झज्जर में भावुक दृश्य: बजरंग पुनिया के बड़े भाई ने दी पिता को मुखाग्नि
हरियाणा के ओलिंपियन बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया का निधन हो गया। अंतिम संस्कार झज्जर के खुड्डन गांव में हुआ। बलवान ने अपने बेटे को ओलिंपियन बनाने का सपना पूरा किया।
➤ हरियाणा के ओलिंपियन बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया का निधन
➤ अंतिम संस्कार झज्जर के पैतृक गांव खुड्डन में हुआ, बड़े भाई हरेंद्र ने मुखाग्नि दी
➤ पहलवान बलवान पूनिया ने बेटे बजरंग को ओलिंपियन बनाने में निभाई थी अहम भूमिका
हरियाणा के ओलिंपियन पहलवान और अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। बलवान पूनिया का अंतिम संस्कार उनके बड़े बेटे हरेंद्र पूनिया द्वारा किया गया। शुक्रवार सुबह उनकी पार्थिव देह सोनीपत से झज्जर जिले के पैतृक गांव खुड्डन लाकर अंतिम संस्कार के लिए रखी गई थी।
इस अवसर पर परिवारजन भावुक दिखाई दिए। रेसलर साक्षी मलिक के पति सत्यव्रत कादियान और बबीता फोगाट के पति विवेक सुहाग भी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पहुंचे। हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अंतिम संस्कार में उपस्थित नहीं रहे।
71 वर्षीय बलवान पूनिया का गुरुवार को दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में निधन हुआ था। वे 18 दिन से अस्पताल में भर्ती थे और उनके दोनों फेफड़े खराब हो चुके थे।
बजरंग पूनिया ने सोशल मीडिया पर पिता के निधन पर भावुक पोस्ट साझा की थी, जिसमें उन्होंने लिखा था कि उनके पिता उनके परिवार की रीढ़ थे। उनका कहना था, "बापूजी हमारे साथ नहीं रहे। उन्होंने बड़ी मेहनत से हम लोगों को यहां तक पहुंचाया था। समझ नहीं आ रहा कि उनके बिना आगे जीवन कैसा होगा।"
बलवान पूनिया का जन्म 22 जुलाई 1954 को हुआ था। वे चार भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके भाई जगबीर, रणबीर और दलबीर हैं, जिसमें रणबीर पूनिया का पहले ही निधन हो चुका है। दलबीर रेलवे पुलिस में कार्यरत हैं।
खास बात यह है कि बलवान पूनिया खुद पहलवानी का सपना पूरा नहीं कर सके। आर्थिक समस्याओं के कारण वे यह मुकाम हासिल नहीं कर पाए। लेकिन उन्होंने अपने बेटे बजरंग पूनिया को पहलवानी की ट्रेनिंग दी और उसे ओलिंपियन बनाने की ठानी। 7 साल की उम्र से ही बजरंग पूनिया को अखाड़े में ले जाकर पहलवानी सिखाई गई। आज बजरंग देश का नाम रोशन कर रहा है।
ओलिंपियन बजरंग पुनिया के पिता का अंतिम संस्कार आज, पहलवान ने लिखा पूरे परिवार की रीढ़ थे
➤ हरियाणा के ओलिंपियन पहलवान बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया का अंतिम संस्कार आज होगा
➤ बलवान पूनिया ने 18 दिन तक दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में उपचार कराया, दोनों फेफड़े खराब होने से निधन हुआ
➤ बजरंग पूनिया के पिता ने बेटे को पहलवानी की राह दिखाई, उनका परिवार सादगी और सरल स्वभाव के लिए जाना जाता है
हरियाणा के ओलिंपियन पहलवान बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया का अंतिम संस्कार आज
हरियाणा के प्रसिद्ध ओलिंपियन पहलवान और अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया का आज अंतिम संस्कार झज्जर जिले के पैतृक गांव खुड्डन में सुबह 11 बजे किया जाएगा। बलवान पूनिया ने गुरुवार को दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे 18 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे, जहाँ उनके दोनों फेफड़े खराब हो गए थे।
बजरंग पूनिया की सोशल मीडिया पोस्ट
बजरंग पूनिया ने अपने पिता के निधन पर सोशल मीडिया पर लिखा – "बापूजी हमारे साथ नहीं रहे। गुरुवार शाम सवा 6 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। उन्होंने बड़ी मेहनत से हम लोगों को यहां तक पहुंचाया था। वे हमारे पूरे परिवार की रीढ़ थे। समझ नहीं आ रहा कि उनके बिना आगे जीवन कैसा होगा।"
