हरियाणा में सरकारी प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी जांच का नया फॉर्मूला, 50 करोड़ से बड़े काम की EIC करेंगे 2 बार जांच
हरियाणा में सरकारी प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता जांच का नया ढांचा लागू हुआ है। 50 करोड़ से बड़े काम की EIC दो बार जांच करेंगे और ACR में क्वालिटी स्कोर जुड़ेगा।
हरियाणा में सरकारी प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी जांच का नया ढांचा लागू
➤ 50 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट की EIC दो बार और 25 करोड़ से अधिक की चार बार जांच करेंगे
➤ निरीक्षण रिपोर्ट का असर अफसरों की ACR और परफॉर्मेंस पर पड़ेगा
हरियाणा सरकार ने राज्य में चल रहे विकास कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नया ‘निरीक्षण ढांचा’ लागू किया है। इसके तहत अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद जांच का इंतजार नहीं किया जाएगा। काम चलने के दौरान ही तय शेड्यूल के अनुसार वरिष्ठ अधिकारी साइट पर पहुंचकर निर्माण की गुणवत्ता और सामने आ रही खामियों की जांच करेंगे।
क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी (QAA) के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी समीर पाल सरों ने बताया कि अथॉरिटी पहले से ही सड़कों, बिल्डिंग्स, सीवरेज, पेयजल और बिजली सप्लाई जैसे प्रोजेक्ट्स की जांच कर रही है। नए नियम लागू होने के बाद अब प्रोजेक्ट की लागत के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही और निरीक्षण की संख्या तय कर दी गई है।
इस नए निरीक्षण ढांचे का उद्देश्य निर्माण कार्य के दौरान ही कमियों को पकड़ना और उन्हें समय रहते दूर कराना है, ताकि प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं सामने न आएं।
50 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट की EIC दो बार करेंगे जांच
नए नियमों के तहत 50 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट्स की जांच इंजीनियर-इन-चीफ यानी EIC खुद करेंगे। उन्हें ऐसे प्रत्येक प्रोजेक्ट की साइट पर कुल 2 बार निरीक्षण करना होगा।
पहला निरीक्षण प्रोजेक्ट का 50 प्रतिशत भौतिक काम पूरा होने पर किया जाएगा, जबकि दूसरा निरीक्षण 90 प्रतिशत काम पूरा होने पर होगा। इस तरह निर्माण के महत्वपूर्ण चरणों में वरिष्ठ अधिकारी खुद साइट पर पहुंचकर काम की स्थिति और गुणवत्ता की जांच करेंगे।
25 करोड़ या उससे अधिक के प्रोजेक्ट में CE करेंगे 4 निरीक्षण
25 करोड़ रुपए या उससे अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट्स के लिए चीफ इंजीनियर यानी CE को कुल 4 बार साइट का निरीक्षण करना होगा।
इन निरीक्षणों का शेड्यूल प्रोजेक्ट की प्रगति के आधार पर तय किया गया है। CE को 20, 40, 60 और 80 प्रतिशत काम पूरा होने पर साइट का निरीक्षण करना होगा।
इससे निर्माण के अलग-अलग चरणों में काम की गुणवत्ता की जांच होती रहेगी और किसी स्तर पर कमी सामने आने पर उसे आगे का काम बढ़ने से पहले दर्ज किया जा सकेगा।
10 करोड़ या उससे अधिक के प्रोजेक्ट में SE की 6 बार जांच
वहीं 10 करोड़ रुपए या उससे अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट्स की निगरानी के लिए सुपरिटेंडिंग इंजीनियर यानी SE को कुल 6 बार साइट पर जाना होगा।
SE के निरीक्षण की प्रक्रिया 15, 30, 45, 60, 75 और 90 प्रतिशत प्रोग्रेस पर निर्धारित की गई है। यानी प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर 90 प्रतिशत काम पूरा होने तक अलग-अलग चरणों में वरिष्ठ अधिकारी निर्माण कार्य की जांच करेंगे।
इस व्यवस्था के तहत प्रोजेक्ट की प्रगति के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता पर भी नियमित निगरानी रखी जाएगी।
हर प्रोजेक्ट साइट पर रहेगी ‘साइट ऑर्डर बुक’
गड़बड़ी और घटिया निर्माण रोकने के लिए सरकार ने निरीक्षण व्यवस्था में दो बड़े बदलाव किए हैं। इनमें पहला बदलाव ‘साइट ऑर्डर बुक’ को लेकर है।
हर प्रोजेक्ट साइट पर एक रजिस्टर रखा जाएगा, जिसे साइट ऑर्डर बुक कहा जाएगा। निरीक्षण के दौरान अधिकारी को मौके पर मिलने वाली खामियां, तकनीकी निर्देश और सुधार के उपाय इसी बुक में दर्ज करने होंगे।
इसके अलावा निरीक्षण करने वाले अफसरों को अपनी रिपोर्ट 3 दिनों के भीतर तय फॉर्मेट में अथॉरिटी को भेजनी होगी। इससे साइट पर की गई जांच और अधिकारियों की ओर से दिए गए निर्देशों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
निरीक्षण रिपोर्ट में मिलेगा क्वालिटी स्कोर, ACR पर पड़ेगा असर
दूसरा बड़ा बदलाव अधिकारियों के वार्षिक मूल्यांकन यानी ACR से जुड़ा है। जांच रिपोर्ट में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग मेथड्स (SOMPs) के आधार पर ‘क्वालिटी स्कोर’ दिया जाएगा।
इस क्वालिटी स्कोर और निरीक्षण रिपोर्ट का सीधा असर संबंधित अफसरों के वार्षिक मूल्यांकन (ACR) और परफॉर्मेंस पर पड़ेगा। यानी प्रोजेक्ट की गुणवत्ता की निगरानी में अफसरों की भूमिका और उनकी जवाबदेही को भी मूल्यांकन व्यवस्था से जोड़ा गया है।
नई व्यवस्था से काम में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करना आसान होगा। वहीं निर्माण कार्य के दौरान तय चरणों पर निरीक्षण होने से प्रोजेक्ट में सामने आने वाली कमियों को समय रहते दर्ज करने और सुधार के उपाय करने की व्यवस्था मजबूत होगी।
Akhil Mahajan