न्यूट्रिमेड कंपनी का इंफेंट मिल्क पाउडर फेल, बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा

फरीदाबाद IMT की न्यूट्रिमेड हेल्थ केयर कंपनी का इंफेंट मिल्क पाउडर फूड एंड सेफ्टी विभाग की जांच में असुरक्षित पाया गया। विभाग ने कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा, जबकि कंपनी ने विदेशी साजिश का आरोप लगाया।

न्यूट्रिमेड कंपनी का इंफेंट मिल्क पाउडर फेल, बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा

IMT फरीदाबाद स्थित न्यूट्रिमेड हेल्थ केयर कंपनी का इंफेंट मिल्क पाउडर असुरक्षित पाया गया
फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट की जांच रिपोर्ट में खुलासा, बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा
कंपनी ने विदेशी कंपनियों की साजिश बताई, दोबारा जांच की मांग की


हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्र IMT फरीदाबाद में स्थित न्यूट्रिमेड हेल्थ केयर कंपनी के बनाए गए इंफेंट मिल्क पाउडर को लेकर बड़ी कार्रवाई हुई है। फूड एंड सेफ्टी विभाग की जांच रिपोर्ट में यह उत्पाद अनसेफ (Unsafe) घोषित किया गया है। यह वही दूध पाउडर है जो छह महीने तक के शिशुओं को दिया जाता है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस पाउडर में आयोडीन और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक तथा पेंटोनिक एसिड की मात्रा बेहद कम पाई गई है। इससे थायराइड, डायरिया, ओवरवेट और किडनी-लिवर से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

जांच रिपोर्ट के बाद विभाग ने कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब कंपनी को जांच में शामिल किया जाएगा। फूड एंड सेफ्टी विभाग के डेजिनेटेड ऑफिसर डॉ. पृथ्वी सिंह ने बताया कि दीवाली से करीब 20 दिन पहले विभाग ने कुल 67 सैंपल लिए थे, जिनमें से 18 की रिपोर्ट आई है। इनमें तीन सैंपल फेल हुए — जिनमें न्यूट्रिमेड कंपनी का इंफेंट मिल्क पाउडर भी शामिल है।

उन्होंने बताया कि रिपोर्ट करनाल लैब से तैयार होकर आई थी। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पाउडर के पैक पर जो मात्रा और कंटेंट लिखे गए थे, वे वास्तविक जांच परिणामों से मेल नहीं खाते। इसके चलते कंपनी को 30 दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है।

यह रिपोर्ट सामने आने के बाद अभिभावकों में गंभीर चिंता पैदा हो गई है। छह महीने से कम उम्र के बच्चे पहले से ही कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले होते हैं और दूषित मिल्क पाउडर उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। पिछले महीनों में देश के अन्य राज्यों जैसे मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी कुछ कफ सिरप कंपनियों की लापरवाही से कई बच्चों की जान जा चुकी है, जिसके चलते यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है।

कंपनी के मालिक टीएन तिवारी ने अपनी सफाई में कहा कि यह पूरी तरह विदेशी कंपनियों की साजिश है, क्योंकि उनकी कंपनी भारत की इकलौती ऐसी देसी कंपनी है जो मल्टीनेशनल ब्रांड्स को टक्कर दे रही है। उन्होंने दावा किया कि “सैंपल का फेल होना सामान्य प्रक्रिया है, और रिपोर्ट आने तक संबंधित बैच बाजार में नहीं भेजा जाता।” उन्होंने विभाग से दोबारा जांच कराने की अपील भी की है।

टीएन तिवारी मूल रूप से बिहार के निवासी हैं और पिछले 40 सालों से हरियाणा में रह रहे हैं। उन्होंने NDRI करनाल से डेयरी टेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन की डिग्री ली है और बाद में डेयरी प्रोडक्ट्स पर डॉक्टरेट भी की है। 2011 में उन्होंने IMT फरीदाबाद में न्यूट्रिमेड कंपनी की शुरुआत की थी, जो अब देश के साथ-साथ 20 देशों में एक्सपोर्ट करती है।

फिलहाल, फूड एंड सेफ्टी विभाग ने कंपनी को चेतावनी दी है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित बैच के उत्पाद बाजार से हटाए जाएं। प्रशासन का कहना है कि अगर जवाब असंतोषजनक रहा, तो कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।