परिवार की सादगी और बलवान पूनिया का व्यक्तित्व
बजरंग पूनिया का परिवार सोनीपत के मॉडल टाउन में रहता है। बलवान पूनिया रोज सुबह घर के सामने कुर्सी लगाकर बैठते थे, और आसपास के लोग उनसे मिलने आते थे। वे सादा पहनावा अपनाते थे और सरल स्वभाव के लिए जाने जाते थे। परिवार में पहलवानी की परंपरा थी। बलवान पूनिया और उनके भाई भी पहलवानी करते थे, लेकिन आर्थिक कारणों से अपने सपनों को पूरा नहीं कर सके। बलवान पूनिया ने 7 साल की उम्र से ही अपने बेटे बजरंग को पहलवानी की ट्रेनिंग दी। उनका सपना था कि बेटा देश का नामी पहलवान बने, जिसे बजरंग ने साकार किया।
सांसद कुमारी सैलजा का दुख प्रकट करना
सिरसा से कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने बलवान पूनिया के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा – "बजरंग पूनिया के पिता बलवान सिंह पूनिया के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और संबल प्रदान हो।"
अंतिम संस्कार का आयोजन
बलवान पूनिया को उनके पैतृक गांव खुड्डन में सुबह 11 बजे अंतिम विदाई दी जाएगी। बजरंग पूनिया के Model Town सोनीपत स्थित घर पर शोक की छाया है और घर का गेट बंद है। परिवार, रिश्तेदार और प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित होंगे।
ओलिंपियन बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया का निधन
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ओलिंपियन पहलवान बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया का निधन
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18 दिन से दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती थे
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शुक्रवार सुबह 11 बजे गांव खुड्डन (झज्जर) में होगा अंतिम संस्कार
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खुद पहलवान बनने का सपना अधूरा रह गया तो बेटे को बनाया चैंपियन
सुशील मोर
हरियाणा के ओलिंपियन पहलवान और किसान कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया का गुरुवार शाम निधन हो गया। वे पिछले 18 दिनों से दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती थे। दोनों फेफड़े खराब हो जाने की वजह से उनकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी।
बजरंग पूनिया ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखते हुए कहा— "बापूजी हमारे साथ नहीं रहे। शाम सवा 6 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। उन्होंने बड़ी मेहनत से हमें यहां तक पहुंचाया। वे पूरे परिवार की रीढ़ थे।
समझ नहीं आ रहा उनके बिना आगे जीवन कैसा होगा।" बजरंग ने बताया कि उनके पिता का अंतिम संस्कार शुक्रवार सुबह 11 बजे उनके पैतृक गांव खुड्डन (झज्जर) में किया जाएगा।
बलवान पूनिया और उनके भाई भी पहलवानी करते थे, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वे अपना सपना पूरा नहीं कर पाए।
यही कारण रहा कि उन्होंने अपने बेटे को बचपन से ही अखाड़े के गुर सिखाने शुरू कर दिए। बलवान की इच्छा थी कि बेटा देश का नामी पहलवान बने, और बजरंग ने उनका यह सपना सच कर दिखाया।
पिता के मार्गदर्शन में ही बजरंग ने मात्र 7 साल की उम्र में पहलवानी शुरू की थी।
उनके जीवन में पिता का योगदान सबसे अहम माना जाता है। सोनीपत के मॉडल टाउन स्थित घर में बलवान पूनिया का जीवन बेहद सरल था।
वे रोज सुबह घर के बाहर कुर्सी डालकर बैठते और मोहल्ले के लोग उनसे बातचीत करने आते। उनका पहनावा और स्वभाव हमेशा सादगी से भरा रहा।
Akhil Mahajan