चौंकाने वाला मामला: कांग्रेस नेता को ₹78 करोड़ का बिजली बिल, 6 दिन में 9.99 करोड़ यूनिट दिखाईं
नारनौल में यूथ कांग्रेस नेता को ₹78 करोड़ का बिजली बिल भेजा गया, जिसमें 6 दिन में 9.99 करोड़ यूनिट दर्ज की गई। बिजली निगम ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
■ यूथ कांग्रेस नेता को ₹78.92 करोड़ का बिजली बिल भेजा गया
■ सिर्फ 6 दिन की रीडिंग में 9.99 करोड़ यूनिट दर्ज
■ बिजली निगम ने जांच शुरू की, तकनीकी गड़बड़ी की आशंका
हरियाणा के नारनौल में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यूथ कांग्रेस के जिला प्रधान पुनीत बुलाना को बिजली निगम की ओर से ₹78 करोड़ 92 लाख का बिल भेजा गया, जिसे देखकर उनके होश उड़ गए। यह बिल उनके मोबाइल पर मैसेज के जरिए आया, जिसके बाद वे तुरंत विभाग के कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां भी तत्काल कोई समाधान नहीं मिल पाया।
पुनीत बुलाना ने बताया कि उनके गांव हसनपुर में उनकी मां बिमला देवी के नाम से 10 किलोवाट का एनडीएस कनेक्शन लिया गया है, जिससे एक छोटी आटा चक्की चलती थी, जो पिछले करीब दो साल से बंद पड़ी है। ऐसे में अचानक करोड़ों का बिल आना उन्हें बेहद चौंकाने वाला लगा।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बिजली निगम द्वारा जारी बिल में अप्रैल 2026 की बिलिंग अवधि दिखाई गई है, जबकि मीटर रीडिंग मात्र 6 दिन (15 मार्च से 21 मार्च) की बताई गई है। इस दौरान बिल में 9,99,99,429 यूनिट बिजली खपत दर्ज कर दी गई, जो किसी भी उपभोक्ता के लिए लगभग असंभव मानी जाती है।
बिल के विवरण के अनुसार कुल देय राशि ₹78,92,75,697 दिखाई गई है, जिसमें एनर्जी चार्ज ₹71,69,95,908 और म्युनिसिपल टैक्स ₹1,52,79,316 शामिल हैं। जबकि इससे पहले मार्च महीने में उन्होंने सामान्य रूप से ₹63,546 का बिल जमा कराया था।
पुनीत बुलाना ने आरोप लगाया कि यह बिल जानबूझकर भेजा गया है, जिससे उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी राशि का बिल किसी भी स्थिति में सही नहीं हो सकता, खासकर तब जब उनका कनेक्शन लंबे समय से इस्तेमाल में ही नहीं है।
वहीं, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के कार्यकारी अभियंता शिवराज सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और बिल में हुई गड़बड़ी को जल्द ठीक किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि उपभोक्ता को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
प्रारंभिक जांच में यह मामला तकनीकी गड़बड़ी या डेटा एंट्री में मानवीय त्रुटि का प्रतीत हो रहा है। आमतौर पर ऐसे मामलों में निगम द्वारा बिल को रद्द कर संशोधित बिल जारी किया जाता है, लेकिन इस तरह का असाधारण आंकड़ा सामने आने से विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
Akhil Mahajan