सिरसा जेल में तैनात वार्डन ने खाया सल्फास, मौत से हड़कंप, सुसाइड नोट में DSP-LO पर गंभीर आरोप, केस दर्ज
हरियाणा के सिरसा जिला जेल में वार्डन सुखदेव सिंह ने सल्फास खाकर आत्महत्या की। सुसाइड नोट में DSP और लाइन ऑफिसर पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगे हैं।
➤ सिरसा जिला जेल के वार्डन ने सल्फास खाकर की आत्महत्या
➤ दो सुसाइड नोट में DSP और लाइन ऑफिसर पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप
➤ बेटे की शिकायत पर DSP और LO के खिलाफ केस दर्ज, जांच शुरू
सिरसा। हरियाणा के सिरसा जिला जेल से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां तैनात वार्डन सुखदेव सिंह ने सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उन्होंने दो सुसाइड नोट छोड़े, जिनमें DSP और लाइन ऑफिसर पर ड्यूटी को लेकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं।
सुखदेव सिंह ने आत्महत्या से पहले अपने बेटे जसपाल को फोन कर बताया कि वह अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने बेटे से कहा कि उनके बैग में जेल महानिदेशक और जेल सुपरिंटेंडेंट के नाम सुसाइड नोट है और वह इन “दरिंदों” से हार गए हैं।
बेटे की शिकायत के आधार पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने DSP वरुण गोदारा और लाइन ऑफिसर फूल कुमार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। SP दीपक सहारण ने कहा है कि सुसाइड नोट में जिन अधिकारियों के नाम हैं, उनकी भूमिका की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
परिजनों के मुताबिक सुखदेव सिंह पिछले छह साल से दिल की बीमारी से पीड़ित थे और उनके दिल में दो स्टंट डले हुए थे। आरोप है कि 14 दिसंबर को ड्यूटी को लेकर विवाद के बाद से ही उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा था। 31 दिसंबर को भी अधिकारियों से बहस हुई, जिसके बाद नशे के शक में उनका मेडिकल कराया गया।
सुसाइड नोट में सुखदेव सिंह ने लिखा कि उन्होंने नए साल पर जेल सुपरिंटेंडेंट के सामने और पूरी गार्ड के सामने माफी मांगी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें ड्यूटी पर नहीं लिया गया और पूरा दिन खड़ा रखा गया। उन्होंने लिखा कि 15 दिन से लगातार प्रताड़ना के चलते वह टूट चुके हैं और इसी वजह से आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं।
मामले के बाद हुडा चौकी में वार्डन के परिवार और जेल कर्मचारियों में भारी रोष देखा गया। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों, सुसाइड नोट और कॉल डिटेल्स के आधार पर जांच की जा रही है।
Akhil Mahajan