सोनीपत में अमेरिका भेजने के नाम पर 50 लाख ठगे:“अब मैं नहीं रहूंगा, मेरी डेड बॉडी ही घर आएगी”
सोनीपत में विदेश भेजने के नाम पर 50 लाख की ठगी से परेशान युवक की मौत हो गई। परिजनों ने दलालों पर आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
■ अमेरिका भेजने के नाम पर 50 लाख की ठगी, युवक की मौत
■ धमकियों और मानसिक दबाव से परेशान होकर खाया जहर
■ परिजनों का आरोप- दलालों और परिचितों ने किया धोखा
हरियाणा के Sonipat जिले में विदेश भेजने के नाम पर हुई कथित ठगी ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। गांव झरोठी के 31 वर्षीय युवक रोहित की जहरीला पदार्थ खाने से मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि करीब 50 लाख रुपए की ठगी, लगातार दबाव और धमकियों के कारण वह मानसिक रूप से टूट चुका था। घटना के बाद परिवार ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे प्रदर्शन करेंगे।
परिजनों के अनुसार, रोहित ने अपने भाई को विदेश भेजने के लिए बड़ी रकम जुटाई थी। इसके लिए परिवार ने करीब एक एकड़ जमीन बेचकर लगभग एक करोड़ रुपए इकट्ठा किए थे, जिनमें से 50 लाख रुपए दलालों को दिए गए। आरोप है कि गांव के ही एक व्यक्ति ने दिल्ली पुलिस में तैनात एक शख्स के जरिए अमेरिका भेजने का भरोसा दिलाया था।
पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपियों ने पहले युवक को ब्राज़ील, फिर मुंबई और बाद में इथियोपिया भेजा, लेकिन अंत में अमेरिका भेजने के बजाय वापस भारत लौटा दिया। इस दौरान महीनों तक उसे अलग-अलग जगहों पर रोके रखा गया। पैसे वापस मांगने पर आरोपियों ने टालमटोल की और बाद में धमकियां देने लगे।
परिजनों के मुताबिक, लगातार दबाव के चलते रोहित गहरे मानसिक तनाव में था। उसने कई बार अपनी परेशानी जाहिर की थी। घटना से पहले उसने अपने ताऊ को फोन कर कहा था कि अब वह जिंदा नहीं रहेगा। इसके बाद 31 मार्च की रात वह छोटूराम चौक स्थित एक रेस्टोरेंट में अपने रिश्तेदार के साथ बैठा था, जहां उसने जहरीला पदार्थ खा लिया।
परिवार ने आरोप लगाया है कि उसके साथ मौजूद व्यक्ति ने उसे उकसाया और खुद जहर नहीं खाया। फिलहाल वह एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल में रखवाया है और परिजनों की शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
परिजनों ने साफ कहा है कि इस घटना के लिए दलालों और संबंधित लोगों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते पैसे वापस मिल जाते या दबाव नहीं बनाया जाता, तो यह घटना टाली जा सकती थी। मामले ने एक बार फिर विदेश भेजने के नाम पर हो रही ठगी और उससे जुड़े खतरों को उजागर कर दिया है।
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