हरियाणा में शिक्षक करेंगे बीएलओ ड्यूटी, चुनाव आयोग ने शिक्षा विभाग का सुझाव खारिज
चुनाव आयोग ने हरियाणा शिक्षा विभाग का सुझाव खारिज कर अध्यापकों को बीएलओ ड्यूटी में अनिवार्य किया। सुप्रीम कोर्ट फैसले के हवाले से सभी कर्मचारियों को मतदान सूची कार्य में लगाया जाएगा।
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चुनाव आयोग ने शिक्षा विभाग का सुझाव खारिज किया
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शिक्षकों सहित सभी कर्मचारी करेंगे बीएलओ ड्यूटी
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मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य को समय पर पूरा करने के निर्देश
हरियाणा में बीएलओ ड्यूटी को लेकर खींचतान के बीच चुनाव आयोग ने शिक्षा विभाग का सुझाव स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। शिक्षा विभाग ने हाल ही में निर्देश जारी कर कहा था कि शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी से मुक्त किया जाए। हालांकि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इसे स्वीकार नहीं करते हुए कहा है कि सभी शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारी चुनाव से जुड़े कार्यों में लगाए जा सकते हैं।
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि जिन अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर या सुपरवाइजर की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वे निर्धारित समय में अपना कार्य पूरा करें।
साल 2007 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए आयोग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षण और गैर-शिक्षण स्टाफ को चुनावी कार्य और मतदाता सूची पुनरीक्षण में लगाया जा सकता है। इसके साथ ही आयोग ने अपनी गाइडलाइन भी दोहराई है, जिसमें ग्रुप-सी कर्मचारी, आंगनबाड़ी वर्कर, संविदा शिक्षक और केंद्र सरकार के कर्मचारी तक को बीएलओ बनाया जा सकता है।
शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी से मुक्त करने की मांग पर आयोग का यह रुख आने वाले दिनों में बड़े प्रभाव का संकेत देता है। अब राज्यभर में शिक्षक बीएलओ ड्यूटी निभाएंगे और मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में सक्रिय भागीदारी करेंगे।
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