हरियाणा में शिक्षकों की ट्रांसफर भी आनलाइन, दीपावली से पहले शिक्षकों को तोहफा देने की तैयारी में सैणी सरकार
हरियाणा में शिक्षकों की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव को सीएम नायब सैनी ने मंजूरी दी है। कपल केस और गंभीर बीमारियों को विशेष अंक मिलेंगे। दीपावली से पहले शिक्षकों को ट्रांसफर का तोहफा मिल सकता है।
➤ सीएम नायब सैनी ने हरियाणा की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को दी मंजूरी
➤ कपल केस, गंभीर बीमारियों और दिव्यांगजनों को मिलेगा विशेष लाभ
➤ दीपावली से पहले शिक्षकों को ट्रांसफर का तोहफा मिलने की संभावना
हरियाणा में लंबे समय से शिक्षकों द्वारा प्रतीक्षित ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी (OTP) में बड़े बदलाव की मंजूरी मुख्यमंत्री नायब सैनी ने दे दी है। शिक्षा निदेशालय की ओर से तैयार संशोधित प्रस्ताव को मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए मानव संसाधन विभाग को भेजा गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार इस बार दीपावली से पहले शिक्षकों को ऑनलाइन ट्रांसफर का तोहफा दे सकती है। इसके लिए जल्द ही पोर्टल लॉन्च होगा और उससे पहले शिक्षकों से आपत्तियां व सुझाव भी लिए जाएंगे।
संशोधित पॉलिसी के तहत इस बार पति-पत्नी (कपल केस) में अतिरिक्त अंक देने का प्रावधान जोड़ा गया है। वहीं, जिन शिक्षकों पर माइनर या मेजर पेनल्टी लगी है, उसे भी स्कोरिंग सिस्टम में शामिल किया जाएगा। इस नीति का सबसे बड़ा उद्देश्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करना और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए ट्रांसफर करना है।
2016 में पहली बार लागू हुई इस पॉलिसी के बाद 2017, 2019 और 2022 में ही तबादले हुए थे। खास बात यह है कि जेबीटी शिक्षक 2016 से अब तक ट्रांसफर का इंतजार कर रहे हैं। पॉलिसी के मुताबिक हर साल ट्रांसफर होने चाहिए थे, लेकिन यह प्रक्रिया नियमित रूप से नहीं हो पाई।
पॉलिसी की मुख्य बातें
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80 अंकों की मेरिट तैयार होगी, जिसमें आयु के आधार पर अधिकतम 60 अंक और विशेष कारणों के लिए 20 अंक मिलेंगे। सभी महिला शिक्षकों को 10 अंक मिलेंगे।
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स्पेशल कैटेगरी में 40 साल से अधिक आयु की अविवाहित महिलाओं, विधवाओं, तलाकशुदा, अलग रह रही महिलाओं को 10 अंक दिए जाएंगे। इसी तरह तलाकशुदा या विधुर शिक्षकों को भी 10 अंक मिलेंगे।
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कपल केस में सरकारी कर्मचारियों के जीवनसाथी को 5 अंक और सेना या अर्धसैनिक बलों के जीवनसाथी को 10 अंक मिलेंगे।
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गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, हृदय रोग, लीवर सिरोसिस, किडनी फेल्योर, पार्किंसन, थैलेसीमिया, एड्स और अंग प्रत्यारोपण जैसी स्थितियों को भी पॉलिसी में शामिल किया गया है। इनका लाभ लेने के लिए मेडिकल बोर्ड से प्रमाणपत्र जरूरी होगा।
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15 साल तक एक ही ब्लॉक में कार्यरत शिक्षक आगे की ड्राइव में भाग लेने के लिए बाध्य होंगे।
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इस बार जोन या ब्लॉक की बजाय सीधे स्कूलों की चॉइस भरवाई जाएगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस पॉलिसी से न केवल शिक्षकों को सुविधा और पारदर्शिता मिलेगी बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षकों की संतुलित उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
Akhil Mahajan