हरियाणा कैबिनेट के 14 बड़े फैसले: शामलात भूमि का मालिकाना हक अब DC देंगे, खराब बीज बेचने पर दोगुना मुआवजा

हरियाणा कैबिनेट ने 14 प्रस्तावों को मंजूरी दी। शामलात भूमि का मालिकाना हक देने का अधिकार अब DC को मिलेगा, जबकि खराब बीज बेचने पर दोगुना मुआवजा देना होगा।

हरियाणा कैबिनेट के 14 बड़े फैसले: शामलात भूमि का मालिकाना हक अब DC देंगे, खराब बीज बेचने पर दोगुना मुआवजा

➤ शामलात देह भूमि में रह रहे लोगों को अब DC दे सकेंगे मालिकाना हक

➤ मीट दुकानों और बूचड़खानों के लिए दोहरे लाइसेंस की व्यवस्था खत्म

➤ खराब बीज या पौधे बेचने पर नर्सरी संचालकों को देना होगा दोगुना मुआवजा


मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा कैबिनेट की बैठक में सोमवार को 15 में से 14 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। बैठक में ग्रामीण विकास, शहरी निकाय, कृषि, न्यायिक सेवा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर प्रदेश के लाखों लोगों पर पड़ेगा।

कैबिनेट ने हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अध्यादेश-2026 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत अब 31 मार्च 2004 या उससे पहले शामलात देह भूमि पर मकान बनाकर रह रहे पात्र लोगों को मालिकाना हक देने की मंजूरी संबंधित जिला उपायुक्त (DC) भी दे सकेंगे। पहले यह अधिकार केवल विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक के पास था।

सरकार का कहना है कि बड़ी संख्या में आवेदन विभिन्न स्तरों पर लंबित पड़े हुए हैं। ऐसे में अधिकारों का विकेंद्रीकरण होने से पात्र लोगों को जल्द राहत मिल सकेगी और मामलों का तेजी से निपटारा होगा।

कैबिनेट ने हरियाणा नगर पालिका संशोधन अध्यादेश-2026 और हरियाणा नगर निगम संशोधन अध्यादेश-2026 को भी मंजूरी दे दी। इसके तहत मीट की दुकानों और बूचड़खानों के लिए स्थानीय निकायों से अलग लाइसेंस लेने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। अब इन व्यवसायों को केवल खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियमों के तहत ही संचालित किया जाएगा। इससे दोहरे लाइसेंस की व्यवस्था खत्म होगी और कारोबारियों को राहत मिलेगी।

बैठक में हरियाणा बागवानी नर्सरी नियम-2026 को भी मंजूरी मिली। नए नियमों के अनुसार यदि कोई नर्सरी संचालक किसानों को खराब गुणवत्ता के बीज या पौधे बेचता है तो उसे लागत का दोगुना मुआवजा देना होगा। साथ ही नर्सरियों के नियमित निरीक्षण, लाइसेंस निलंबन और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है।

कैबिनेट ने हरियाणा उच्चतर न्यायिक सेवा नियम-2007 में संशोधन को भी मंजूरी दी। इसके तहत जिला न्यायाधीशों के वेतनमान में वृद्धि होगी और उन्हें चयन ग्रेड तथा सुपर टाइम स्केल में पदोन्नति के अधिक अवसर मिलेंगे। चयन और पदोन्नति में मेरिट तथा वरिष्ठता दोनों को आधार बनाया जाएगा।

महिलाओं से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के उद्देश्य से हरियाणा राज्य महिला आयोग में गैर सरकारी सदस्यों की संख्या पांच से बढ़ाकर सात करने का फैसला भी लिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे घरेलू हिंसा, साइबर अपराध, यौन उत्पीड़न और महिला अधिकारों से जुड़े मामलों के समाधान में तेजी आएगी।

इन फैसलों को प्रदेश में प्रशासनिक सुधार, किसानों के हितों की सुरक्षा, न्यायिक सेवा के सुदृढ़ीकरण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।