CBI ने हरियाणा के IAS अधिकारी आरके सिंह को किया गिरफ्तार, जानें क्‍या है मामला

पंचकूला नगर निगम के ₹79.46 करोड़ फंड गबन मामले में CBI ने IAS अधिकारी राम कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है। अधिकारी को अप्रैल में हरियाणा सरकार पहले ही सस्पेंड कर चुकी थी।

CBI ने हरियाणा के IAS अधिकारी आरके सिंह को किया गिरफ्तार, जानें क्‍या है मामला

➤ पंचकूला नगर निगम के ₹79.46 करोड़ फंड गबन मामले में IAS आरके सिंह गिरफ्तार

➤ CBI का आरोप- सरकारी राशि शेल कंपनियों के खातों तक पहुंचाई गई

➤ 2 महीने पहले हरियाणा सरकार ने अधिकारी को किया था सस्पेंड


हरियाणा के वरिष्ठ IAS अधिकारी राम कुमार सिंह को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पंचकूला नगर निगम से जुड़े 79.46 करोड़ रुपए के कथित फंड गबन मामले में गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई उस बैंकिंग धोखाधड़ी मामले में हुई है, जिसकी जांच फरवरी 2026 से चल रही है।

सीबीआई के अनुसार, यह मामला विभिन्न सरकारी विभागों के बैंक खातों और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी फंड को निजी बैंकों के माध्यम से शेल कंपनियों के खातों तक पहुंचाया गया।

जांच में सामने आया कि कई सरकारी विभागों के खाते IDFC First Bank, AU Small Finance Bank और Kotak Mahindra Bank जैसी निजी बैंक शाखाओं में खोले गए थे। बाद में इन खातों के जरिए सरकारी राशि संदिग्ध कंपनियों तक पहुंचाई गई।

सीबीआई के अनुसार, पंचकूला नगर निगम का खाता IDFC First Bank की सेक्टर-32 शाखा में संचालित था। जांच एजेंसी का आरोप है कि खाते से जुड़े दस्तावेजों में जानबूझकर ऐसी प्रविष्टियां की गईं, जिनसे बाद में किए गए कथित फर्जी लेनदेन को छिपाया जा सके।

मामले की जांच के दौरान उस समय के नगर निगम आयुक्त रहे राम कुमार सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। इसी आधार पर सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया है।

मामला सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने 9 अप्रैल 2026 को राम कुमार सिंह को निलंबित कर दिया था। सस्पेंशन के समय वह राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव तथा पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMDA) में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर तैनात थे।

इससे पहले वह जुलाई 2025 से जनवरी 2026 तक पंचकूला नगर निगम के आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार संभाल चुके थे। सीबीआई इस पूरे मामले में बैंक अधिकारियों, निजी कंपनियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी फंड किस प्रक्रिया के तहत ट्रांसफर किया गया और कथित घोटाले से जुड़े नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था।

मामले को हरियाणा के हालिया वर्षों के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है। अब जांच एजेंसियों की नजर धन के प्रवाह, शेल कंपनियों और संबंधित दस्तावेजों पर है।