गुरुग्राम में 10वीं के स्टूडेंट किया सुसाइड:स्कूल स्टाफ क्वार्टर में चुन्नी से लगाया फंदा

गुरुग्राम के फर्रुखनगर में 10वीं के छात्र ने स्टाफ क्वार्टर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। कोचिंग फीस और आर्थिक तंगी को इस कदम का कारण माना जा रहा है।

गुरुग्राम में 10वीं के स्टूडेंट किया सुसाइड:स्कूल स्टाफ क्वार्टर में चुन्नी से लगाया फंदा

■ गुरुग्राम में 10वीं के छात्र ने स्टाफ क्वार्टर में लगाई फांसी
■ कोचिंग फीस और आर्थिक तंगी से जुड़ा मामला सामने आया
■ पुलिस जांच में जुटी, परिवार में मचा कोहराम


हरियाणा के गुरुग्राम जिले के फर्रुखनगर इलाके से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां 10वीं कक्षा के 15 वर्षीय छात्र आकाश ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना स्कूल परिसर में बने स्टाफ क्वार्टर में हुई, जहां वह अपने परिवार के साथ रहता था। बताया जा रहा है कि छात्र ने अपनी मां की चुन्नी से फंदा बनाकर यह कदम उठाया। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आकाश के पिता प्रभात एक निजी स्कूल में चपरासी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उसकी मां एक प्राइवेट कंपनी में काम करती हैं। परिवार मूल रूप से बिहार के छपरा जिले का रहने वाला है और पिछले करीब 15 वर्षों से स्कूल परिसर में ही रह रहा था। आकाश पढ़ाई में होशियार था और आगे बेहतर शिक्षा के लिए दिल्ली के जनकपुरी स्थित एक कोचिंग संस्थान में दाखिला लेना चाहता था। उसकी मां ने इसके लिए 5 हजार रुपए देकर रजिस्ट्रेशन भी करवा दिया था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण आगे की फीस का इंतजाम नहीं हो पा रहा था, जिससे वह मानसिक दबाव में था।

घटना सोमवार शाम करीब 6 बजे की है, जब उसकी मां काम से लौटकर घर पहुंची तो देखा कि आकाश कमरे में फंदे से लटका हुआ है। यह देख उनके होश उड़ गए और उन्होंने तुरंत शोर मचाया। मौके पर स्कूल प्रबंधन और अन्य लोग पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई। उस समय आकाश का पिता बाहर काम पर गया हुआ था, जबकि उसकी बहन घर के अंदर पढ़ाई कर रही थी।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि सभी पहलुओं से जांच की जा रही है ताकि घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सके।

यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए बड़ा सदमा है, बल्कि समाज के सामने भी कई सवाल खड़े करती है कि आखिर पढ़ाई और आर्थिक दबाव के बीच बच्चे किस हद तक टूट रहे हैं।