राहुल गांधी का सवाल- मोदी, शाह और भाजपा के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी आखिर क्यों नहीं दिखती
राहुल गांधी ने भारत की राजनीति में एंटी-इनकंबेंसी को लेकर बड़ा सवाल उठाया। इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए उन्होंने पूछा कि मोदी, शाह और भाजपा के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर आखिर क्यों नहीं दिखाई देती।
➤ राहुल गांधी ने एंटी-इनकंबेंसी को लेकर उठाया सवाल
➤ इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए मोदी-शाह और भाजपा का किया जिक्र
➤ राहुल बोले- समझ नहीं आता भाजपा के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर कैसे गायब हो जाती है
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत की राजनीति में एंटी-इनकंबेंसी यानी सत्ता-विरोधी लहर को लेकर सवाल उठाया है। राहुल गांधी ने कहा कि भारत में एंटी-इनकंबेंसी एक ऐसी बुनियादी ताकत है, जो किसी भी सरकार के खिलाफ काम करने लगती है और किसी को नहीं छोड़ती। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश युद्ध जीतने और बेहद लोकप्रिय होने के बावजूद एक-दो साल के भीतर उनके खिलाफ जबरदस्त एंटी-इनकंबेंसी पैदा हो गई थी।
राहुल गांधी ने कहा कि ऐसा हर पार्टी के साथ होता है, चाहे वह क्षेत्रीय पार्टी हो या राष्ट्रीय पार्टी। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि किसी तरह नरेंद्र मोदी, अमित शाह और भाजपा के साथ ऐसा कभी नहीं होता। उनके मुताबिक किसी व्यक्ति की लोकप्रियता और सरकार के कामकाज को समझा जा सकता है, लेकिन यह समझना मुश्किल है कि एंटी-इनकंबेंसी आखिर गायब कैसे हो जाती है।
इंदिरा गांधी का उदाहरण देकर उठाया सवाल
राहुल गांधी ने अपने बयान में इंदिरा गांधी के कार्यकाल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश युद्ध जीता था और उस समय वे बेहद लोकप्रिय थीं। इसके बावजूद एक-दो साल के भीतर उनके खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर और भारी दबाव देखने को मिला। राहुल गांधी ने इसी संदर्भ में कहा कि अलग-अलग नेताओं और राजनीतिक दलों के साथ समय-समय पर ऐसा होता रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं और क्षेत्रीय दलों के साथ भी एंटी-इनकंबेंसी देखने को मिली है। इसके बाद उन्होंने सवाल उठाया कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह और भाजपा के मामले में यह स्थिति क्यों दिखाई नहीं देती। उनके बयान का मुख्य केंद्र यही सवाल रहा कि आम तौर पर राजनीति में दिखाई देने वाली सत्ता-विरोधी भावना भाजपा के मामले में किस तरह अलग नजर आती है।
एंटी-इनकंबेंसी को लेकर राहुल गांधी का सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि किसी नेता की लोकप्रियता और सरकार के कामकाज को अलग-अलग आधार पर समझा जा सकता है। लेकिन उनके अनुसार, एंटी-इनकंबेंसी का अचानक गायब हो जाना उनके लिए एक बुनियादी सवाल है। उन्होंने कहा कि वह यह समझना चाहते हैं कि भारत की राजनीति में लंबे समय से मौजूद सत्ता-विरोधी लहर का असर कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं पर दिखाई देता है, जबकि भाजपा और नरेंद्र मोदी के संदर्भ में वह उसी तरह क्यों नहीं दिखाई देता।
राहुल गांधी ने यह टिप्पणी 24 सितंबर 2026 को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की। रिपोर्टों के मुताबिक इस दौरान उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी और एंटी-इनकंबेंसी को अपने तर्क का हिस्सा बनाया।
उनकी टिप्पणी के केंद्र में यह सवाल रहा कि भारत में अलग-अलग सरकारों और राजनीतिक दलों के खिलाफ समय के साथ सत्ता-विरोधी भावना क्यों बनती है और कुछ मामलों में इसका असर कम या अलग क्यों दिखाई देता है। यह राहुल गांधी द्वारा व्यक्त किया गया राजनीतिक सवाल और उनका दृष्टिकोण है।
Akhil Mahajan