत्म: इनकम टैक्स के ड्राफ्ट नियमों में बड़ा बदलाव

अब 5 लाख रुपए से कम के वाहन लेन-देन में PAN अनिवार्य नहीं
इनकम टैक्स नियम 159 में ‘वैल्यू थ्रेशहोल्ड’ का पुनर्संयोजन प्रस्तावित
22 फरवरी तक आम जनता और विशेषज्ञों से मांगे गए सुझाव



आयकर विभाग ने मोटर वाहन लेन-देन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। ड्राफ्ट इनकम टैक्स नियमों के अनुसार अब 5 लाख रुपए से कम कीमत की गाड़ी की खरीद-बिक्री पर PAN नंबर बताना अनिवार्य नहीं होगा। अभी तक वाहन की कीमत चाहे जितनी भी हो, हर लेन-देन में PAN देना जरूरी था।

क्या बदलेगा नया नियम

ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, अब केवल वही वाहन लेन-देन PAN के दायरे में आएंगे, जिनकी कुल कीमत 5 लाख रुपए से अधिक होगी। यह बदलाव इनकम टैक्स रूल 159 के तहत प्रस्तावित किया गया है, जिसे लेन-देन के मूल्य के हिसाब से ‘रियलाइन्मेंट’ कहा गया है।

किसे देना होगा PAN

ड्राफ्ट में स्पष्ट किया गया है कि
• यदि वाहन या मोटरसाइकिल की कीमत 5 लाख रुपए से ज्यादा है
• तो वाहन बेचने वाले व्यक्ति को दस्तावेजों में PAN देना होगा
• ट्रैक्टर को इस नियम से बाहर रखा गया है

यह नियम मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 के तहत रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों पर लागू होगा।

विशेषज्ञों की राय

टैक्स विशेषज्ञ संदीप झुनझुनवाला, पार्टनर, नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स के अनुसार यह बदलाव जोखिम आधारित रिपोर्टिंग सिस्टम को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि इससे
• कम मूल्य के लेन-देन की अनावश्यक रिपोर्टिंग घटेगी
• अनुपालन लागत कम होगी
• टैक्स अधिकारियों को महत्वपूर्ण लेन-देन पर फोकस करने में मदद मिलेगी

सरकार का उद्देश्य

आयकर नियम 159 का मकसद बड़े वित्तीय लेन-देन पर निगरानी रखना है ताकि
• टैक्स चोरी रोकी जा सके
• वित्तीय पारदर्शिता बढ़े
• उच्च मूल्य के सौदों को PAN से जोड़ा जा सके

इस नियम के तहत पहले से ही बैंक अकाउंट, डिमैट अकाउंट, क्रेडिट कार्ड, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी खरीद, बड़े होटल बिल जैसे मामलों में PAN जरूरी है।

सुझाव देने की अंतिम तारीख

सरकार ने ड्राफ्ट नियमों को जन परामर्श के लिए जारी किया है। आम नागरिक, टैक्स प्रोफेशनल और उद्योग जगत 22 फरवरी 2026 तक अपने सुझाव दे सकते हैं।