शिवलिंग से लिपटा मिला काला नाग: कुरुक्षेत्र के संगमेश्वर धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, VIDEO वायरल

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शिवलिंग से लिपटा मिला काला नाग: कुरुक्षेत्र के संगमेश्वर धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, VIDEO वायरल

➤ संगमेश्वर महादेव धाम में शिवलिंग पर लिपटा मिला काला नाग

➤ फुंकार की आवाज सुनकर पुजारी और सेवादार हुए हैरान

➤ सूचना फैलते ही मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़


कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक संगमेश्वर महादेव धाम में सोमवार तड़के एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं को आश्चर्य और आस्था से भर दिया। मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग पर एक काला नाग लिपटा हुआ दिखाई दिया। घटना की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे और देखते ही देखते परिसर में भीड़ उमड़ पड़ी।

शिवलिंग पर बैठा नाग। यहां हर समय गंगाजल से अभिषेक होता रहता है।

जानकारी के अनुसार रोजाना की तरह सुबह आरती की तैयारी के लिए पुजारी और सेवादार मंदिर पहुंचे थे। जैसे ही गर्भगृह के कपाट खोले गए, वहां रखे कंबल के नीचे से फुंकारने की आवाज सुनाई दी। जब सावधानी के साथ कंबल हटाया गया तो शिवलिंग पर काला नाग बैठा दिखाई दिया।

मंदिर प्रबंधन के अनुसार करीब आधे घंटे तक नाग शिवलिंग के पास मौजूद रहा। बाद में भीड़ बढ़ने पर वह वहां से चला गया। इसके बाद श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना लगातार जारी रहा और लोगों ने इसे आस्था से जुड़ी विशेष घटना बताया।

मान्यता है कि संगमेश्वर महादेव धाम में मिला शिवलिंग प्राचीन काल से आस्था का केंद्र है, जिस पर 1946 में वर्तमान मंदिर का निर्माण हुआ।

मंदिर के सेवादल मैनेजर भूषण गौतम ने बताया कि इस घटना की सूचना तुरंत मंदिर प्रबंधन, महंत विश्वनाथ गिरी और अन्य संतों को दी गई। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में पहले भी नाग दिखाई देते रहे हैं, लेकिन वर्षों बाद शिवलिंग पर इस तरह नाग के दर्शन हुए हैं। खास बात यह है कि अब तक किसी श्रद्धालु को नाग ने कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।

संगमेश्वर महादेव धाम से जुड़ी धार्मिक मान्यता भी इस घटना को विशेष बनाती है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में महात्मा गणेश गिरि को झाड़ियों और दीमक के ढेर के बीच एक दिव्य शिवलिंग मिला था। जब शिवलिंग को दूसरे स्थान पर स्थापित करने का प्रयास किया गया तो उसका अंतिम छोर नहीं मिला। उसी रात भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन देकर उसी स्थान पर मंदिर बनाने का निर्देश दिया था।

नाग के जाने के बाद काफी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और पूजा की।

मान्यता के अनुसार अगले दिन शिवलिंग पर भी एक काला नाग लिपटा हुआ मिला था। इसके बाद वहीं मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया और वर्ष 1946 में वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया गया। यह धाम सरस्वती और अरुणा नदी के संगम स्थल पर स्थित है और लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां स्थित पार्थेश्वर शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है। यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर परिसर से जुड़ी कई अन्य मान्यताएं भी प्रचलित हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां दूध को बिलोकर मक्खन नहीं निकाला जा सकता और यदि कोई ऐसा प्रयास करता है तो दूध खराब हो जाता है। इसके अलावा परिसर में चारपाई या खाट का उपयोग भी नहीं किया जाता।

संगमेश्वर महादेव मंदिर का संचालन श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी द्वारा किया जाता है। सावन मास में यहां विशेष श्रृंगार और धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।