रेलूराम हत्याकांड में दोषी बेटी सोनिया जेल से रिहा

रेलूराम पूनिया हत्याकांड में दोषी बेटी सोनिया को करनाल जिला जेल से रिहा किया गया। रिहाई के बाद हिसार में परिजनों की सुरक्षा बढ़ाई गई है।

रेलूराम हत्याकांड में दोषी बेटी सोनिया जेल से रिहा

• रेलूराम हत्याकांड में दोषी बेटी सोनिया जेल से रिहा
• बिना बात किए काली स्कॉर्पियो में बैठकर रवाना
• रिहाई के बाद हिसार में परिजनों की सुरक्षा बढ़ी



हरियाणा के चर्चित पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया हत्याकांड में दोषी छोटी बेटी सोनिया को मंगलवार को करनाल जिला जेल से रिहा कर दिया गया। सोनिया दोपहर के समय जेल से बाहर निकली। उसने काले रंग की हुडी पहन रखी थी और किसी से कोई बातचीत किए बिना सीधे काले रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी में बैठकर चली गई।

जानकारी के अनुसार, परिवार की ओर से हिसार कोर्ट में एक लाख रुपए का बेल बॉन्ड भरा गया था। इसके बाद सोनिया की रिहाई की प्रक्रिया पूरी हुई। इससे पहले 13 दिसंबर को सोनिया के पति संजीव को भी अंतरिम जमानत पर जेल से रिहा किया जा चुका है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 11 दिसंबर को सोनिया और संजीव को अंतरिम जमानत दी थी। दोनों पर 23 अगस्त 2001 को हिसार के लितानी गांव में जमीन-जायदाद के विवाद में परिवार के आठ लोगों की हत्या करने का आरोप है।

संजीव की रिहाई के बाद हिसार में रेलूराम पूनिया की कोठी के बाहर संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। रेलूराम के भतीजे नवीन पूनिया ने बताया कि दो एसयूवी गाड़ियों में हथियारों से लैस युवक कोठी के बाहर देखे गए। एक युवक गाड़ी से उतरकर रेकी करता हुआ सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। उसके पास पिस्तौल भी दिखाई दी।

कोठी के बाहर पुलिस और गार्ड की मौजूदगी देखकर संदिग्ध युवक गाड़ी मोड़कर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद से परिवार में दहशत का माहौल है। 14 दिसंबर को सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद परिवार ने पुलिस को शिकायत दी थी।

सुरक्षा की मांग के बाद उकलाना थाना पुलिस ने रेलूराम की कोठी के अंदर डायल 112 को स्थायी रूप से तैनात किया है। फिलहाल रेलूराम के भाई राम सिंह के दो बेटे इसी कोठी में रह रहे हैं।

रेलूराम पूनिया हत्याकांड को हरियाणा के सबसे क्रूर मामलों में गिना जाता है। 23 अगस्त 2001 की रात लितानी गांव स्थित फार्महाउस में लोहे की रॉड और डंडों से पूरे परिवार की बेरहमी से हत्या की गई थी। इस हमले में पूर्व विधायक रेलूराम, उनकी पत्नी, बेटा, बहू, पोता, पोती और एक अन्य बच्चा मारा गया था।

जांच में सामने आया था कि सोनिया ने अपने 19वें जन्मदिन पर अपने पति संजीव के साथ मिलकर इस हत्याकांड की साजिश रची थी। हत्या के पीछे जमीन और संपत्ति का विवाद मुख्य वजह बताया गया था। पुलिस पूछताछ में सोनिया ने अपना जुर्म कबूल किया था।

साल 2004 में अदालत ने सोनिया और संजीव को फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में यह सजा उम्रकैद में बदली गई। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में लंबे कानूनी सफर के बाद दोनों की सजा उम्रकैद में तब्दील हुई।

राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि अंतरिम जमानत के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। सरकारी वकील ने बताया कि जेल रिकॉर्ड में सोनिया के खिलाफ 17 और संजीव के खिलाफ 7 बार झगड़े दर्ज हैं।