डंपिंग यार्ड पर बढ़ा तनाव, धरना हटाने पहुंचे प्रशासन को ग्रामीणों ने लौटाया
कैथल में डंपिंग यार्ड बंद कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों का धरना जारी है। प्रशासन समझाने पहुंचा, लेकिन वार्ता बेनतीजा रही और तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
कैथल के डंपिंग यार्ड पर धरना हटाने पहुंचा प्रशासन, ग्रामीणों ने हटने से किया इनकार
• ग्रामीण बोले- बीमारी से मरने से बेहतर गोली खाना मंजूर, जबरदस्ती हुई तो सड़क पर बैठेंगे
• एक सप्ताह से डंपिंग यार्ड पर ताला, शहर का 85 टन कचरा करनाल भेजा जा रहा
कैथल के खुराना रोड स्थित कचरा डंपिंग यार्ड पर बुधवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ धरना खत्म करवाने और यार्ड का ताला खुलवाने पहुंच गया। मौके पर एसडीएम, दो डीएसपी, एसएचओ, नगर परिषद के अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे।
प्रशासनिक अधिकारियों ने करीब एक घंटे तक ग्रामीणों को समझाने और डंपिंग यार्ड का ताला खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। लंबी बातचीत के बावजूद कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद अधिकारी ग्रामीणों को एक घंटे का समय देकर वापस लौट गए।
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपना विरोध जताते हुए कहा कि यदि कोई अधिकारी डंपिंग यार्ड के पास अपना घर बनाना चाहता है तो वे उसे 400 गज जमीन मुफ्त में देने को तैयार हैं। ग्रामीणों का कहना था कि तभी अधिकारियों को यहां रहने वाले लोगों की परेशानियों का अंदाजा होगा।
ग्रामीण दिलबाग मलिक, गुरदयाल सिंह, नरेश, ईश्वर सिंह, शमशेर, गुरदीप सिंह, अंग्रेज सिंह और सुरेंद्र ने कहा कि डंपिंग यार्ड के कारण उनके बच्चों के रिश्ते तक आने बंद हो गए हैं। लोगों का कहना होता है कि वे अपनी बेटियों को ऐसी जगह क्यों भेजें, जहां हर समय बदबू और मक्खियों का प्रकोप रहता हो।
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि वे डंपिंग यार्ड बंद होने तक धरना समाप्त नहीं करेंगे। उनका कहना है कि अगर प्रशासन जबरदस्ती उन्हें हटाने का प्रयास करेगा तो वे धरना स्थल से उठकर सड़क पर बैठ जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे गोली से मरना पसंद करेंगे, लेकिन बीमारियों से नहीं मरना चाहते।
बता दें कि डंपिंग यार्ड के आसपास स्थित करीब एक दर्जन गांवों के लोग पिछले एक सप्ताह से यहां ताला लगाकर धरना दे रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि डंपिंग यार्ड को पूरी तरह बंद किया जाए और यहां जमा कचरे का उठान कराया जाए।
डंपिंग यार्ड बंद होने का असर अब शहर की सफाई व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कैथल शहर का कचरा फिलहाल करनाल के डंपिंग यार्ड में भेजा जा रहा है। इससे कर्मचारियों को पहले शहर से गीला और सूखा कचरा एकत्रित करना पड़ता है और फिर उसे करनाल पहुंचाना पड़ता है। इससे सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
नगर परिषद के आंकड़ों के अनुसार, शहर से प्रतिदिन करीब 85 टन कचरा निकलता है। पहले यह कचरा सीधे डंपिंग यार्ड में पहुंचाया जाता था, लेकिन तालाबंदी के बाद कचरा वाहनों की एंट्री बंद हो गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि डंपिंग यार्ड के कारण आसपास के गांवों और किसानों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कचरे से उड़ने वाली गंदी पॉलिथीन खेतों और घरों तक पहुंच जाती हैं। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में बदबू का माहौल बना रहता है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि डंपिंग यार्ड के पास से नहरी पानी की सप्लाई की माइनर गुजरती है, जिसमें अक्सर गंदगी दिखाई देती है। इससे आसपास के गांवों में दूषित पानी पहुंचने का खतरा बना रहता है। उनका कहना है कि यहां केवल कैथल ही नहीं बल्कि चीका और सीवन क्षेत्र का कचरा भी लाकर डाला जाता है।
डंपिंग यार्ड से प्रभावित गांवों में कुलतारण, खुराना, कालू वाली गामड़ी, डेरा गदला और डोहर समेत कई गांव शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला।
इस मामले में कैथल एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि प्रशासन ग्रामीणों को समझाने के लिए मौके पर गया था, लेकिन वे नहीं माने। अब प्रशासन इस समस्या का कोई अन्य समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है।
pooja