हरियाणा की मंडियों में अब नहीं चलेगी कच्ची पर्ची:सरकार ने लगाई रोक; आज से नई व्यवस्था लागू

हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंडियों में कच्ची पर्ची पर रोक लगा दी है। अब किसानों को हर फसल खरीद पर अनिवार्य रूप से जे-फॉर्म मिलेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।

हरियाणा की मंडियों में अब नहीं चलेगी कच्ची पर्ची:सरकार ने लगाई रोक; आज से नई व्यवस्था लागू

हरियाणा की मंडियों में ‘कच्ची पर्ची’ पर पूरी तरह रोक लागू
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार सख्त, आज से नई व्यवस्था शुरू
अब हर खरीद पर अनिवार्य रूप से किसानों को मिलेगा ‘जे-फॉर्म’


हरियाणा की अनाज मंडियों में लंबे समय से चल रही ‘कच्ची पर्ची’ व्यवस्था पर आखिरकार पूर्ण विराम लग गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने बुधवार, 1 अप्रैल से इस प्रणाली पर रोक लागू कर दी है। अब मंडियों में कोई भी आढ़ती किसानों को कच्ची पर्ची जारी नहीं कर सकेगा। इसके स्थान पर हर फसल खरीद के बाद अनिवार्य रूप से ‘जे-फॉर्म’ जारी करना होगा, जिससे लेन-देन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। इस फैसले से मंडी व्यवस्था में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है और किसानों को सीधे तौर पर लाभ मिलने की संभावना है।

यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर, पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, ने अधिवक्ता प्रदीप रापड़िया के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया कि मंडियों में आढ़ती किसानों को कच्ची पर्ची देकर कम भुगतान करते हैं, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा दिखाया जाता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और वे कर्ज के जाल में फंसते चले जाते हैं।अनाज मंडी में पड़ी फसल का दृश्य। - Dainik Bhaskar

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को 30 दिनों के भीतर स्पष्ट कार्रवाई के निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में सरकार ने सभी मार्केट कमेटियों के सचिवों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि अब किसी भी स्थिति में कच्ची पर्ची जारी न की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसान को फसल बेचने के तुरंत बाद प्रिंटेड और आधिकारिक ‘जे-फॉर्म’ मिले।

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि किसानों को मिलने वाली रसीद में दुकान का नाम, पता, मोबाइल नंबर और तारीख स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए, ताकि लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी रहे। इसके अलावा किसानों के लिए एक 24 घंटे सक्रिय हेल्पलाइन नंबर शुरू करने की भी मांग उठाई गई, जिससे वे किसी भी अनियमितता की तुरंत शिकायत दर्ज करा सकें।

डॉ. लाठर ने यह भी बताया कि कच्ची पर्ची प्रणाली के चलते बिचौलिए किसानों का शोषण कर रहे थे। कई मामलों में किसानों को नकली पर्ची देकर कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर किया जाता था, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में पूरा भुगतान दिखाया जाता था। इस व्यवस्था के खत्म होने से किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य मिलने लगेगा।मंडियों में आढ़तियों के द्वारा दी जाने वाली कच्ची पर्ची की कॉपी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नई व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो हरियाणा और पंजाब के किसानों की आय में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। छोटे और मध्यम किसानों के लिए यह फैसला बेहद राहत देने वाला साबित हो सकता है, क्योंकि इससे उन्हें बिचौलियों के शोषण से छुटकारा मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।