पंचकूला में कांग्रेस की कलह उजागर, 4 नेताओं को नोटिस चुनाव से पहले पार्टी में खींचतान,
पंचकूला में नगर निगम चुनाव से पहले कांग्रेस में फूट सामने आई है। MLA चंद्रमोहन की शिकायत पर उपिंद्र कौर समेत 4 नेताओं को नोटिस देकर 7 दिन में जवाब मांगा गया है।
■ नगर निगम चुनाव से पहले पंचकूला कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी खींचतान
■ MLA चंद्रमोहन की शिकायत पर उपिंद्र कौर समेत 4 नेताओं को नोटिस
■ 7 दिन में जवाब तलब, संभावित उम्मीदवारों की राह पर असर
पंचकूला में नगर निगम चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर एक बार फिर अंदरूनी फूट खुलकर सामने आ गई है। पार्टी की अनुशासन समिति ने कांग्रेस विधायक चंद्रमोहन की शिकायत पर पूर्व मेयर प्रत्याशी उपिंद्र कौर आहलूवालिया, उनके पति और दो अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया है। सभी को जवाब देने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है, जिससे स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि यह शिकायत वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद दर्ज करवाई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ नेताओं ने चुनाव के दौरान पार्टी लाइन के खिलाफ काम किया। हालांकि, अब करीब डेढ़ साल बाद और वह भी नगर निगम चुनाव से ठीक पहले नोटिस जारी होने से समय और मंशा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
नोटिस मिलने वालों में पूर्व मेयर प्रत्याशी उपिंद्र कौर आहलूवालिया और उनके पति धनेंद्र वालिया के अलावा कांग्रेस नेता रविंद्र रावल और उनके भाई नरेश रावल शामिल हैं। यह सभी नेता नगर निगम चुनाव में संभावित उम्मीदवारों की दौड़ में माने जा रहे थे, ऐसे में इस कार्रवाई को उनकी राजनीतिक राह में बाधा के तौर पर भी देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि उपिंद्र कौर साल 2020 में कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी रह चुकी हैं और इससे पहले भी नगर निगम की मेयर रह चुकी हैं। उनका परिवार पहले कुमारी सैलजा गुट से जुड़ा रहा, जबकि बाद में उनकी नजदीकियां हुड्डा परिवार से भी रहीं। फिलहाल दोनों गुटों से दूरी की स्थिति बताई जा रही है।
वहीं रविंद्र रावल, जो नगर परिषद पंचकूला के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं, कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने नगर निगम चुनाव को लेकर कोर्ट में दो याचिकाएं भी दायर की हैं, जिनमें EVM के साथ VVPAT जोड़ने और वार्डबंदी को चुनौती दी गई है। इन याचिकाओं पर 6 अप्रैल को सुनवाई प्रस्तावित है।
रावल को हुड्डा परिवार का करीबी माना जाता है और पार्टी गतिविधियों में उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है। नोटिस मिलने के बाद उन्होंने कहा कि वे पार्टी के प्रति निष्ठावान सिपाही हैं और समिति के नोटिस का जवाब देंगे। वहीं धनेंद्र वालिया ने भी कहा कि वे नोटिस का अध्ययन करने के बाद ही कोई निर्णय लेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पंचकूला कांग्रेस में अंदरूनी राजनीति चरम पर पहुंच गई है। चुनाव से पहले उठे इस विवाद ने पार्टी के भीतर एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और इसका सीधा असर चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।
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