जासूसी मामले में मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति मल्होत्रा को हाईकोर्ट से झटका, नियमित जमानत याचिका खारिज़, अभी जेल में ही रहना होगा

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जासूसी मामले में मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति मल्होत्रा को हाईकोर्ट से झटका, नियमित जमानत याचिका खारिज़, अभी जेल में ही रहना होगा

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जासूसी आरोपी मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति मल्होत्रा की नियमित जमानत याचिका खारिज की
मई 2025 से जासूसी आरोप में जेल में बंद, फिलहाल नहीं मिलेगी राहत
पाकिस्तानी अधिकारी से संपर्क और संवेदनशील जानकारी साझा करने के आरोप


पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पाकिस्तान के लिए कथित जासूसी करने के आरोपों का सामना कर रही मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति मल्होत्रा को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल ज्योति को जेल में ही रहना होगा।

मामले की सुनवाई के दौरान ज्योति के वकील रविंद्र सिंह ढुल ने अदालत में दलील दी कि इस मामले में दर्ज एफआईआर का कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि ज्योति की चैट का पूरा रिकॉर्ड तलब किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। इस पर अदालत ने जांच अधिकारी को अगली सुनवाई में पूरा रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है।

ज्योति मल्होत्रा को मई 2025 में कथित जासूसी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। अपनी रिहाई के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने फिलहाल उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।

एफआईआर के अनुसार यह मामला मई 2025 में मिले इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के इनपुट से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि ज्योति मल्होत्रा वर्ष 2023 में नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में वीजा आवेदन के लिए गई थीं। वहीं उनकी मुलाकात पाकिस्तानी अधिकारी अहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से हुई थी।

जांच एजेंसियों का दावा है कि इस मुलाकात के बाद दोनों के बीच संपर्क बना रहा और भारत से संबंधित संवेदनशील सूचनाओं के आदान-प्रदान की आशंका है। इसी आधार पर उनके खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

हालांकि, ज्योति मल्होत्रा ने अपनी याचिका में इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वह एक पेशेवर ट्रैवल ब्लॉगर हैं और खुलेआम कैमरे के साथ कंटेंट शूट करती हैं। उनका कहना है कि जो भी सामग्री वह रिकॉर्ड करती हैं, उसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाता है, इसलिए उन्हें जासूस बताना तर्कसंगत नहीं है।

याचिका में यह भी कहा गया कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की जिन शर्तों के तहत मामला बनता है, जैसे किसी प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करना या संवेदनशील स्थान का स्केच या मॉडल तैयार करना, इस मामले में ऐसी कोई परिस्थिति सामने नहीं आई है।

ज्योति की ओर से अदालत में यह भी दलील दी गई कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 को इस मामले में लागू करना उचित नहीं है, क्योंकि कथित मुलाकात वर्ष 2023 में हुई थी, जबकि नई दंड संहिता बाद में लागू हुई। वहीं, पहले लागू धारा 124ए (राजद्रोह) के तहत कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्थगित कर चुका है।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि ज्योति अपने परिवार में बुजुर्ग पिता और बीमार ताऊ की एकमात्र देखभालकर्ता हैं, जो उम्र संबंधी बीमारियों और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। हालांकि इन दलीलों के बावजूद हाईकोर्ट ने फिलहाल उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया है और मामले की अगली सुनवाई में जांच से जुड़े रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं।