हरियाणा बिजली निगम के कच्चे कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 6 हफ्ते में नियमित करने का आदेश

हरियाणा हाईकोर्ट ने बिजली निगमों में कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को 6 सप्ताह में नियमित करने का आदेश दिया। लगभग 3,500 कर्मचारियों को इस फैसले से राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार को अवमानना कार्यवाही की चेतावनी भी दी गई है।

हरियाणा बिजली निगम के कच्चे कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 6 हफ्ते में नियमित करने का आदेश

➤ बिजली निगम के कच्चे कर्मचारियों को 6 सप्ताह में नियमित करने का आदेश
➤ लगभग 3,500 कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद
➤ सरकार को कोर्ट के आदेश न मानने पर अवमानना की कार्रवाई का खतरा

हरियाणा में बिजली निगमों में लंबे समय से कार्यरत कच्चे कर्मचारियों के भविष्य को लेकर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से सरकार को निर्देश दिया है कि बिजली निगमों में तैनात ऐसे कर्मचारियों की नियमितीकरण प्रक्रिया को केवल 6 सप्ताह के अंदर पूरा किया जाए। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है, तो उसे अदालत की अवमानना कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा।

न्यायालय ने यह भी कहा कि कई ऐसे कर्मचारी हैं जो 1995 से लगातार अस्थायी आधार पर सेवा दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद इन्हें आज तक नियमित करने का कार्य नहीं किया गया। इन कर्मियों को पिछले 30 वर्षों में नौ बार न्यायालय का चक्कर लगाना पड़ा, जिससे वे मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान रहे।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने साफ शब्दों में कहा कि संवैधानिक नियोक्ता के तौर पर राज्य को अस्थायी बहानों के पीछे छिपकर इन कर्मचारियों का शोषण करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा नियमित पदों की कमी या योग्यता की आड़ में कर्मचारियों को अस्थायी बनाए रखना गलत है। इसके अलावा, जस्टिस बराड़ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समय सीमा के अंदर कोई आदेश पारित नहीं होता, तो ऐसे कर्मचारियों को पहले से नियमित किए जा चुके सहकर्मी वीर बहादुर के समान पूर्ण लाभ, वरिष्ठता और बकाया राशि के साथ नियमित मान लिया जाएगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल बाजार के हिस्से की तरह कर्मचारियों पर निर्भर रहकर बजट का संतुलन नहीं बनाया जा सकता। इसके बजाय राज्य संवैधानिक नियोक्ता होने के नाते इन कर्मियों की सेवा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि यह प्रथा न्याय में जनता के विश्वास को कमजोर करती है।

इस आदेश से लगभग ढाई से तीन हजार कर्मचारियों को राहत मिलने की संभावना है। सरकार के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी करते हुए जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने सभी राज्य संस्थाओं के लिए सात निर्देश भी जारी किए हैं, ताकि अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

हरियाणा सरकार के जवाब में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला कच्चे कर्मचारियों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश का पालन कितनी जल्दी करती है।