AAP में बड़ा झटका, राघव चड्ढा हटे राज्यसभा डिप्टी लीडर पद से, अशोक मित्तल को कमान

AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा डिप्टी लीडर पद से हटाकर अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी दी है। यह फैसला उनकी चुप्पी और गैरहाजिरी के बीच लिया गया है।

AAP में बड़ा झटका, राघव चड्ढा हटे राज्यसभा डिप्टी लीडर पद से, अशोक मित्तल को कमान

पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी
चुप्पी और गैरहाजिरी पर उठे सवालों के बीच बड़ा फैसला


आम आदमी पार्टी (AAP) में एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव सामने आया है। पार्टी ने राज्यसभा में अपने डिप्टी लीडर पद से राघव चड्ढा को हटा दिया है और उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक, इस बदलाव को लेकर राज्यसभा सचिवालय को औपचारिक सूचना भी भेज दी गई है।

इस पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अब राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित नहीं किया जाएगा। यह संकेत देता है कि पार्टी ने संसदीय रणनीति में बड़ा बदलाव किया है और नए चेहरों को आगे लाने की तैयारी कर रही है।

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा की चुप्पी और पार्टी गतिविधियों से दूरी चर्चा का विषय बनी हुई थी। खास तौर पर दिल्ली आबकारी नीति केस में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत अन्य नेताओं को अदालत से राहत मिलने के बाद भी चड्ढा ने कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

इसके अलावा, वह पार्टी के कई अहम कार्यक्रमों में भी नजर नहीं आए। केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस और जंतर-मंतर पर आयोजित जनसभा जैसे बड़े आयोजनों से उनकी गैरहाजिरी ने पार्टी के अंदर संभावित मतभेदों की अटकलों को और हवा दी।

हालांकि, राघव चड्ढा पार्टी के पुराने और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं। वह 2012 से AAP के साथ जुड़े हुए हैं और पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वह पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के सदस्य भी हैं, जो पार्टी का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है।

चड्ढा राज्यसभा के सबसे युवा सदस्यों में से एक रहे हैं और उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष तथा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के सलाहकार के रूप में भी काम किया है। वर्तमान में वह पार्टी के पंजाब सह-प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब चड्ढा की पार्टी से दूरी को लेकर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी जब केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई थी, तब उन्होंने अपनी देरी से प्रतिक्रिया के लिए विदेश में आंखों के इलाज का हवाला दिया था। अब इस फैसले के बाद यह देखना अहम होगा कि पार्टी के अंदर क्या और बड़े बदलाव होते हैं और राघव चड्ढा की भूमिका भविष्य में किस तरह तय की जाती है।