हांसी के जवान दीपक गोयत ने देश के लिए दी शहादत
हांसी के कापड़ो गांव निवासी हवलदार दीपक गोयत का दिल्ली के आर्मी अस्पताल में निधन हो गया। 21 ग्रेनेडियर में तैनात जवान ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। गांव में उन्हें सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
➤ हांसी के कापड़ो गांव के हवलदार दीपक गोयत का दिल्ली में निधन
➤ ब्लड कैंसर से जूझते हुए 21 ग्रेनेडियर में तैनात जवान ने दी शहादत
➤ गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई, हर आंख नम
हरियाणा के हांसी क्षेत्र के गांव कापड़ो निवासी 29 वर्षीय हवलदार दीपक गोयत ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। सोमवार को दिल्ली स्थित आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल (आरआर अस्पताल) में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 21 ग्रेनेडियर बटालियन में तैनात थे और पिछले करीब एक वर्ष से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे।
लंबी बीमारी के बावजूद हवलदार दीपक गोयत ने कभी हौसला नहीं छोड़ा। सेना की वर्दी में रहते हुए उन्होंने अंत तक देश सेवा का जज्बा बनाए रखा। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
मंगलवार दोपहर जब सेना के वाहन से शहीद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव कापड़ो पहुंचा, तो गांव से लेकर आसपास के क्षेत्र में भारत माता की जय और दीपक गोयत अमर रहें के नारे गूंज उठे। सैकड़ों वाहनों का काफिला गांव में उमड़ पड़ा और हर आंख नम हो गई।
पार्थिव शरीर के घर पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। मां, पिता और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। दीपक अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनके पिता बलवान सिंह भी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। शहीद अपने पीछे पत्नी और तीन साल की जुड़वा बेटियों को छोड़ गए हैं।
दीपक गोयत वर्ष 2016 में स्पोर्ट्स कोटा के तहत कुश्ती खेल के माध्यम से भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। खेल के अनुशासन और जज्बे ने उन्हें सेना तक पहुंचाया। उनकी ड्यूटी जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा क्षेत्र में भी रही, जहां उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए कर्तव्य निभाया।
शहीद की अंतिम यात्रा पूरे सैन्य सम्मान के साथ निकाली गई। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और अंतिम सलामी दी। गांव के श्मशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
गांव कापड़ो का यह सपूत भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसका साहस, समर्पण और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा।
Akhil Mahajan