ऑनलाइन पेमेंट के लिए OTP खत्म होगा:बैंक-टेलीकॉम कंपनियां 'साइलेंट ऑथेंटिकेशन' लाएंगी; सिम-डिवाइस मैच नहीं हुए तो रुकेगा ट्रांजैक्शन
भारत में ऑनलाइन पेमेंट के लिए OTP सिस्टम खत्म हो सकता है, साइलेंट ऑथेंटिकेशन तकनीक से बिना OTP सुरक्षित ट्रांजैक्शन संभव होगा।
■ ऑनलाइन पेमेंट में बड़ा बदलाव, OTP सिस्टम खत्म होने की तैयारी
■ साइलेंट ऑथेंटिकेशन से बिना OTP होगा ट्रांजैक्शन
■ सिम-डिवाइस मैच नहीं हुआ तो तुरंत ब्लॉक होगा पेमेंट
देश में डिजिटल पेमेंट सिस्टम जल्द ही बड़े बदलाव के दौर से गुजरने वाला है। अब तक हर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए जरूरी रहा OTP (वन-टाइम पासवर्ड) आने वाले समय में खत्म हो सकता है। देश के बड़े प्राइवेट बैंक और टेलीकॉम कंपनियां मिलकर ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ तकनीक पर काम कर रही हैं, जिससे यूजर को बिना OTP डाले ही सुरक्षित पेमेंट करने की सुविधा मिलेगी।
इस नई तकनीक में सिस्टम खुद ही बैकग्राउंड में चेक करेगा कि बैंक ऐप में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और फोन में मौजूद सिम कार्ड मैच कर रहे हैं या नहीं। अगर दोनों में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक कर दिया जाएगा। इससे यूजर को कुछ भी करने की जरूरत नहीं होगी और पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक होगी।
फ्रॉड पर लगेगा ब्रेक
बैंकों का कहना है कि इस तकनीक से सिम क्लोनिंग, ई-सिम स्वैप और ऑनलाइन फ्रॉड जैसे मामलों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी। यह सिस्टम टेलीकॉम नेटवर्क से सीधे जुड़ा होगा, जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता चल जाएगा।
बैकग्राउंड में चलेगा पूरा सिस्टम
विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक OTP जैसी सुरक्षा परतें आसानी से हैक की जा सकती थीं, लेकिन नया सिस्टम नेटवर्क लेवल पर वेरिफिकेशन करेगा, जिसे न तो यूजर देख पाएगा और न ही हैकर एक्सेस कर पाएंगे। इसमें फेस ID, ऐप के अंदर कोड जनरेशन और बायोमेट्रिक जैसे अतिरिक्त सुरक्षा फीचर भी जोड़े जा रहे हैं।
RBI के नियम भी बदल रहे तस्वीर
Reserve Bank of India के नए नियमों के अनुसार अब सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य है। इसमें पासवर्ड, OTP या बायोमेट्रिक्स जैसे विकल्प शामिल हैं। हालांकि OTP को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है, लेकिन बैंकों को नए और सुरक्षित विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
WhatsApp से भी मिल सकता है OTP
भविष्य में OTP भेजने के लिए WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे ट्रांजैक्शन प्रोसेस तेज और आसान होगा।
कुल मिलाकर, यह बदलाव डिजिटल पेमेंट को ज्यादा सुरक्षित, तेज और यूजर-फ्रेंडली बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
Akhil Mahajan