हाईकोर्ट से राव नरेंद्र सिंह को राहत, सीडी कांड मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर स्टे

हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह को सीडी कांड मामले में हाईकोर्ट से राहत मिली है। नारनौल ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

हाईकोर्ट से राव नरेंद्र सिंह को राहत, सीडी कांड मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर स्टे

राव नरेंद्र सिंह को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
नारनौल ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर लगी रोक
सीडी कांड मामले में चार्जशीट को दी चुनौती


हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह को कथित सीडी कांड मामले में बड़ी राहत मिली है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नारनौल की ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह मामला गुरुवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हर्षाली चौधरी की अदालत में सूचीबद्ध था, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इस पर आगे की सुनवाई फिलहाल रुक गई है।

मामले में जानकारी के अनुसार, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) गुरुग्राम की ओर से ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी। इस चार्जशीट को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चार्जशीट पर सवाल उठने के मद्देनजर ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने का फैसला सुनाया।

क्या है पूरा सीडी कांड मामला
यह मामला पलवल की करीब 30 एकड़ जमीन के CLU (चेंज ऑफ लैंड यूज) के बदले कथित रूप से पैसों की मांग से जुड़े एक स्टिंग ऑपरेशन से संबंधित है। आरोप है कि इस स्टिंग में रिश्वत की बातचीत सामने आई थी, जिसने उस समय प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था।

स्टिंग ऑपरेशन और FIR का इतिहास
बताया जाता है कि वर्ष 2013 में धर्मेंद्र नामक व्यक्ति ने इस पूरे मामले का स्टिंग ऑपरेशन किया था। इसके बाद 2016 में इस संबंध में FIR दर्ज की गई। मामले को लेकर इनेलो नेता रामपाल माजरा ने लोकायुक्त में भी शिकायत दी थी। हाल ही में इनेलो द्वारा इस मामले से जुड़ी सीडी को सार्वजनिक करते हुए चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की गई थी, जिससे मामला फिर चर्चा में आ गया।

वकील ने दी जानकारी
राव नरेंद्र सिंह के वकील ओपी यादव ने बताया कि चार्जशीट को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। इसी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई हाईकोर्ट में होगी, जहां आगे की दिशा तय की जाएगी।

यह फैसला राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले यह मामला तेजी से आगे बढ़ रहा था। अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पूरे केस की दिशा बदल सकती है।