पानीपत कोर्ट में फर्जी जमानत रैकेट का पर्दाफाश, नकली आधार से कराते थे आरोपियों की जमानत

पानीपत कोर्ट में फर्जी जमानत रैकेट का खुलासा हुआ। नकली आधार और दस्तावेजों से जमानत कराने पर दो FIR दर्ज, UIDAI जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।

पानीपत कोर्ट में फर्जी जमानत रैकेट का पर्दाफाश, नकली आधार से कराते थे आरोपियों की जमानत

पानीपत कोर्ट में फर्जी जमानत रैकेट का खुलासा, दो FIR दर्ज
➤ नकली आधार और दस्तावेजों से आरोपियों की जमानत कराने का खेल
➤ UIDAI जांच में फर्जी आधार पकड़ा, यूपी की जमीन कुर्क करने के निर्देश

पानीपत की अदालतों में फर्जी दस्तावेज, कूटरचित आधार कार्ड और नाम बदलकर आरोपियों की जमानत कराने वाले रैकेट का खुलासा हुआ है। कोर्ट में पेश किए गए आधार कार्डों की UIDAI से जांच कराए जाने पर उनके फर्जी होने की पुष्टि हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पानीपत की दो अलग-अलग अदालतों ने फर्जी जमानतियों, गवाहों और फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर तुरंत दो अलग-अलग मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कोर्ट में फर्जी कागजात लगाकर जमानत कराने का सामने आया पूरा खेल

मामले में सामने आया है कि आरोपियों को जमानत दिलाने के लिए असली लोगों के नाम, आधार कार्ड, संपत्ति के दस्तावेज और अन्य कागजात का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। कुछ मामलों में ऐसे लोगों को जमानती के तौर पर पेश किया गया, जिन्हें बाद में कोर्ट में पेश होकर यह बताना पड़ा कि उन्होंने संबंधित आरोपी की जमानत ली ही नहीं थी।

अदालतों की जांच में दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने के बाद संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराई गई। इसके बाद फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं। कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों के साथ-साथ जमानत कराने में मदद करने वाले अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

पहला मामला: आरोपी राहुल की जमानत में फर्जी आधार और दस्तावेज लगाए

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) अंबरदीप सिंह की कोर्ट से प्राप्त आदेश के अनुसार, रेप मामले का आरोपी राहुल कोर्ट से जमानत मिलने के बाद से गैरहाजिर चल रहा है। उसकी जमानत पहले ही रद्द की जा चुकी है।

आरोपी राहुल की जमानत लेने वाले दो जमानतियों में से एक राम किशन निवासी गांव डाहर, पानीपत को कोर्ट की ओर से नोटिस भेजा गया। नोटिस मिलने के बाद राम किशन कोर्ट में पेश हुआ और उसने लिखित बयान देकर कहा कि उसने राहुल की कोई जमानत नहीं ली है।

राम किशन के दस्तावेजों के दुरुपयोग का दावा

राम किशन ने कोर्ट को बताया कि किसी अज्ञात फर्जी व्यक्ति ने उसके संपत्ति के कागजात और आधार कार्ड में हेरफेर कर उनका दुरुपयोग किया है। इस मामले में पहचान करने वाला पंच रोहताश भी संदिग्ध पाया गया।

कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए पाया कि आरोपी राहुल गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपा हुआ है। उसके खिलाफ धारा 84(2)(i) बीएनएसएस के तहत उद्घोषणा जारी की गई है।

इसके साथ ही अदालत ने फर्जी जमानती और पंच रोहताश के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।

दूसरा मामला: UIDAI जांच में फर्जी आधार कार्ड का खुलासा

दूसरा मामला JMIC विकास वर्मा की अदालत में चल रहे मुकदमे स्टेट बनाम शीलू आदि से जुड़ा है। इस मामले में भगोड़ा घोषित आरोपी सौरभ निवासी शामली, हाल निवासी सेक्टर-12, पानीपत की जमानत कराने में फर्जीवाड़ा सामने आया।

इस मामले में करनाल निवासी शुभम पुत्र श्याम सिंह खुद कोर्ट में पेश हुआ। उसने बताया कि 29 अगस्त 2022 को किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसके नाम का इस्तेमाल करते हुए फर्जी आधार कार्ड और वाहन की आरसी लगाकर भगोड़े आरोपी सौरभ की फर्जी जमानत दी थी।

UIDAI रिपोर्ट में आधार कार्ड पूरी तरह फर्जी निकला

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने UIDAI के अनुभाग अधिकारी से रिपोर्ट मांगी थी। 12 मार्च 2026 को प्राप्त रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जमानत याचिका के साथ संलग्न किया गया आधार कार्ड पूरी तरह फर्जी और अमान्य था।

जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी जमानती की पहचान करने वाले राज कुमार निवासी गांव कुराड़, पानीपत की मृत्यु हो चुकी है। मामले की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद कोर्ट ने असली शुभम को मामले से बरी कर दिया।

भगोड़े आरोपी की यूपी में जमीन कुर्क करने के लिए वारंट

दूसरे मामले में कोर्ट ने भगोड़े आरोपी सौरभ के खिलाफ संपत्ति कुर्की की कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। सौरभ की मुजफ्फरनगर (यूपी) के गांव फतेहपुर खेड़ी में मौजूद 0.0047 हेक्टेयर जमीन को धारा 83 क्रिमिनल प्रोसीजर कोड के तहत कुर्क करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट मुजफ्फरनगर को वारंट जारी किया गया है।

इस कार्रवाई का उद्देश्य फरार आरोपी के खिलाफ अदालत की ओर से जारी कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। वहीं, फर्जी जमानत के जरिए कोर्ट की प्रक्रिया को प्रभावित करने के मामले में अलग से पुलिस जांच जारी है।

फर्जी जमानती गिरोह और दलालों की तलाश में जुटी पुलिस

दोनों मामलों में कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच का फोकस उन लोगों पर है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए, दूसरे लोगों के पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और आरोपियों की जमानत कराने में मदद की।

पानीपत पुलिस अज्ञात बहुरूपियों, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और उनसे जुड़े दलालों की तलाश में जुट गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इससे पहले भी इस तरह के प्रोफेशनल जमानतियों के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी हैं। ऐसे में दोनों मामलों की जांच के दौरान यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं इन मामलों के पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।

कोर्ट के आदेश के बाद दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज

पानीपत की दो अलग-अलग अदालतों से मिले आदेशों के बाद सिटी थाना पुलिस ने दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं। अब पुलिस दस्तावेजों की जांच, संबंधित लोगों से पूछताछ और फर्जी जमानत प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।

मामले ने अदालतों में जमानत प्रक्रिया के दौरान पेश किए जाने वाले पहचान और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि फर्जी जमानत के इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और आरोपियों को जमानत दिलाने के लिए किस स्तर तक दस्तावेजों में हेरफेर किया गया।